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Navratri Day 7 Katha And Aarti: नवरात्रि के सातवें दिन इस विधि से करें मां कालरात्रि की पूजा, यहां पढ़ें कथा, आरती और मंत्र

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Sep 28, 2025 11:25 am IST,  Updated : Sep 28, 2025 11:25 am IST

Navratri Day 7 Katha And Aarti: नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा की जाती है। माता भक्तों को भय और रोग से मुक्त करती हैं। नवरात्रि के सातवें दिन की पूजा विधि क्या है इस दिन किन मंत्रों का जप आपको करना चाहिए और कौन सी कथा का पाठ करना चाहिए, आइए जानते हैं।

माता कालरात्रि - India TV Hindi
माता कालरात्रि Image Source : INDIA TV

Navratri Day 7 Katha And Aarti: माता कालरात्रि माता दुर्गा की सातवीं शक्ति हैं। इनकी पूजा करने से सभी सिद्धियां भक्तों को प्राप्त होती हैं। माना जाता है कि जो भी भक्त मां कालरात्रि की पूजा करता है उसके जीवन की सारी नकारात्मकता दूर हो जाती है। ऐसे लोगों को भय नहीं सताता और रोगों से भी मुक्ति मिलती है। शारदीय नवरात्रि के दौरान 29 सितंबर को माता कालरात्रि की पूजा की जाएगी। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि माता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किस विधि से आपको पूजा करनी चाहिए, नवरात्रि के सातवें दिन किन मंत्रों का जप करना चाहिए और इस दिन की कथा क्या है। 

माता कालरात्रि की पूजा विधि 

नवरात्रि के सातवें दिन आपको सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए। इसके बाद आपको स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल में स्थित माता कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर को गंगाजल से स्नान करवाना चाहिए। तत्पश्चात मां को कुमकुम, रोली, अक्षत अर्पित करने चाहिए और धूप-दीप प्रज्वलित करने चाहिए। इसके बाद माता की पूजा आरंभ करनी चाहिए। पूजा के दौरान माता के मंत्रों, दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती और कथा का आपको पाठ करना चाहिए। पूजा के अंत में माता को गुड़ या गुड़ से बने पदार्थों और चने का भोग लगाना चाहिए। 

नवरात्रि के सातवें दिन की कथा 

माता कालरात्रि को शुभंकरी भी कहा जाता है, क्योंकि ये अपने भक्तों के जीवन में शुभता भरती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, माता ने शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज नामक राक्षसों का वध करके देवी-देवताओं और मनुष्यों की रक्षा की थी। कथा है कि एक बार शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज के आतंक से तीनों लोक थर-थर कांपने लगे। चारों ओर इन राक्षसों का भय व्याप्त था। तब समस्त देवी-देवता भगवान शिव के पास इस समस्या का समाधान पाने के लिए गए। महादेव ने माता पार्वती से शुंभ-निशुंभ का अंत करने की बात कही। इसके बाद माता ने दुर्गा रूप धारण कर शुंभ-निशुंभ का वध कर दिया।

हालांकि, जब रक्तबीज का संहार करने माता गई तो एक समस्या सामने आई। रक्तबीज को यह वर मिला था कि उसके रक्त की बूंद धरती पर गिरते ही उसके जैसा एक और राक्षस जन्म लेगा। तब माता दुर्गा ने अपने तेज से मां कालरात्रि का रूप धारण किया। माता कालरात्रि ने रक्तबीज के रक्त को धरती पर नहीं गिरने दिया और गिरने से पहले ही उसे अपने मुंह में भर लिया। इस तरह माता कालरात्रि ने अंत में रक्तबीज का भी संहार कर दिया। 

माता कालरात्रि की आरती

कालरात्रि जय जय महाकाली

काल के मुंह से बचाने वाली
दुष्ट संहारिणी नाम तुम्हारा
महा चंडी तेरा अवतारा
पृथ्वी और आकाश पर सारा
महाकाली है तेरा पसारा
खंडा खप्पर रखने वाली
दुष्टों का लहू चखने वाली
कलकत्ता स्थान तुम्हारा
सब जगह देखूं तेरा नजारा
सभी देवता सब नर नारी
गावे स्तुति सभी तुम्हारी
रक्तदंता और अन्नपूर्णा
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना
ना कोई चिंता रहे ना बीमारी
ना कोई गम ना संकट भारी
उस पर कभी कष्ट ना आवे
महाकाली मां जिसे बचावे
तू भी 'भक्त' प्रेम से कह
कालरात्रि मां तेरी जय।

माता कालरात्रि के मंत्र 

  • ॐ कालरात्र्यै नम:।
  • ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।
  • या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। 

माता कालरात्रि का भोग

माता कालरात्रि को प्रसन्न करने के लिए आपको गुड़ या गुड़ से बने भोज्य पदार्थों का भोग लगाना चाहिए। इसके साथ ही चन्ना और मालपुआ भी आप माता को भोग रूप में अर्पित कर सकते हैं। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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