Chaitra Navratri 2026 8th Day Bhog: नवरात्रि में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व होता है। नवरात्री की अष्टमी को महाअष्टमी के नाम से जाना जाता है। यह दिन मां गौरी को समर्पित है। महाअष्टमी के दिन मां गौरी की उपासना करने से धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के आठवें दिन कन्या पूजन का भी विधान है। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि में कन्या पूजन करने से माता रानी प्रसन्न होती हैं और नौ देवियों की विशेष कृपा प्राप्त होती है। तो आइए अब जानते हैं कि नवरात्रि की महाअष्टमी पूजा के दिन देवी महागौरी को किन चीजों का भोग लगाएं। साथ ही जानेंगे कि कन्या पूजन के दिन छोटी-छोटी कन्याओं यानी कंजकों के लिए क्या प्रसाद बनाएं।
अष्टमी के दिन देवी महागौरी को लगाएं इन चीजों का भोग
मां गौरी को हलवा-पूड़ी अति प्रिय है। ऐसे में नवरात्रि के आठवें दिन यानी महाष्टमी के दिन माता गौरी को इन चीजों का भोग जरूर लगाएं। मां गौरी को हलवा-पूड़ी चढ़ाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी हो जाती है। हलवा-पूड़ी के अलावा अष्टमी भोग के लिए दूध-चावल से बनी खीर भी तैयार कर सकते हैं। खीर और नारियल भी देवी मां को बेहद पसंद है। वहीं कन्या पूजन के लिए आपने जो प्रसाद बनाया है वो पहले देवी मां को भोग लगाएं उसके बाद कन्या पूजन आरंभ करें।
कन्या पूजन भोग
नवरात्रि के अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है। नवरात्रि में छोटी-छोटी कन्याओं को भोजन खिलाने से देवी मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं। कन्या पूजन को कंजक पूजा भी कहते हैं। तो आइए जानते हैं कि कन्या पूजन के लिए क्या-क्या भोग बनाना चाहिए। वहीं ध्यान रखें कि कन्या पूजन के लिए सात्विक भोजन ही बनाएं। साथ ही साफ-सफाई और शुद्धता भी खास ख्याल रखें।
- सूजी का हलवा
- काला चना
- पूड़ी
- चावल दूध की खीर
- आलू की रसेदार सब्जी
- केला, सेब, नारियल, अन्य मौसमी फल
- मिठाई
- बताशा
कन्या पूजन नियम
- कन्या पूजन में 9 कन्याएं देवी दुर्गा के नौ स्वरूप होती हैं। लेकिन 9 कन्याएं नहीं मिल पा रही हैं तो आप 3, 5 या 7 कन्याओं के साथ भी कन्या पूजन कर सकते हैं।
- कन्याओं के साथ एक बालक को भी उनके साथ भोजन कराने का विधान है, जिसे बटुक भैरव माना जाता है।
- जब कन्याएं आपके घर आएं तो उन्हें साफ-सुथरे आसन पर बिठाएं। इसके बाद सभी कन्याओं के पैर धुलें और उनके पैरों में आलता लगाएं।
- इसके बाद रोली और अक्षत से सभी कन्याओं का तिलक करें और लाल रंग की चुनरी सिर पर बांधें या ओढ़ाएं।
- अब सभी कन्याओं और भैरव को भोजन परोसे और भोजन के बाद अपनी क्षमतानुसार उपहार दें।
- फिर सभी कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें और उन्हें अगले साल फिर आने का निमंत्रण देकर विदाई दें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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