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अजमेर शरीफ दरगाह में खादिमों के लाइसेंस का विवाद गहराया, उर्स से पहले तनाव

अजमेर शरीफ दरगाह में केवल लाइसेंसधारी खादिमों को ही जियारत कराने की अनुमति देने के फैसले से विवाद बढ़ गया है। दरगाह कमेटी सुरक्षा कारणों से इसे आवश्यक बता रही है, जबकि अंजुमन कमेटी इसे पुश्तैनी हक में दखल बताकर विरोध कर रही है।

Reported By : Manish Bhattacharya Edited By : Malaika Imam Published : Dec 03, 2025 12:00 am IST, Updated : Dec 03, 2025 12:01 am IST
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह- India TV Hindi
Image Source : REPORTER ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह

अजमेर: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में आने वाले जायरीनों की सुरक्षा और सुविधा के नाम पर दरगाह कमेटी ने बड़ा फैसला लिया है। अब सिर्फ लाइसेंसधारी खादिम ही जायरीनों को जियारत करवा सकेंगे। यह व्यवस्था जल्द लागू हो जाएगी। केंद्र सरकार के निर्देश पर दरगाह कमेटी के नाजिम मोहम्मद बिलाल खान ने इसके लिए विज्ञापन भी जारी कर दिया है। लाइसेंस के लिए खादिम 5 जनवरी तक आवेदन कर सकते हैं। नाजिम बिलाल खान का कहना है कि यह प्रक्रिया दरगाह के नियमों के दायरे में है। इसमें सुप्रीम कोर्ट और सरकार की सहमति है।

बिलाल खान ने कहा कि कई खादिमों का क्रिमिनल बैकग्राउंड है, इसलिए लाइसेंस देने से पहले उनका आपराधिक रिकॉर्ड भी जांचा जाएगा। उन्होंने बताया कि यह फैसला सिर्फ जायरीनों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया है। इसके साथ ही अजमेर प्रशासन दरगाह के अंदर और बाहर अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई कर रहा है। ज्यादातर अवैध कब्जे खादिमों के बताए जा रहे हैं।

फैसले के खिलाफ अंजुमन कमेटी 

दरगाह शरीफ की अंजुमन कमेटी इस फैसला के पूरी तरह खिलाफ है। सोमवार को अंजुमन कमेटी के दफ्तर के बाहर सैकड़ों खादिमों ने प्रदर्शन किया। अंजुमन के सचिव सरवर चिश्ती ने इसे 'तुगलकी फरमान' बताया। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा फैसला लेने से पहले अंजुमन से एक शब्द भी नहीं पूछा गया। सरवर चिश्ती ने नाजिम बिलाल खान की नियुक्ति को ही गलत बताया। उनका कहना है कि ढाई साल पहले दरगाह कमेटी भंग कर दी गई थी और अभी तक नई कमेटी का गठन नहीं हुआ है। जब कमेटी ही नहीं बनी तो नाजिम कैसे नियुक्त हो गया?

नाजिम की नियुक्ति मिनिस्ट्री ऑफ माइनॉरिटी अफेयर्स 9 नामजद सदस्यों के रेजोल्यूशन के आधार पर करती है, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। सरवर चिश्ती ने कहा, "जियारत कराना खादिमों का पुश्तैनी और मजहबी हक है। अगर इसे छीना गया तो हजारों लोग दरगाह के अंदर विरोध करेंगे।" उन्होंने आरोप लगाया कि 17 दिसंबर से उर्स शुरू होने वाला है, इसलिए जानबूझकर यह विवाद खड़ा किया जा रहा है। यह उर्स से पहले का नाटक है। साथ ही, उन्होंने कहा कि सेंट्रम (दरगाह का सबसे पवित्र हिस्सा) में सीसीटीवी कैमरा नहीं लग सकता, इसके लिए हाईकोर्ट का फैसला है।

अजमेर प्रशासन पीछे हटने को तैयार नहीं

खादिमों की नाराजगी के बावजूद अजमेर प्रशासन पीछे हटने को तैयार नहीं है। प्रदर्शन के बाद प्रशासन के बड़े अधिकारी दरगाह पहुंचे और अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई का जायजा लिया। अंजुमन के लोगों से बात भी की। अजमेर के जिलाधिकारी लोकबंधु ने साफ कहा कि दरगाह कमेटी ने जो फैसला लिया है, उसे लागू करने में प्रशासन पूरा सहयोग देगा। सभी पक्षों से बात करके रास्ता निकाला जाएगा, लेकिन सुरक्षा और व्यवस्था से समझौता नहीं होगा।

दरगाह में हर रोज हजारों श्रद्धालु आते हैं। कई बार खादिमों की भीड़ के कारण जायरीनों को परेशानी होती है। कई लोग शिकायत करते हैं कि असली-नकली खादिम का पता नहीं चलता और उनसे जबरदस्ती चादर चढ़वाई जाती है या पैसे मांगे जाते हैं। लाइसेंस और आई-कार्ड की व्यवस्था से इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद है। फिलहाल, उर्स से ठीक पहले यह विवाद और गहरा गया है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े हैं। देखना यह है कि 17 दिसंबर से शुरू होने वाले उर्स तक इस मसले का कोई हल निकल पाता है या नहीं।

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