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पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा 7 दिन की ED रिमांड पर, जानें 100 करोड़ के हेरफेर का क्या है मामला

 Reported By: Atul Bhatia, Edited By: Malaika Imam
 Published : May 10, 2026 09:58 am IST,  Updated : May 10, 2026 10:10 am IST

धन शोधन निवारण अधिनियम की विशेष अदालत ने संजीव अरोड़ा को 7 दिन की ईडी की हिरासत में भेज दिया है। अरोड़ा की ओर से अदालत में कहा गया कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है।

संजीव अरोड़ा- India TV Hindi
संजीव अरोड़ा Image Source : FILE (ANI)

गुरुग्राम कोर्ट ने पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 7 दिन की प्रवर्तन निदेशालय (ED) हिरासत में भेज दिया है। अदालत ने कहा कि मामले में पैसों के लेन-देन, फर्जी कंपनियों और कथित फर्जी बिलिंग की जांच के लिए ED को आरोपी से पूछताछ की जरूरत है। ED ने 10 दिन की हिरासत का अनुरोध किया था। मंत्री के वकील ने बताया कि ED ने यह मामला 05 मई को दर्ज किया और 09 मई को गिरफ्तारी हुई। उन्होंने इसे "राजनीति से प्रेरित" कार्रवाई बताया। 

ED ने अदालत को बताया कि 17 अप्रैल 2026 को हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड और उससे जुड़ी जगहों पर छापेमारी की गई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने मोबाइल फोन एक्सपोर्ट के नाम पर करीब 157 करोड़ रुपये का कारोबार दिखाया, जिसमें से लगभग 102 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट सिर्फ दो यूएई की कंपनियों को किया गया। ED का दावा है कि ये कंपनियां आपस में जुड़ी हुई हैं।

ED के अनुसार, PMLA के तहत ताजा जांच 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के मोबाइल फोन की "फर्जी" जीएसटी खरीद और उसके बाद निर्यात के जरिए कथित अवैध धन को दुबई से भारत वापस लाने से जुड़ी है। आरोप है कि फर्जी 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' (आईटीसी) का दावा करने के लिए दिल्ली की "अस्तित्वहीन" कंपनियों से जीएसटी खरीद के कई फर्जी बिल प्राप्त किए गए।

जीएसटी रिफंड लेने का आरोप

जांच एजेंसी के मुताबिक, कई सप्लायर कंपनियां सिर्फ कागजों पर मौजूद थीं। इन कंपनियों पर बिना सामान दिए फर्जी बिल बनाने और जीएसटी रिफंड लेने का आरोप है। ED ने कहा कि इस मामले में कई शेल कंपनियों और बैंक खातों का इस्तेमाल कर पैसों का लेन-देन किया गया, ताकि असली पैसों का रास्ता छिपाया जा सके।

ED ने अदालत में कहा कि संजीव अरोड़ा कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर थे और पूरे कारोबार पर उनका नियंत्रण था। एजेंसी का आरोप है कि फर्जी खरीद, फर्जी एक्सपोर्ट और जीएसटी रिफंड के जरिए गलत तरीके से पैसा कमाया गया।

"झूठे मामले में फंसाया गया"

वहीं, संजीव अरोड़ा की तरफ से अदालत में कहा गया कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने दलील दी कि ED के पास ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है, जिससे साबित हो कि आरोपी ने मनी लॉन्ड्रिंग की है। यह भी कहा गया कि मामला FEMA नियमों से जुड़ा है और अब तक किसी अपराध से हुई कमाई का साफ रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। 

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने कहा कि शुरुआती तौर पर जांच में गंभीर आरोप सामने आए हैं और पैसों के लेन-देन की पूरी कड़ी समझने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। इसके बाद, अदालत ने संजीव अरोड़ा को 7 दिन के लिए ED रिमांड पर भेज दिया। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी को मेडिकल सुविधा और अपने वकील से मिलने की अनुमति दी जाएगी।

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