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सरकार को रेवेन्यू या कमाई के तौर पर कई स्रोतों से पैसे आते हैं, जिसमें सबसे ज्यादा इनकम सरकारी उधारी और अन्य वित्तीय देनदारियों से होती है। लेकिन जब खर्च की बारी आती है तो सबसे ज्यादा खर्च राज्यों के टैक्स और शुल्क की हिस्सेदारी देने में होता है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में रखे गए इस दस्तावेज में साफ किया गया है कि भारत अब केवल ‘स्वदेशी’ सोच तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था को एक रणनीतिक अनिवार्यता के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है। आइए जानें इकोनॉमिक सर्वे 2026 की 5 बड़ी बातें।
इकोनॉमिक सर्वे 2026 के मुताबिक, केंद्र सरकार की स्कीम PMAY-U के तहत अब तक 96 लाख से ज्यादा घर पूरे होकर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। यह आंकड़ा न केवल सरकार की आवास नीति की सफलता को दर्शाता है, बल्कि देश में बढ़ती अफोर्डेबल हाउसिंग की मांग का भी साफ संकेत देता है।
यूनियन बजट से ठीक पहले देश की अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा बताने वाला इकोनॉमिक सर्वे 2026 आज संसद के पटल पर रखा गया। आर्थिक सर्वे के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत की वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत से अधिक रहने की संभावना जताई गई है।
सरकार की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों में दलहन फसलों के रकबे में जोरदार तेजी दर्ज की गई है। आंकड़ों से संकेत मिल रहा है कि मौजूदा रबी सीजन स्थिर और संतोषजनक तरीके से प्रगति कर रहा है।
जानकारों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों से 2025-2030 के बीच चांदी की मांग में 15-20% की वृद्धि होने की उम्मीद है।
भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और परिचालन कारणों के चलते कई ट्रेनों के समय में बदलाव किया है। इस बदलाव की जद में तेजस एक्सप्रेस, हमसफर एक्सप्रेस, अमृत भारत एक्सप्रेस समेत कुल 12 ट्रेनें आई हैं। नई टाइमिंग अलग-अलग तारीखों से लागू होगी।
भारतीय शेयर बाजार 29 जनवरी को शुरुआती कारोबार में मंदी के मूड में दिखा। ग्लोबल संकेतों में मिले-जुले रुख के बावजूद, सेंसेक्स 250.45 अंक गिरकर 82,094.23 पर आ गया, जबकि निफ्टी 60.80 अंक टूटकर 25,281.95 पर खुला।
साल 2026 का बजट सिर्फ नए आर्थिक प्रस्तावों और टैक्स लाभों तक ही सीमित नहीं रहेगा। सीनियर सिटीजन्स यानी बुजुर्ग यात्रियों के लिए भी बड़ी खुशखबरी आने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय रेलवे फिर से सीनियर सिटीजन कंसेशन को बहाल करने की तैयारी कर रहा है।
बढ़ती महंगाई, ऊंची ब्याज दरें और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भारतीय परिवारों के लिए सोना एक बार फिर सबसे भरोसेमंद सहारा बनकर उभरा है। यही वजह है कि देश में सोने के आभूषण के बदले कर्ज यानी गोल्ड लोन का बाजार बीते दो वर्षों में रिकॉर्ड रफ्तार से बढ़ा है।
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