जैसलमेरः राजस्थान के जैसलमेर-जोधपुर मार्ग पर मंगलवार को हुए भीषण बस अग्निकांड में बालेसर क्षेत्र के लवारन गांव निवासी महेंद्र मेघवाल का पूरा परिवार जिंदा जल गया। महेंद्र मेघवाल अपनी पत्नी पार्वती, दो बेटियों खुशबू और दीक्षा और बेटे शौर्य के साथ दिवाली की छुट्टियों होने पर पर गांव जा रहे थे। जैसलमेर से बस में बैठे और रास्ते में आग लग गई। आग ने पल भर में सब कुछ खत्म कर दिया।
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सेना के गोला-बारूद डिपो में तैनात थे महेंद्र मेघवाल
आग की लपटों में घिरी बस में जब लोग चिल्ला रहे थे, उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि इस हादसे में लवारन गांव का पूरा परिवार हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। महेंद्र मेघवाल सेना के गोला-बारूद डिपो में तैनात थे। अपने परिवार के साथ छुट्टियों में घर लौट रहे थे लेकिन किसे पता था कि यह सफर उनके जीवन का आखिरी सफर साबित होगा।
महेंद्र मेघवाल परिवार के साथ जैसलमेर में रेलवे स्टेशन के पास बीएसएफ के सामने इंद्रा कॉलोनी में किराए के कमरे में रहते थे। क्योंकि महेंद्र वहीं पास में ड्यूटी पर तैनात थे। वह परिवार के साथ शाम तीन बजे बस में सवार हुए थे। कुछ ही मिनटों बाद आग लगने से सब कुछ तबाह हो गया।
15 मिनट में पूरी बस जल गई
दोपहर करीब 3 बजे जब बस जैसलमेर से जोधपुर की ओर बढ़ रही थी, तभी अचानक पीछे से धुआं उठने लगा। देखते ही देखते बस आग की लपटों में घिर गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लोग बस के अंदर से चिल्ला रहे थे, लेकिन कुछ ही मिनटों में सबकुछ खत्म हो गया। सिर्फ 15 मिनट में पूरी बस राख बन गई। कई यात्री बाहर निकल भी नहीं सके और उन्हीं में महेंद्र का परिवार था जो जलती बस में ही मौत के आगोश में समा गया।
जब खबर गांव लवारन (बालेसर) पहुंची, तो हर घर से रोने चिलाने की आवाजें आने लगीं। लोग यकीन नहीं कर पा रहे थे कि महेंद्र, जो देश के लिए नौकरी करता था, उसकी अपनी जान और परिवार इस तरह एक हादसे में चला जाएगी।
डीएनए जांच से होगी शवों की पहचान
महेंद्र के पिता और भाई घटना की सूचना मिलते ही सदमे में हैं। गांव के लोग बताते हैं कि महेंद्र बहुत शांत, जिम्मेदार और परिवार से बेहद प्रेम करने वाला व्यक्ति था। बच्चे स्कूल में अच्छे विद्यार्थी थे और पूरा परिवार गांव में अपनी सादगी के लिए जाना जाता था। बस में सवार यात्रियों के शव इतनी बुरी तरह जल चुके हैं कि उनकी पहचान DNA टेस्ट से की जा रही है। जैसलमेर प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के लिए हेल्पलाइन और सहायता की व्यवस्था की है।
रिपोर्ट- योगेश गज्जा, जैसलमेर