सनातन धर्म में माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है, कारण है कि इस दिन स्नान, तप-जप और दान से जातकों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा व अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने का भी महत्व है, इससे साधक को आत्मिक शुद्धि की अनुभूति होती है। इसके अलावा, इस साल महाकुंभ के दौरान माघ पूर्णिमा पर्व का महत्व बढ़ गया है। इस मौके पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु महाकुंभ में संगम स्नान करेंगे।
देवी-देवता भी करते हैं गंगा स्नान
हिंदू पंचांग के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि इस बार 11 फरवरी की शाम 06.55 बजे आरंभ होगी, जो 12 फरवरी की शाम 07.22 बजे खत्म होती। चूंकि हिंदू धर्म में उदया तिथि अहम है, इसलिए 12 फरवरी को माघ पूर्णिमा मनाया जाएगा। इसे माघी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन माघ पखवाड़े का अंतिम दिन होता है, इसके बाद फाल्गुन माह का आरंभ हो जाएगा। धार्मिक दृष्टि से देखें तो इस दिन गंगा स्नान, दान और जप-तप से व्यक्ति के जीवन का कल्याण हो जाएगा। ऐसा माना जाता है कि इस दिन स्वयं देवता भी गंगा स्नान के लिए धरती पर आते हैं।
ज्योतिष के हिसाब से भी अहम
अगर देखा जाए तो ज्योतिष के हिसाब से भी माघी पूर्णिमा अहम है। इस तिथि पर चंद्रमा कर्क राशि में स्थित हैं, और सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस हिसाब से यह दिन बेहद प्रभावशाली हो जाता है। माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में डुबकी लगाने से सूर्य और चंद्रमा से संबंधित दोष का भी नाश हो जाता है।
होती है इन महावीर की भी पूजा
माघी पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, इससे जातक को धन, सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। साथ ही यश की भी कीर्ति बढ़ती है। इसके अलावा, इस दिन महावीर हनुमान की भी पूजा होती है, माना जाता है कि बजरंग बली की पूजा से जातक भय और दुख-दरिद्र से मुक्त हो जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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