Chhath Puja Rituals Kharna Prasad: लोक आस्था के महापर्व छठ को चार दिनों तक बड़ी श्रद्धा और नियमों के साथ मनाया जाता है। छठ महापर्व में उपयोग होने वाली पूजा सामग्री का हर एक तत्व विशेष महत्व रखता है। यह पर्व का धार्मिक रूप से बहुत अहमियत तो रखता ही है। इसमें आध्यात्मिकता पर भी जोर दिया जाता है।
ऐसे में छोटे और स्थानीय किसानों और कारोबारियों के लिए भी यह पर्व आर्थिक रूप से बहुत मददगार साबित होता है। यह तो सभी जानते होंगे कि छठ में आम की लकड़ी और केले के पत्तों का खास उपयोग होता है, लेकिन इसके पीछे धार्मिक कारण क्या है? चलिए इसके बारे में यहां विस्तार से जानते हैं।
आम की लकड़ी और केले के पत्ते ही क्यों?
चार दिवसीयइस त्योहार में पहला दिन नहाय-खाय, दूसरा दिन खरना, तीसरा दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य और चौथा दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने का होता है। खरना से व्रती महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है। इस दौरान मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ियों से प्रसाद तैयार किया जाता है। यह प्रसाद सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही ग्रहण किया जाता है। माना जाता है कि आम की लकड़ियां और केले के पत्ते शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक हैं, इसलिए इन्हें प्रसाद और पूजा में शामिल किया जाता है।
मार्कंडेय पुराण में मिलता है जिक्र
छठ पूजा का सीधा संबंध प्रकृति और शुद्धता से है। मार्कंडेय पुराण में उल्लेख है कि छठी मइया प्रकृति का छठवां हिस्सा हैं। जब भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की, तो उन्होंने प्रकृति को छह भागों में बांटा और उसका एक हिस्सा छठी मइया को समर्पित किया। यही कारण है कि पूजा में प्रकृति के पांच तत्वों से बनी चीजों को ही शामिल किया जाता है।
जैसे मिट्टी तत्व से बने बर्तनों का उपयोग होता है। पूजा के प्रसाद में शुद्ध जल का उपयोग होता है और पवित्र नदियों और जलाशयों में उतरकर पूजन किया जाता है। सूर्य की उपासना की जाती है। प्रसाद बनाने के लिए चूल्हे के ईंधन के लिए आम की लकड़ी जलाई जाती है और प्रसाद ग्रहण करने के लिए केले के पत्तों का प्रयोग किया जाता है।
आम की लकड़ियों का होता है इस्तेमाल
हिंदू धर्म में पूजा और अनुष्ठान कार्यक्रमों में कुछ लकड़ियों का विशेष महत्व बताया गया है। जिसमें आम की लकड़ी को सबसे शुद्ध माना जाता है। हवन और यज्ञ में भी आम के पेड़ का लकड़ियों का उपयोग होता है, क्योंकि यह वायु में शुद्धता लाती हैं। इसी कारण छठ पूजा के प्रसाद को बनाने में सदियों से आम की लकड़ियों का उपयोग किया जा रहा है। व्रती महिलाएं मिट्टी के चूल्हे पर इन्हीं लकड़ियों से प्रसाद पकाती हैं, ताकि वह शुद्ध और सात्विक बना रहे।
छठ पूजा में केले के पत्तों का महत्व
खरना प्रसाद को केले के पत्तों पर परोसा जाता है। पहले इन पत्तों को धोकर साफ किया जाता है और फिर इस पर प्रसाद रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केले के पेड़ और पत्तों में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए केले के पत्तों का उपयोग पूजा, विवाह और शुभ अवसरों में पूरे भारत में किया जाता है। इससे घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और शांति आती है। वहीं, ऐसा माना जाता है कि केले के पत्ते पर भोजन ग्रहण करने से मानसिक तनाव भी दूर होता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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