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फिर राजभवन और मान सरकार के बीच ठनी, राज्यपाल ने विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र को बताया 'अवैध'

पंजाब के राज्यपाल ने विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र पर आपत्ति जताई है। उन्होंने इस सत्र को गैर-कानूनी करार दिया है। राजभवन की ओर से विधानसभा सचिव को पत्र भेजा गया है।

Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
Published : Oct 14, 2023 11:55 am IST, Updated : Oct 14, 2023 12:00 pm IST
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित  - India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित

पंजाब के मख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के बीच किसी ना किसी मुद्दे पर तकरार जारी रहती है। अब पंजाब सरकार ने 20 और 21 अक्टूबर को विधानसभा का दो दिवसीय सत्र बुलाया है, जो विवादों में घिर गया है। पंजाब के राज्यपाल ने विधानसभा के इस विशेष सत्र को अवैध और सत्र के दौरान किए जाने वाले किसी भी कामकाज को गैर-कानूनी बताया है। पंजाब राजभवन ने राज्यपाल के हवाले से विधानसभा के सचिव को पत्र भेजकर साफ कर दिया है कि इस विशेष सत्र के अधीन किया जाने वाला कामकाज शून्य की श्रेणी में रहेगा। 

SYL विवाद पर रुख साफ करना चाहती है सरकार  

इससे पहले पंजाब विधानसभा अध्यक्ष ने दो दिवसीय सत्र की घोषणा करते समय कहा था कि यह सत्र 20 जून को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित बजट सत्र का हिस्सा है। यही वजह है कि राज्यपाल से अनुमति लेना जरूरी नहीं है। दरअसल, पंजाब सरकार ने सतलुज यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए दो दिवसीय विधानसभा सत्र बुलाया है। पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने नहर को पूरा करने के लिए कोई समाधान नहीं ढूंढने के लिए पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। इसने केंद्र को पंजाब में भूमि के उस हिस्से का सर्वे करने को कहा था जो परियोजना के लिए आवंटित किया गया है। SYL मुद्दे को लेकर इन दिनों पंजाब सरकार विपक्ष के निशाने पर है। SYL मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में पंजाब का पक्ष ठीक से नहीं रखने आरोप लगाया गया है।

विधानसभा सचिव को लिखे पत्र में क्या कहा गया है?

पंजाब राजभवन की ओर से विधानसभा सचिव को 12 अक्टूबर को पत्र भेजा गया था, जिसमें 19-20 जून को विशेष सत्र आयोजित करने पर राज्यपाल द्वारा उठाई गई पहले की आपत्ति का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है, "कानूनी सलाह के आधार पर राज्यपाल ने 24 जुलाई को बताया था कि इस तरह का सत्र बुलाना अवैध है, विधायिका की स्वीकृत प्रक्रियाओं और अभ्यास और संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है।" इसमें कहा गया कि सत्र के कामकाज का एजेंडा पूरा होने के बाद 22 मार्च को बजट सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था।

ऐसा कोई भी विस्तारित सत्र अवैध है: राजभवन

पत्र में कहा गया है, "अब इस नए मामले में भी 16वीं पंजाब विधानसभा के चौथे बजट सत्र का एक विशेष सत्र बुलाने का सुझाव दिया गया है, यह चौथे सत्र की निरंतरता है, जिसे 20 जून को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। यह और कुछ नहीं, बल्कि बजट सत्र को आगे बढ़ाने की एक कोशिश है, जिसे राज्यपाल ने 3 मार्च के लिए बुलाया था और जो 22 मार्च को कामकाज के एजेंडे के पूरा होने के बाद समाप्त हुआ था।'' इसमें कहा गया है, "24 जुलाई के पत्र में बताए गए कारणों के मद्देनजर ऐसा कोई भी विस्तारित सत्र अवैध है और ऐसे सत्रों के दौरान किया गया कोई भी कामकाज गैर-कानूनी और शून्य है।"

- IANS इनपुट के साथ

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