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PM Kisan के दो साल हुए पूरे, किसान मामूली फीस का भुगतान कर CSCs पर योजना के लिए करवा सकते हैं अपना पंजीकरण

कॉमन सर्विस सेंटर (CSCs) को नामित फीस के भुगतान पर PM-KISAN योजना के लिए किसानों का पंजीकरण करने के लिए अधिकृत किया गया है।

India TV Paisa Desk Edited by: India TV Paisa Desk
Published on: February 24, 2021 12:51 IST
पीएम किसान सम्‍मान निधि के दो वर्ष सफलतापूर्वक हुए पूरे। - India TV Hindi News
Photo:AGRICULTURINDIA@TWITTWE

पीएम किसान सम्‍मान निधि के दो वर्ष सफलतापूर्वक हुए पूरे।

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM KISAN Samman Nidhi) को 2 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। दो साल पहले 24 फरवरी 2019 को पीएम-किसान योजना (PM Kisan Yojana) की शुरुआत हुई थी। दो साल में ये योजना मील का पत्थर साबित हुई है। इस योजना को किसानों के लिए वरदान माना जा रहा है। इससे किसानों खातों में सीधे तीन किस्तों में 2000 रुपये यानि कि कुल 6000 रुपये प्रतिवर्ष मिल रहे हैं। इस योजना के तहत प्रति वर्ष 6,000 रुपये की राशि, 2,000 रुपये की तीन चौमाही किस्तों में सीधे लाभार्थी किसान परिवारों के आधार पंजीकृत बैंक खातों में हस्तांतरित की जा रही है। पीएम-किसान योजना का लाभ केवल उन किसान परिवारों को मिलेगा जिनके नाम भूमि रिकॉर्ड में दर्ज किए गए हैं। हालांकि, इस संबंध में पूर्वोत्तर राज्यों और झारखंड के लिए अपवाद बनाया गया है।

कॉमन सर्विस सेंटर (CSCs) को नामित फीस के भुगतान पर PM-KISAN योजना के लिए किसानों का पंजीकरण करने के लिए अधिकृत किया गया है। PM Kisan में रजिस्टर करना बेहद आसान है। किसान अपना स्व-पंजीकरण भी कर सकते हैं। यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है। पीएम किसान के जारी होने से किसानों को छोटे कृषि जरूरतों के लिए किसी पर आश्रित नहीं होना पड़ता। पीएम-किसान पोर्टल (http://pmkisan.gov.in) के फार्मर्स कॉर्नर पर दी जाने वाली सुविधाएं सीएससी के माध्यम से भी उपलब्ध हैं। एक विशेष मोबाइल एप भी लॉन्च किया गया है जो पीएम-किसान पोर्टल के किसान कॉर्नर पर उपलब्ध सुविधाएं प्रदान करता है।

  • नामांकन के लिए, किसान को राज्य सरकार द्वारा नामित स्थानीय पटवारी/राजस्व अधिकारी/ नोडल अधिकारी (पीएम-किसान) से संपर्क करना होगा।
  • किसान कॉर्नर, सीएससी और मोबाइल एप के माध्यम से नामांकन की विशेष सुविधाएं प्रारम्भ की गईं।
  • किसानों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा पीएम-किसान पोर्टल (http://pmkisan.gov.in) के किसान कॉर्नर में प्रदान की गई है।
  • किसान अपना पंजीकरण किसान कॉर्नर के माध्यम से भी कर सकते हैं।
  • किसान कॉर्नर के माध्यम से अपने आधार कार्ड के अनुसार किसान अपने नाम को पीएम-किसान डेटाबेस में भी संपादित कर सकते हैं।
  • पीएम-किसान पोर्टल के किसान कॉर्नर पर लॉग-इन करके किसान अपने आधार कार्ड के अनुसार अपने नाम को पीएम-किसान डेटाबेस में भी सुधार सकते हैं।
  • पीएम-किसान पोर्टल के किसान कॉर्नर पर जाकर किसान अपने भुगतान की स्थिति भी जान सकते हैं।
  • लाभार्थियों के गाँव-वार विवरण पीएम-किसान पोर्टल  के किसान कॉर्नर पर भी उपलब्ध हैं।
  • PM-KISAN योजना के तहत वित्तीय लाभ वेब-पोर्टल पर राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा अपलोड किए गए लाभार्थियों के 100 प्रतिशत त्रुटि-मुक्त डेटा के आधार पर स्थानांतरित किया जाता है।

पीएम किसान के शानदार 2 साल पूरे।
Image Source : AGRICULTURINDIA@TWITTER
पीएम किसान के शानदार 2 साल पूरे।

11.64 करोड़ परिवार हुए लाभान्वित

  • पीएम किसान सम्मान निधि किसानों को आर्थिक आय में मदद करता है। पीएम किसान सम्मान निधि से करीब 11.64 करोड़ परिवार लाभान्वित हुए हैं।
  • कोरोना संकट के दौरान पीएम किसान योजना ने किसानों का पूरा ध्यान रखा है। योजना की किस्तों से कोविड-19 महामारी से लड़ने की आर्थिक सहायता किसानों को मिली है।
  • पात्र पीएम-किसान लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण मोड (ऑनलाइन) के माध्यम से सीधे सम्मान राशि भेजी जाती है।
  • कुल 1,15,638 करोड़ रुपये की धनराशि लाभार्थी परिवारों को प्रदान की गई है। मौजूदा वित्‍त वर्ष 2020-21 में ही, कुल 60,437 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है।
  • 2 वर्ष से भी कम की अवधि के भीतर करीब 10.75 करोड़ किसान परिवारों को लाभ अंतरण सुनिश्‍चित करना इस सरकार के संकल्‍प और कार्यक्षमता को दर्शाता है।
  • करीब 10.75 करोड़ लाभार्थी किसान परिवारों को राज्‍य/संघ राज्‍य क्षेत्र की सरकारों से शत-प्रतिशत त्रुटि मुक्‍त सत्‍यापित व वैध डेटा प्राप्‍त होने के पश्‍चात स्‍कीम का लाभ दिया गया है।

पीएम किसान योजना की विशेषताएं

  • PM-KISAN योजना के तहत वित्तीय लाभ 4-माह की अवधि के अंतराल से लाभार्थियों को देय है जिसमें किसानों का डेटा पोर्टल पर अपलोड किया जाता है।
  • दिसंबर 2018 से पात्र किसान परिवारों को 2000 की तीन समान किस्तों में 6000 की सम्मान राशि का वितरण किया जाता है।
  • भारत सरकार ने खेती योग्य भूमि रखने वाले किसानों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता योजना के रूप में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना लागू किया।
  • भारत सरकार ने खेती योग्य भूमि रखने वाले किसान परिवारों को कृषि और संबद्ध गतिविधियों के साथ-साथ घरेलू जरूरतों से संबंधित खर्चों हेतु आर्थिक सहायता योजना के रूप में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना लागू किया।
  • PM-KISAN खेती योग्य भूमि रखने वाले किसानों के परिवारों के लिए एक आर्थिक सहायता योजना है। यह उच्च आय वर्ग से संबंधित कुछ विशेष अपवर्जन के अधीन है।
  • PM-KISAN योजना के तहत, पात्र लाभार्थी किसानों को 6000 रुपये प्रति वर्ष का वित्तीय लाभ चार माह के अंतराल में तीन समान किस्तों में देय है।
  • PM-KISAN योजना न केवल सबसे कमजोर किसान परिवारों को पूरक आय सुनिश्चित करती है, बल्कि विशेष रूप से फसल के मौसम से पहले उनकी अन्य जरूरतों को भी पूरा करती है।
  • पीएम-किसान योजना किसानों को खेती से सम्बंधित खर्चों को पूरा करने के लिए साहूकारों के चंगुल में पड़ने से बचाती है और खेती की गतिविधियों में उनकी निरंतरता सुनिश्चित करती है।
  • PM-KISAN योजना भी किसानों को अपनी कृषि प्रणालियों के आधुनिकीकरण के लिए सक्षम बनाती है जो उनके लिए सम्मानजनक जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त करती है।
  • फरवरी, 2019 में केवल 2 हेक्टेयर खेती योग्य भूमिधारक छोटे और सीमांत किसान परिवारों के लिए PM-KISAN योजना शुरू की गई थी।
  • किसानों से प्राप्त पूरे समर्थन के मद्देनजर, 1 जून 2019 को देश में सभी किसानों के लिए PM-KISAN योजना का दायरा बढ़ा दिया गया।
  • लाभार्थियों की पहचान की पूरी जिम्मेदारी राज्य/ केंद्रशासित प्रदेश सरकारों के साथ रहती है।
  • राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश सरकारों को उपलब्ध भूमि रिकॉर्ड के आधार पर और पीएम-किसान योजना के परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार पात्र लाभार्थियों की पहचान करने की आवश्यकता होती है।
  • राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश सरकारों को पीएम-किसान योजना के संचालन दिशानिर्देशों व अपवर्जन मानदंड के अनुसार पात्र लाभार्थियों की पहचान करना आवश्यक है।
  • पूरी परिक्षण और सत्यापन प्रक्रिया हर किश्त के हस्तांतरण के दौरान दोहराई जाती है।
  • पीएम-किसान योजना को मूल प्रारूप के समग्र दायरे में रखते हुए समय के साथ योजना के आकार, तौर-तरीकों और तंत्र में निरंतर सुधार/परिवर्तन के साथ लागू किया जा रहा है।
  • समय-समय पर लाभार्थियों को वित्तीय लाभ के निर्बाध और तेजी से हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए कई प्रक्रियात्मक परिवर्तन/हस्तक्षेप/अभियान लाए गए हैं।
  • योजना के परिचालन दिशानिर्देशों में जरूरत के अनुसार संशोधन किए जाते हैं।
  • समुदाय आधारित भूमि के स्वामित्व के मद्देनजर मणिपुर और नागालैंड राज्यों के लिए विशेष पहचान प्रक्रियाएं तैयार की गई हैं।
  • झारखंड राज्य के लिए विशेष पहचान प्रक्रिया विकसित की गई है, जहां भूमि रिकॉर्ड अपडेट नहीं है, क्योंकि यहां अनेक दशकों से उत्तराधिकार के आधार पर भूमि रिकॉर्ड का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) दर्ज नहीं किया गया है।
  • अपवर्जन के उद्देश्य से राज्य/ केन्द्र शासित प्रदेश सरकार लाभार्थियों द्वारा स्व-घोषणा के आधार पर लाभार्थी की पात्रता को प्रमाणित कर सकती है।
  • राज्य सरकारों के द्वारा अपलोड किए गए लाभार्थियों के डेटा के आधार पर बैंकों सहित विभिन्न संबंधित एजेंसियों द्वारा उनके डेटा के बहु-स्तरीय परिक्षण और सत्यापन के बाद सम्मान राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित की जाती है।
  • अपवर्जन के उद्देश्य से राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश सरकार लाभार्थियों द्वारा स्व-घोषणा के आधार पर लाभार्थी की पात्रता को प्रमाणित कर सकती है।
  • यदि लाभार्थी गांव में उपलब्ध नहीं है / नहीं रहता है, तो राज्य / केंद्रशासित प्रदेश सरकारें उसके परिवार के अन्य वयस्क सदस्य द्वारा घोषणा के आधार पर प्रमाणीकरण पर विचार कर सकती हैं।
  • आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के संदर्भ में समस्त भूमिधर अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) किसान परिवारों को योजना के तहत लाभ से बाहर रखा गया है।
  • गलत स्व-घोषणा के मामले में लाभार्थी स्थानांतरित वित्तीय लाभ और कानून के अनुसार अन्य दंडात्मक कार्यों की वसूली के लिए उत्तरदायी होगा।
  • असम, मेघालय, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर, जहां आधार की पहुँच न्यूनतम है, 01.12.2019 से दी जाने वाली प्रत्येक बकाया किस्त समस्त लाभार्थियों के उपलब्ध आधार डेटाबेस के आधार पर ही अवमुक्त की जा रही है।
  • असम, मेघालय, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर, जहां आधार की पहुँच न्यूनतम है, 01.12.2019 से दी जाने वाली प्रत्येक बकाया किस्त समस्त लाभार्थियों के उपलब्ध आधार डेटाबेस के आधार पर ही अवमुक्त की जा रही है।
  • 01.12.2019 से दी जाने वाली प्रत्येक बकाया किस्त समस्त लाभार्थियों के उपलब्ध आधार डेटाबेस के आधार पर ही अवमुक्त की जा रही है।

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