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32 साल पुराना यमुना जल विवाद खत्म, हरियाणा देगा हक का पानी, राजस्थान के 3 जिलों को मिलेगा सीधा फायदा

 Reported By: Manish Bhattacharya Edited By: Malaika Imam
 Published : Jun 29, 2026 02:55 pm IST,  Updated : Jun 29, 2026 03:02 pm IST

हरियाणा और राजस्थान के बीच यमुना जल विवाद खत्म होने जा रहा है। हरियाणा सरकार यमुना जल बंटवारा समझौते के तहत राजस्थान को उसके हक का पानी देने के लिए तैयार हो गई है।

यमुना जल विवाद का मुद्दा सुलझा- India TV Hindi
यमुना जल विवाद का मुद्दा सुलझा Image Source : REPORTER INPUT

राजस्थान और हरियाणा के बीच पिछले 32 सालों से चला आ रहा यमुना जल विवाद आखिरकार खत्म होने जा रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस मौके पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह भी उपस्थित रहेंगे।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों के चलते महज सवा दो साल में ही इस दिशा में इतनी तेजी से कार्रवाई संभव हो सकी है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य राजस्थान के पानी की गंभीर किल्लत से जूझ रहे इलाकों तक पेयजल पहुंचाना है।

परियोजना के मुख्य बिंदु-

  1. हरियाणा सरकार, साल 1994 में हुए यमुना जल बंटवारा समझौते के तहत राजस्थान को उसके हक का पानी देने के लिए तैयार हो गई है।
  2. पानी को हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान तक लाने के लिए करीब 295 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाई जाएगी।
  3. इस परियोजना के जरिए राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र को 1917 क्यूसेक पानी मिलेगा।

इन जिलों को होगा सीधा फायदा

इस समझौते से राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के तीन प्रमुख जिलों के लाखों लोगों को सीधा लाभ पहुंचेगा-

  • चूरू
  • सीकर
  • झुंझुनू

यह समझौता दोनों राज्यों के बीच जल सहयोग और समन्वय को नई मजबूती देगा। परियोजना से भविष्य में क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति मिलने की संभावना है।

बता दें कि राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल विवाद मुख्य रूप से 1994 में हुए एक अंतर-राज्यीय समझौते को धरातल पर लागू न कर पाने के कारण था। इस समझौते के तहत राजस्थान को यमुना नदी के पानी का लगभग 10.4 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया गया था, जिसे हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान तक पहुंचाना था। हालांकि, पिछले तीन दशकों से दोनों राज्यों के बीच इस पानी को ले जाने वाली नहर के निर्माण और पानी की उपलब्धता को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी। हरियाणा का तर्क था कि मानसून के अलावा अन्य दिनों में उसके पास अतिरिक्त पानी नहीं है, जबकि राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र (चूरू, सीकर, झुंझुनू) और राजगढ़ जैसे इलाके लंबे समय से गंभीर पेयजल और सिंचाई संकट से जूझ रहे थे। यह पूरा इलाका मरुस्थलीय और भूजल की कमी से ग्रस्त है।

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