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RBI रेपो रेट तो घटा देता है लेकिन होम लोन पर बैंक कम नहीं करते हैं ब्याज दरें, जान लें ये जरूरी बातें

 Published : Apr 09, 2025 06:09 pm IST,  Updated : Apr 09, 2025 06:09 pm IST

केंद्रीय बैंक की तरफ से रेपो रेट में कटौती का फायदा सभी बैंक ग्राहक को तुरंत नहीं देते हैं। इससे उनकी समान मासिक किस्तों यानी EMI में कमी नहीं आती है।

ग्राहक आरबीआई से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र हैं।- India TV Hindi
ग्राहक आरबीआई से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र हैं। Image Source : PIXABAY

भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने बुधवार को नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती करके इसे 6 प्रतिशत करने की घोषणा की। रेपो दर में कटौती को आम तौर पर इस बात से जोड़कर देखा जाता है कि उधार लेने की लागत आने वाले दिनों में कम हो जाएगी, और समान मासिक किस्तों यानी EMI में कमी आएगी। हालांकि, ऐसे भी कई उदाहरण हैं जब ग्राहकों को तत्काल इसका फायदा नहीं मिलता है। सिर्फ फ्लोटिंग-रेट लोन ही रेपो दर से जुड़े होते हैं, लेकिन उन पर भी रेपो दर में बदलाव का तत्काल प्रभाव नहीं पड़ता है, क्योंकि ऐसे लोन को विशिष्ट अंतराल पर, आमतौर पर हर तीन या छह महीने में, रीसेट किया जाता है।

फिक्स्ड-रेट और फ्लोटिंग-रेट लोन

लोन दो तरह के होते हैं: फिक्स्ड-रेट लोन और फ्लोटिंग-रेट लोन। पहले वाले में, ब्याज दरें आखिर तक एक जैसी ही रहेगी। दूसरी तरफ, फ्लोटिंग-रेट लोन की ब्याज दरें भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लिए गए फैसले के आधार पर बदलती रहती हैं। अगर केंद्रीय बैंक यानी आरबीआई रेपो रेट में कटौती करने का फैसला करता है, तो बैंक इसका लाभ उन ग्राहकों को देंगे जिन्होंने फ्लोटिंग-रेट लोन का विकल्प चुना है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

अगर RBI द्वारा रेपो रेट में कटौती के बाद भी फ्लोटिंग-रेट होम लोन की ब्याज दर अपरिवर्तित रहती है, तो क्या करें? इस सवाल पर वॉयस ऑफ बैंकिंग के संस्थापक अश्विनी राणा कहते हैं कि अगर किसी ग्राहक के पास फ्लोटिंग-रेट होम लोन है और आरबीआई द्वारा रेपो रेट कम करने के बावजूद उसकी ब्याज दर अपरिवर्तित रहती है, तो ग्राहक को इस मामले पर चर्चा करने के लिए बैंक से संपर्क करना चाहिए। अगर बैंक मदद करने से इनकार करता है, तो ग्राहक आरबीआई से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र हैं।

कौन सा बेहतर है - फिक्स्ड या फ्लोटिंग?

जानकार के मुताबिक, यह बैंकों द्वारा दी जाने वाली मौजूदा ब्याज दर पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, मौजूदा समय में, ब्याज दर कम है और इसलिए, ग्राहकों को फिक्स्ड ब्याज दर का विकल्प चुनना चाहिए। यह आरबीआई द्वारा 25 बीपीएस की दूसरी रेपो दर कटौती है। हम ऐसी एक और कटौती की उम्मीद कर सकते हैं, लेकिन इससे आगे नहीं। क्योंकि इसका तब फिक्स्ड डिपॉजिट पर असर पड़ेगा क्योंकि वे उनकी लिक्विडिटी हैं। इसलिए अगर कोई आज होम लोन लेने जा रहा है, तो उसे फिक्स्ड-रेट लोन लेना चाहिए।

लोन टेकओवर

राणा के मुताबिक, ग्राहकों के पास लोन टेकओवर का विकल्प भी है। हालांकि, कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें ग्राहकों को इस विकल्प को चुनते समय ध्यान में रखना चाहिए। उदाहरण के लिए, ब्याज दर में अंतर, शेष अवधि, प्रोसेसिंग फीस और अन्य कई जरूरी बातें हैं, जिनपर अच्छी तरह होमवर्क करने के बाद ही कोई फैसला करना चाहिए।

(Disclaimer: ये कोई निवेश सलाह नहीं है बल्कि सिर्फ एक जानकारी है। रुपये-पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।)

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