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शनि, राहु, केतु, की बैठक बदलती है किस्मत, चिराग दारूवाला से जानें ये नवग्रह आपकी हथेली में क्या फल देते हैं?

 Written By: Astrologer Chirag, Edited By: Poonam Yadav
 Published : Nov 05, 2024 02:22 pm IST,  Updated : Nov 07, 2024 08:06 am IST

थेली में ग्रहो से जुड़े ये नव पर्वत होते है जिसमे बृहस्पति पर्वत, शनि पर्वत, सूर्य पर्वत, बुध पर्वत, मंगल पर्वत, चंद्र पर्वत, शुक्र पर्वत, राहु पर्वत और केतु पर्वत। नवग्रहों की बैठक आपकी हथेली में क्या फल देती है इसके बारे में ज्योतिष चिराग दारुवाला से जानेंगे।

चिराग दारूवाला हथेली प्रभाव- India TV Hindi
चिराग दारूवाला हथेली प्रभाव Image Source : SOCIAL

हाथ की कुछ रेखाएं शुभ मानी जाती हैं तो कुछ अशुभ। कहा जाता है कि इंसान की किस्मत उसकी हथेली में लिखी होती है। हाथ की रेखाओं के माध्यम से ही व्यक्ति के भविष्य की जानकारी मिलती है। हथेली में पर्वत मनुष्य की आत्मा के रहस्यों की कुंजी कहे जाते हैं। हथेली में ग्रहो से जुड़े ये नव पर्वत होते है जिसमे बृहस्पति पर्वत, शनि पर्वत, सूर्य पर्वत, बुध पर्वत, मंगल पर्वत, चंद्र पर्वत, शुक्र पर्वत, राहु पर्वत और केतु पर्वत। नवग्रहों की बैठक आपकी हथेली में क्या फल देती है इसके बारे में ज्योतिष चिराग दारूवाला से जानेंगे।

नवग्रहों की बैठक हथेली में देती है ऐसे फल:

  • हाथ की पहली उंगली को तर्जनी कहते हैं जिसे बृहस्पति की उंगली भी कहते हैं, उसके नीचे का स्थान गुरु पर्वत कहलाता है। बृहस्पति को मजबूत करने के लिए इस उंगली में सोने की अंगूठी में पुखराज पहना जाता है।

  • हाथ की दूसरी उंगली जो सबसे बड़ी उंगली होती है उसे मध्यमा उंगली कहते हैं, हस्तरेखा शास्त्र में इसे शनि की उंगली कहते हैं, इस उंगली के नीचे वाले पर्वत को शनि पर्वत कहते हैं।

  • हाथ की तीसरी अँगुली को अनामिका कहते है। अनामिका उंगली सूर्य की उंगली कहलाती है, इस उंगली के नीचे वाले पर्वत को सूर्य पर्वत कहते हैं।

  • हाथ की चौथी उंगली को छोटी उंगली कहते है और ये बुध की उंगली कहलाती हैं, इसके नीचे वाले पर्वत को बुध पर्वत कहते हैं।

  • अंगूठे के तीसरे पोर और जीवन रेखा के बीच का उभरा हुआ स्थान शुक्र पर्वत कहलाता है।

  • शुक्र पर्वत के सामने, मणिबंध रेखाओं के ऊपर और जीवन रेखा के पार का क्षेत्र चंद्र पर्वत कहलाता है।

  • शुक्र पर्वत और गुरु पर्वत के बीच के स्थान को मंगल पर्वत कहा जाता है।

  • बुध पर्वत और चंद्र पर्वत के बीच के स्थान को केतु पर्वत कहा जाता है।

  • केतु पर्वत के सामने का क्षेत्र, जिसे हथेली का गड्ढा भी कहा जाता है, वह राहु पर्वत कहलाता है। यह आमतौर पर शनि और सूर्य पर्वत के नीचे स्थित होता है।

मिलते हैं ये लाभ:

जिस भी हाथ में कोई भी पर्वत लुप्त हो, उस व्यक्ति में उस ग्रह विशेष के गुणों का अभाव होता है। यदि पर्वत सामान्य रूप से विकसित है, तो व्यक्ति में उस ग्रह के गुण सामान्य रूप से पाए जाते हैं और यदि पर्वत अधिक विकसित है, तो उस ग्रह के गुण व्यक्ति में विशेष रूप से पाए जाते हैं।

(ज्योतिषी चिराग दारूवाला विशेषज्ञ ज्योतिषी बेजान दारूवाला के पुत्र हैं। उन्हें प्रेम, वित्त, करियर, स्वास्थ्य और व्यवसाय पर विस्तृत ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के लिए जाना जाता है।)

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