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सुप्रीम कोर्ट ने Unitech को दी वॉर्निंग, ब्याज दो नहीं तो हो सकती है कुर्की

 Written By: Ankit Tyagi
 Published : Apr 25, 2017 08:39 am IST,  Updated : Apr 25, 2017 08:39 am IST

सुप्रीम कोर्ट ने Unitech को गुरूग्राम स्थित उसकी एक परियोजना में 39 मकान खरीदारों के 16.55 करोड़ रुपए के निवेश पर 14% ब्याज 8 मई तक जमा करने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने Unitech को दी वॉर्निंग, ब्याज दो नहीं तो हो सकती है कुर्की- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट ने Unitech को दी वॉर्निंग, ब्याज दो नहीं तो हो सकती है कुर्की

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने जमीन जायदाद विकास कंपनी यूनिटेक (Unitech ) को गुरूग्राम स्थित उसकी एक परियोजना में 39 मकान खरीदारों के 16.55 करोड़ रुपए के निवेश पर 14 फीसदी ब्याज आठ मई तक जमा करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने यह भी आगाह किया कि समयसीमा का पालन नहीं करने पर कंपनी की संपत्ति कुर्क की जा सकती है।

और समय देने से इनकार

न्यायालय ने यूनिटेक रेसिडेंशियल रिजार्ट लिमिटेड को इस मामले में और समय देने से इनकार किया जो मकान खरीदारों को फ्लैट देने में विलम्ब कर रही है। यह भी पढ़े: पतंजलि के आंवला रस की बिक्री निलंबित, टैस्ट में फेल होने पर कैंटीन स्टोर डिपार्टमेट CSD ने लिया फैसला

ब्याज दो नहीं तो हो सकती है कुर्की

न्यायाधीश दीपक मिश्र और न्यायाधीश ए एम खानविलकर की पीठ ने कहा, मामले को आठ मई के लिये सूचीबद्ध किया जाए। उस समय तक पूर्व के निर्देश के तहत अगर राशि जमा नहीं की जाती है, यह अदालत अपीलकर्ता कंपनी की संपत्ति कुर्क करने पर विचार कर सकती है।

कंपनी की प्रतिक्रिया

कंपनी की तरफ से पेश अधिवक्ता ने जब न्यायालय से समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया, पीठ ने साफ तौर पर कहा, धन आने दीजिए।

कुल 39 मकान खरीदारों में 20 का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता ब्रजेश कुमार ने कंपनी की इस दलील का विरोध किया और कहा कि उनसे धन जल्द जमा करने के लिए कहा जाना चाहिए। खुशखबरी! आप अब मकान खरीदने और EMI के भुगतान के लिए EPF खाते से निकाल सकते हैं 90 फीसदी रकम

क्या है मामला

इन मकान खरीदारों ने यूनिटेक की गुरूग्राम में विस्टा आवास परियोजना में फ्लैट बुक कराया था। कंपनी के वादे के अनुसार 2012 तक फ्लैट नहीं देने पर खरीदारों ने ब्याज के साथ 16.55 करोड़ रुपए की मांग की। शीर्ष अदालत ने 20 फरवरी को कंपनी को निर्देश दिया था कि वह निवेश किये गये 16.55 करोड़ रपये पर एक जनवरी 2010 से 14 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज जमा कराये। न्यायालय ने रीयल एस्टेट कंपनी से राशि शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में जमा कराने को कहा था।

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