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शहीद पायलट ऋषि राज सिंह का हुआ अंतिम संस्कार, पिता को रोते देख बिलख पड़ा परिवार

Edited By: Khushbu Rawal @khushburawal2 Published : Jul 10, 2025 11:09 pm IST, Updated : Jul 10, 2025 11:09 pm IST

23 वर्षीय ऋषि राज सिंह बुधवार को हुए विमान हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय वायु सेना के दो पायलट में से एक थे। ऋषि राज सिंह की अंतिम यात्रा तिरंगा यात्रा के रूप में निकाली गई। आगे-आगे भारतीय वायुसेना के जवान चल रहे थे और पीछे गांववाले भारत माता की जय और ऋषिराज अमर रहें के नारे लगाते चल रहे थे।

pilot rishi raj singh- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO फ्लाइट लेफ्टिनेंट ऋषि राज सिंह की फाइल फोटो।

जोधपुर: राजस्थान के चूरू के निकट नियमित उड़ान के दौरान जगुआर लड़ाकू विमान दुर्घटना में जान गंवाने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट ऋषि राज सिंह के पार्थिव शरीर का गुरुवार शाम राज्य के पाली जिले में स्थित उनके पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान के बीच अंतिम संस्कार किया गया। 23 वर्षीय ऋषि राज सिंह बुधवार को हुए विमान हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय वायु सेना के दो पायलट में से एक थे।

तिरंगे में लिपटे शहीद ऋषि राज को अंतिम विदाई

सिंह हरियाणा के रोहतक के खेरी साध गांव के रहने वाले स्क्वाड्रन लीडर लोकेंद्र सिंह सिंधु के साथ उड़ान भर रहे थे। सिंह का पार्थिव शरीर गुरुवार दोपहर सूरतगढ़ से जोधपुर वायुसेना स्टेशन लाया गया। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने वायुसेना स्टेशन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। जोधपुर से पार्थिव शरीर को हेलीकॉप्टर द्वारा सिरोही ले जाया गया और फिर सड़क मार्ग से उनके गांव खिवांदी ले जाया गया। जैसे ही सिंह की मौत की खबर फैली, रिश्तेदार और ग्रामीण बुधवार से ही उनके गांव के घर पर उनके माता-पिता को सांत्वना देने के लिए इकट्ठा होने लगे।

रोने लगे पिता

ऋषि राज सिंह की अंतिम यात्रा तिरंगा यात्रा के रूप में निकाली गई। आगे-आगे भारतीय वायुसेना के जवान चल रहे थे और पीछे गांववाले भारत माता की जय और ऋषिराज अमर रहें के नारे लगाते चल रहे थे। रास्ते में छोटे बच्चे सेना की वर्दी पहनकर हाथ में तिरंगा लिए खड़े थे। उन्होंने “जब तक सूरज चांद रहेगा ऋषिराज का नाम रहेगा” के नारे लगाए। पैतृक गांव में सैन्य सम्मान से सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। छोटे भाई युवराज सिंह ने उनको मुखाग्नि दी। शहीद के अंतिम संस्कार के दौरान पिता जसवंत सिंह भावुक हो गए और फूट-फूटकर रोने लगे।

ऋषि राज के चाचा ने क्या बताया?

ऋषि राज के चाचा हितपाल सिंह ने कहा, "वह हमारे परिवार का गौरव था। उसका करियर मज़बूत होने के बाद, हमने उसके जीवन के अगले अध्याय की तैयारी शुरू कर दी थी, और उम्मीद थी कि एक-दो साल में उसकी शादी हो जाएगी। लेकिन अब सब कुछ खत्म हो गया है।" पायलट की मौत के लिए "पुराने लड़ाकू विमानों" को ज़िम्मेदार ठहराते हुए, उन्होंने सवाल उठाया कि भारतीय पायलट की कीमत पर ऐसी "पुरानी मशीनों" को चलाने की अनुमति क्यों दी जा रही है। उन्होंने इसे व्यक्तिगत और राष्ट्रीय, दोनों तरह का नुकसान बताया।

शादी के लिए लड़की देख रहे थे पेरेंट्स

परिवार के एक सदस्य प्रताप सिंह के अनुसार, ऋषि राज सिंह बचपन से ही लड़ाकू विमानों के प्रति आकर्षित थे और हमेशा से एक लड़ाकू पायलट बनना चाहते थे। उन्होंने कहा, "वह पढ़ाई में बहुत होशियार थे और जोधपुर से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने एनडीए की प्रवेश परीक्षा दी। चयन के बाद, वह पुणे में एनडीए में शामिल हो गए और पायलट बनने के अपने सपने को साकार करने के लिए वायु सेना को चुना।" ऋषि राज सिंह के परिवार में उनके पिता जसवंत सिंह, जो एक होटल व्यवसायी हैं। उनकी मां भंवर कंवर और उनके छोटे भाई युवराज सिंह हैं। माता-पिता ऋषि की शादी के लिए लड़की देख रहे थे। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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