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शिव, शव और श्मशान के साधक होते हैं अघोरी, जानें इस पंथ से जुड़ी 10 रोचक बातें

 Published : Jan 17, 2025 01:13 pm IST,  Updated : Jan 17, 2025 01:28 pm IST

अघोरी शिव के उपासक होते हैं, साथ ही वे जीवन और मौत के परे की जिंदगी में यकीन रखते हैं। कहा जाता है कि ये हमेशा शम्शान में ही तपस्या में लीन रहते हैं आइए जानते हैं इनसे जुड़े 10 तथ्य...

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अघोरी Image Source : META AI

आपने अघोरी साधु के बारे में अभी तक तो सुना होगा या हो सकता है कि जाना हो, लेकिन उनके बारे कुछ ऐसी रोचक बाते हैं जिनसे हो सकता है अब तक आप अनजान हों। अघोरी शिव उपासक होते हैं। अघोर पंथ के साधक खुद को सांसारिक बंधनों और सामाजिक परंपराओं से अविमुक्त मानते हैं। माना जाता है कि अघोरियों के कुछ प्रमुख साधना स्थल हैं जैसे- कामाख्या पीठ के श्मशान, त्र्यम्बकेश्वर के श्मशान और उज्जैन के चक्रतीर्थ के श्मशान। जहां वे तंत्र साधनाएं पूर्ण करके कई तरह की सिद्धियां प्राप्त करते हैं। आइए जानते हैं अघोर पंथ से जुड़ी 10 रोचक बातें:

शिव हैं इनके आराध्य

अघोर पंथ के अनुयायी भगवान शिव को अपने आराध्य देव मानते हैं और उन्हें “अघोरेश्वर” के रूप में अघोरियों द्वारा पूजा जाता है। शिव के साथ ही शव और श्मशान की भी अघोरपंथी पूजा करते हैं। 

समानता है मूल मंत्र 

अघोरी मानते हैं कि हर वस्तु और व्यक्ति एक समान है, उनमें किसी भी तरह का कोई अंतर नहीं है। अघोरियों के लिए न कोई पवित्र है, न कोई अशुद्ध। सबको एक दृष्टि से देखना ही अघोरपंथ में सिखाया जाता है।

श्मशान में ही करनी होती है साधना

अघोरी अपनी साधनाओं के लिए श्मशान भूमि को ही प्राथमिकता देते हैं। उनका मानना है कि यही वह स्थान है जहां से जीवन और मृत्यु का चक्र चलता है। श्मशान में ही ये लोग अपना वास बताते हैं। 

भौतिक सुखों से बना कर रखते हैं दूरी

अघोरी सांसारिक वस्तुओं और भौतिक सुखों से हमेशा दूर रहते हैं। मोहमाया के बंधनों को तोड़ने के बाद ही व्यक्ति सच्चा अघोरी कहलाता है। इसीलिए ये समाज के बीच आने से भी कतराते हैं। 

मांस और शराब का करते हैं सेवन

अघोर पंथ के साधक तंत्र साधना के लिए मांस, शराब और अन्य वर्जित पदार्थों का उपयोग करते हैं। यह उनके लिए आध्यात्मिक साधना का हिस्सा है।

नहीं धारण करते वस्त्र

अघोरी अक्सर नग्न रहते हैं, क्योंकि यह उनके लिए भौतिक वस्त्रों से मुक्ति और प्रकृति के करीब होने का प्रतीक है।

इंसानी खोपड़ी का करते हैं उपयोग

अघोरी खोपड़ी (कपाल) का उपयोग भोजन और पूजा के लिए करते हैं। इसे वे मृत्यु और जीवन के चक्र का प्रतीक मानते हैं।

भय पर विजय प्राप्त करना इनका लक्ष्य 

अघोर पंथ का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य भय से मुक्त होना है। वे मृत्यु, अंधकार, और अन्य डरावनी चीजों से परे जाने की साधना करते हैं।

चिकित्सा में भी इनका है खास योगदान

अघोरी साधु अपनी आयुर्वेदिक और तांत्रिक ज्ञान के जरिए जड़ी-बूटियों और अन्य उपायों से लोगों की मदद करते हैं। वे कोशिश करते हैं उनके पास आया बीमार इंसान किसी न किसी तरीके से बच जाए

गुरु-शिष्य परंपरा

अघोर पंथ में गुरु-शिष्य परंपरा का काफी अधिक महत्व है। कहा जाता है कि अघोरी साधक अपने गुरु के ही मार्गदर्शन में साधना करते हैं। इसके अलावा, अघोर पंथ का दर्शन काफी गहन और रहस्यमयी है, जो जीवन और मृत्यु की सच्चाई को समझने पर ही केंद्रित है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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