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3 कठिन परीक्षाओं को करना पड़ता है पार तब बनता है एक अघोरी, जानें क्यों नहीं लगता है इन्हें डर

 Published : Jan 20, 2025 12:07 pm IST,  Updated : Jan 20, 2025 12:08 pm IST

महाकुंभ में अघोरी और नागा साधु दोनों पहुंच चुके हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि उन तीन कठिन परीक्षाओं के बारे में जो पास करने के बाद एक व्यक्ति अघोरी बनता है।

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अघोरी Image Source : META AI

हिंदू धर्म में अघोरी साधुओं को नागा साधुओं से भी बेहद खतरनाक माना गया है। अघोरी साधु जीवन और मृत्यु के बंधनों से दूर श्मशान भूमि में अपनी धूनि रमाए तप में लीन रहते हैं। माना जाता है कि अघोरी साधु तंत्र साधना भी करते हैं। एक अघोरी बनने की प्रक्रिया को बेहद कठिन माना गया है। इस दौरान अघोरी साधु बनने की लालसा वाले व्यक्ति को 3 कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। अंतिम परीक्षा में तो जान तक को दांव लगाना पड़ जाता है। अगर इन परीक्षाओं में कोई विफल हो जाए तो वह अघोरी नहीं बन पाता। ऐसे में आइए जानते हैं वह कौन-कौन सी परीक्षाएं हैं...

अघोरी बनना बेहद कठिन होता है। माना जाता है कि अघोरी शव पर एक पैर रख तपस्या करते हैं। ये भोले नाथ के उपासक माने जाते हैं। साथ ही ये मां काली की भी पूजा करते हैं। अघोरी बनने की प्रक्रिया कठिन है, इसमें 3 तरह की दीक्षाएं शामिल हैं- हरित दीक्षा, शिरीन दीक्षा और रंभत दीक्षा

हरित दीक्षा

हरिता दीक्षा में ही अघोरी गुरु अपने शिष्य को गुरुमंत्र देता है। यह मंत्र शिष्य के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। शिष्य को इस मंत्र का जाप नियमित रूप से करना होता है। इस जाप से शिष्य के मन-मस्तिष्क में एकाग्रता बनती है और वह आध्यात्मिक ऊर्जा हासिल करता है।

शिरीन दीक्षा

शिरीन दीक्षा में सीखने वाले शिष्य को कई प्रकार की तंत्र साधना सिखाई जाती है। शिष्य को श्मशान भूमि में जाकर तपस्या करनी होती है। इस दौरान शिष्य को सांप, बिच्छू आदि का भय तो रहता ही है, साथ ही सर्दी, गर्मी, बारिश भी बर्दाश्त करनी होती है।

रंभत दीक्षा

रंभत दीक्षा अघोरी साधु के लिए सबसे कठिन और अंतिम दीक्षा होती है। इस दीक्षा में शिष्य को अपने जीवन और मृत्यु का अधिकार अपने गुरु को सौंपना होता है। गुरु जो भी कहे शिष्य को बिना सोचे या प्रश्न के वह करना ही पड़ता है। कहा जाता है कि इस दीक्षा में गुरु अपने शिष्य के अंदर भरे अहंकार को बाहर निकलवा देता है। इस दौरान अगर गुरु कहे कि अपने गर्दन पर चाकू रखना है तो शिष्य को बिना कोई सवाल के करना पड़ता है। इसलिए इस दीक्षा को बेहद कठिन माना जाता है। यही कारण है कि इन्हें अपनी जिंदगी या मौत का कोई भय नहीं रहता क्योंकि अघोरी अपने गुरु को इसका अधिकार दे देते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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