राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार को सोने की कीमतों में ₹600 की गिरावट दर्ज की गई। गिरावट के बाद सोना ₹1,26,700 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कमजोर रुझान और अमेरिकी डॉलर की मजबूती इस गिरावट की मुख्य वजह हैं। पीटीआई के अनुसार, 99.5% शुद्धता वाला सोना भी सभी टैक्स सहित ₹600 टूटकर ₹1,26,100 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। चांदी में भी बड़ी गिरावट देखी गई और यह ₹2,000 की भारी गिरावट के साथ ₹1,58,000 प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर आ गई।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी ने बताया कि अमेरिकी डॉलर में मजबूती और यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका की नई कोशिशों की खबरों से सुरक्षित निवेश की मांग घटी है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव आया। उन्होंने आगे कहा कि यूएस ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स द्वारा अक्टूबर का जॉब्स डेटा जारी न करने का निर्णय भी बाजार भावना को कमजोर करने वाला कारक रहा। इससे फेडरल रिजर्व के पास अपनी साल की अंतिम बैठक से पहले महत्वपूर्ण श्रम बाज़ार डेटा उपलब्ध नहीं होगा।
गांधी के अनुसार इन हालात में संभावना है कि फेड दिसंबर की बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। अक्टूबर बैठक की मिनट्स से भी यह संकेत मिलता है कि कई अधिकारी 2025 तक दरों में बदलाव न करने के पक्ष में हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार: सोना-चांदी दोनों में गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में स्पॉट गोल्ड 16.48 डॉलर (0.40%) की गिरावट के साथ 4,061.53 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। मिराए एसेट शेयरखान के कमोडिटीज हेड प्रवीण सिंह ने बताया कि हल्की डॉलर मजबूती के बीच स्पॉट गोल्ड 4,060 डॉलर स्तर पर नुकसान के साथ ट्रेड कर रहा है। डॉलर इंडेक्स 0.03% बढ़कर 100.26 पर पहुंच गया। स्पॉट सिल्वर भी ग्लोबल मार्केट में 1.22% टूटकर 50.73 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।
कीमतें सीमित दायरे में, बाजार की नजर आर्थिक आंकड़ों पर
ऑगमोंट की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी ने कहा कि सोना और चांदी की कीमतें फिलहाल सीमित दायरे में हैं। निवेशक अब आने वाले आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जो अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। हाल ही में जारी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की 28–29 अक्टूबर बैठक की मिनट्स से पता चलता है कि भिन्न मतों के बावजूद फेड ने पिछले महीने ब्याज दरों में कटौती की थी। हालांकि कुछ अधिकारियों ने चेतावनी दी कि कम ब्याज दरें महंगाई नियंत्रण के प्रयासों को प्रभावित कर सकती हैं। सौमिल गांधी ने बताया कि अब बाजार की नजर सितंबर के यूएस नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर है, जो आज जारी होगा और इससे फेड की अगली मौद्रिक नीति को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिलेंगे।






































