राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक चौंकने वाली घटना सामने आई है। सवाई मानसिंह (SMS) मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. नंद लाल डिसानिया ने आत्महत्या कर ली। घर पर फंदे से लटके उनकी लाश मिली।
घर पर नहीं थे परिवार के लोग
जानकारी के अनुसार, घटना के समय डॉ. डिसानिया के परिवार के सदस्य घर पर मौजूद नहीं थे। जब परिजन वापस लौटे, तो उन्होंने डॉ. डिसानिया को घर के अंदर फंदे से लटका हुआ पाया। परिजनों ने तुरंत उन्हें नीचे उतारा और नजदीकी निजी अस्पताल लेकर भागे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉ. डिसानिया के पार्थिव शरीर को सवाई मानसिंह अस्पताल लाया जा रहा है। फिलहाल, आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है।
गर्भवती पत्नी ने किया सुसाइड का प्रयास
एक अन्य खबर में, जयपुर में एक गर्भवती महिला ने जहर खाकर जान देने की कोशिश की। करिश्मा खरवाल दो महीने की गर्भवती है। करिश्मा के पति दीपक खरवाल (25) एक संविदा नर्सिंगकर्मी थे। वह सांगानेरी गेट के महिला अस्पताल में काम करते थे। कुछ समय पहले दीपक को नौकरी से हटा दिया गया था। नौकरी छूटने के तनाव में दीपक ने 12 जून को आत्महत्या कर ली थी।
परिजनों का कहना है कि पति की आकस्मिक मौत के बाद से ही करिश्मा गहरे सदमे में थीं इसी अवसाद के चलते पति की मौत के ठीक 25 दिन बाद सोमवार को उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। घटना के तुरंत बाद करिश्मा को एसएमएस अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया।
पक्ष ने सरकार को घेरा
इस घटना के बाद राजस्थान की सियासत भी गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस के मुख्य सचेतक व विधायक रफीक खान ने एसएमएस अस्पताल पहुंचकर पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की। जूली ने एक बयान में कहा, "सरकार इतनी असंवेदनशील हो गई है कि एक संविदा कर्मचारी की मौत भी उसे नहीं झकझोर पा रही। परिवार का बेटा अब इस दुनिया में नहीं है, उसकी गर्भवती पत्नी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है, फिर भी सरकार मौन है। यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि पूरे परिवार के साथ क्रूर अन्याय है।" उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले का तत्काल संज्ञान लेने और शोकाकुल परिवार से किए गए वादों को पूरा करने की मांग की।
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