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Ram Navami 2026 Puja Vidhi, Muhurat Live: भए प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी हरषित महतारी, मुनि मन हारी... भव्य रूप से मनाया जा रहा रामलला का जन्मोत्सव

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Updated : Mar 27, 2026 12:47 pm IST

Ram Navami 2026 Live: राम नवमी का पावन पर्व भगवान विष्णु के सातवें अवतार, श्री राम भगवान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस साल ये पर्व 27 मार्च को मनाया जा रहा है। यहां आप जानेंगे इसकी पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती सबकुछ।

राम नवमी 2026- India TV Hindi
राम नवमी 2026 Image Source : DD NEWS

Ram Navami 2026 Live: राम नवमी हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह त्योहार हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को बहुत ही धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है। इस साल रामनवमी 27 मार्च 2026 को मनाई जा रही है। इस दिन श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में भगवान राम की विधि विधान पूजा करते हैं और उन्हें भिन्न-भिन्न प्रकार के भोग लगाते हैं। इस दिन रामायण पढ़ना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। बता दें इस साल राम नवमी पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:13 से दोपहर 01:41 बजे तक रहेगा। वहीं राम नवमी मध्याह्न का क्षण दोपहर 12:27 बजे का है। जबकि नवमी तिथि सुबह 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। यहां आप जानेंगे राम नवमी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती समेत सारी जानकारी।

राम नवमी की आरती (Ram Navami Ki Aarti)

  • श्री राम चंद्र कृपालु भजमन,
  • हरण भव भय दारुणम्।
  • नवकंज लोचन कंज मुखकर,
  • कंज पद कन्जारुणम्।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…
  • कंदर्प अगणित अमित छवी,
  • नव नील नीरज सुन्दरम्।
  • पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि,
  • नौमी जनक सुतावरम्।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…
  • भजु दीन बंधु दिनेश,
  • दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
  • रघुनंद आनंद कंद,
  • कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…
  • सिर मुकुट कुण्डल तिलक,
  • चारु उदारू अंग विभूषणं।
  • आजानु भुज शर चाप धर,
  • संग्राम जित खर-धूषणं।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…
  • इति वदति तुलसीदास शंकर,
  • शेष मुनि मन रंजनम्।
  • मम ह्रदय कुंज निवास कुरु,
  • कामादी खल दल गंजनम्।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…
  • मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु,
  • सहज सुंदर सावरों।
  • करुना निधान सुजान सिलू,
  • सनेहू जानत रावरो।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…
  • एही भांती गौरी असीस सुनी,
  • सिय सहित हिय हरषी अली।
  • तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी,
  • मुदित मन मंदिर चली।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…
  • जानि गौरी अनुकूल सिय हिय,
  • हरषु न जाइ कहि।
  • मंजुल मंगल मूल वाम,
  • अंग फरकन लगे।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…

Ram Navami 2026 Live

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  • 12:14 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    सूर्य तिलक के बाद रामलला की महाआरती

    रामनवमी के मौके पर रामलला का जन्मोत्सव सुबह से ही विभिन्न अनुष्ठानों के साथ शुरू हो गया। सबसे पहले प्रभु रामलला को दूध, दही, शहद और सरयू नदी के जल से स्नान करवाया जाता है। इसके बाद रामलला को कीमती आभूषण और सुंदर पोशाक पहनाई जाएगी। दोपहर 12 बजे सूर्य तिलक के बाद महाआरती का आयोजन हुआ। श्री राम जन्मभूमि मंदिर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरी निगरानी रखी जा रही है।

  • 12:11 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Navami 2026 Live: ऐसे होता है रामलला का सूर्य तिलक

    दर्पण और लेंस की मदद से सूर्य की किरणों को ठीक समय पर रामलला के माथे तक पहुंचाया जाता है।

     

  • 12:10 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Navami 2026 Live: राम के जन्मोत्सव की अयोध्या में भव्य तैयारियां

    चैत्र शुक्ल नवमी के पावन अवसर पर शुक्रवार को देशभर में रामनवमी का उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। भगवान राम के जन्मोत्सव के इस दिन अयोध्या में भव्य तैयारियां की गई हैं। दोपहर 12 बजे रामलला के माथे पर सूर्य की किरणों से विशेष सूर्य तिलक किया गया है। अयोध्या में भगवान राम का जन्म दोपहर 12 बजे हुआ था। वे सूर्यवंशी हैं, इसलिए आज दोपहर ठीक 12 बजे सूर्य देवता अपनी किरणों से रामलला को तिलक किया। सूर्य की किरणें रामलला के माथे पर लगभग 4 मिनट तक पड़ीं।

     

  • 12:03 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Navami 2026 Live: अयोध्या राम मंदिर से सूर्य अभिषेक लाइव

  • 11:44 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Navami Puja 2026 Live: श्रीराम जी की आरती

    ।। श्री रामजी की आरती ।।
     
    आरती कीजै श्री रघुवर जी की,
    सतचित आनंद शिव सुंदर की,
     
    दशरथ तनय कौशल्या नंदन,
    सुर, मुनि, रक्षक, दैत्य निकंदन,
    अनुगत भक्त-भक्त उर चंदन,
    मर्यादा पुरुषोत्तम वर की,
    आरती कीजै श्री...
     
    निर्गुण, सगुण, अनूप रूप निधि,
    सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि,
    हरण शोक भयदायक नवनिधि,
    माया रहित दिव्य नर वर की,
    आरती कीजै श्री...
     
    जानकी पति सुर अधिपति जगपति,
    अखिल लोक पालक त्रिलोक गति,
    विश्व बंध अवंनह अमित गति,
    एक मात्र गति सचराचर की,
    आरती कीजै श्री...
     
    शरणागति वत्सल व्रतधारी,
    भक्त कल्प तरुवर असुरारी,
    नाम लेत जग पावन कारी,
    वानर सखा दीन दुःख हर की,
    आरती कीजै श्री...

     

  • 11:12 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Navami Puja Vidhi: ऐसे करें राम नवमी की पूजा

    • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें साफ कपड़े धारण करें।
    • घर और मंदिर में गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
    • चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं।
    • इसके बाद प्रभु श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान की मूर्ति को विराजमान करें।
    • पंचामृत और फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।
    • चंदन और रोली का तिलक लगाएं और फूलमाला अर्पित करें।
    • देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।
    • मंत्रों का जप करें और कथा का पाठ करें।
    • राम रक्षा स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम का पाठ जरूर करें।
    • फल और मिठाई का भोग लगाएं और सभी को प्रसाद बांटें।
  • 11:02 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Sita Mata Ki Aarti: सीता माता की आरती

    आरती श्री जनक दुलारी की ।
    सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

    जगत जननी जग की विस्तारिणी,
    नित्य सत्य साकेत विहारिणी,
    परम दयामयी दिनोधारिणी,
    सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥

    आरती श्री जनक दुलारी की ।
    सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

    सती श्रोमणि पति हित कारिणी,
    पति सेवा वित्त वन वन चारिणी,
    पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,
    त्याग धर्म मूर्ति धरी की ॥

    आरती श्री जनक दुलारी की ।
    सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

    विमल कीर्ति सब लोकन छाई,
    नाम लेत पवन मति आई,
    सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई,
    शरणागत जन भय हरी की ॥

    आरती श्री जनक दुलारी की ।
    सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

  • 10:43 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Ram Navami par Kanya Pujan Time: राम नवमी पर कन्या पूजन का समय

    राम नवमी पर कन्या पूजन दोपहर 1 बजकर 41 मिनट तक किया जा सकता है। कन्या पूजन के बाद आप अपना व्रत खोल सकते हैं।

  • 10:23 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Ram Navami Ke Vrat Mein Kya Kha Sakte Hain: राम नवमी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

    राम नवमी के व्रत में आप सात्विक फलाहार जैसे फल, मखाना, साबूदाना खिचड़ी, दूध, दही, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की रोटी, आलू की सब्जी और सेंधा नमक का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा सूखे मेवे, पेड़ा और केसर की खीर भी खाई जा सकती है।

  • 9:40 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Ram Navami Significance: राम नवमी क्यों मनाई जाती है?

    राम नवमी का त्योहार भगवान राम के जन्म की खुशी में मनाया जाता है। कहते हैं इसी दिन यानी चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर ही भगवान राम का जन्म हुआ था। यही कारण है कि हर साल इस दिन श्रीराम जन्मोत्सव का त्योहार मनाया जाता है।

  • 9:19 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    ram raksha stotra: राम रक्षा स्तोत्र

    विनियोग:
    अस्य श्रीरामरक्षास्त्रोतमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः ।
    श्री सीतारामचंद्रो देवता ।
    अनुष्टुप छंदः। सीता शक्तिः ।
    श्रीमान हनुमान कीलकम ।
    श्री सीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्त्रोतजपे विनियोगः ।

    अथ ध्यानम्‌:
    ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपदमासनस्थं,
    पीतं वासो वसानं नवकमल दल स्पर्धिनेत्रम् प्रसन्नम ।
    वामांकारूढ़ सीता मुखकमलमिलल्लोचनम्नी,
    रदाभम् नानालंकारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलम् रामचंद्रम ॥

    राम रक्षा स्तोत्रम्:
    चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम् ।
    एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥1॥

    ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् ।
    जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितं ॥2॥

    सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम् ।
    स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ॥3॥

    रामरक्षां पठेत प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम् ।
    शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ॥4॥

    कौसल्येयो दृशो पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुति ।
    घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ॥5॥

    जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः ।
    स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ॥6॥

    करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित ।
    मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः ॥7॥

    सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः ।
    उरु रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृताः ॥8॥

    जानुनी सेतुकृत पातु जंघे दशमुखांतकः ।
    पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामअखिलं वपुः ॥9॥

    एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृति पठेत ।
    स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ॥10॥

    पातालभूतल व्योम चारिणश्छद्मचारिणः ।
    न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ॥11॥

    रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन ।
    नरौ न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥12॥

    जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम् ।
    यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥13॥

    वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत ।
    अव्याहताज्ञाः सर्वत्र लभते जयमंगलम् ॥14॥

    आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः ।
    तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः ॥15॥

    आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम् ।
    अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान स नः प्रभुः ॥16॥

    तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ ।
    पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥17॥

    फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।
    पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥18॥

    शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम् ।
    रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ॥19॥

    आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशा वक्ष याशुगनिषङ्गसङ्गिनौ ।
    रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम ॥20॥

    सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा ।
    गच्छन् मनोरथान नश्च रामः पातु सलक्ष्मणः ॥21॥

    रामो दाशरथी शूरो लक्ष्मणानुचरो बली ।
    काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः ॥22॥

    वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः ।
    जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः ॥23॥

    इत्येतानि जपन नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः ।
    अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः ॥24॥

    रामं दुर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम ।
    स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नरः ॥25॥

    रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरं,
    काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम ।
    राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथतनयं श्यामलं शांतमूर्तिं,
    वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम ॥26॥

    रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे ।
    रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥27॥

    श्रीराम राम रघुनन्दनराम राम,
    श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।
    श्रीराम राम रणकर्कश राम राम,
    श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥28॥

    श्रीराम चन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि,
    श्रीराम चंद्रचरणौ वचसा गृणामि ।
    श्रीराम चन्द्रचरणौ शिरसा नमामि,
    श्रीराम चन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥29॥

    माता रामो मत्पिता रामचंन्द्र: ।
    स्वामी रामो मत्सखा रामचंद्र: ।
    सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु ।
    नान्यं जाने नैव जाने न जाने ॥

    दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मज ।
    पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥31॥

    लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथं ।
    कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये ॥32॥

    मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम ।
    वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्ये ॥33॥

    कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम ।
    आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम ॥34॥

    आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम् ।
    लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥35॥

    भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम् ।
    तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम् ॥36॥

    रामो राजमणिः सदा विजयते,
    रामं रमेशं भजे रामेणाभिहता,
    निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः ।
    रामान्नास्ति परायणं परतरं,
    रामस्य दासोस्म्यहं रामे चित्तलयः,
    सदा भवतु मे भो राम मामुद्धराः ॥37॥

    राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
    सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥38॥

  • 8:20 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Ram Navami Havan Mantra: राम नवमी हवन मंत्र

    1. ॐ अग्नये स्वाहा
    2. ॐ सोमाय स्वाहा
    3. ॐ आयुः स्वाहा
    4. ॐ प्रजायै स्वाहा
    5. ॐ प्रजापतये स्वाहा
    6. ॐ रुद्राय स्वाहा
    7. ॐ वायु देवाय स्वाहा
    8. ॐ सूर्याय स्वाहा
    9. ॐ चन्द्रमसे स्वाहा
    10. ॐ ब्रह्मणे स्वाहा
    11. ॐ विष्णवे स्वाहा
    12. ॐ शिवाय स्वाहा
    13. ॐ इन्द्राय स्वाहा
    14. ॐ वरुणाय स्वाहा
    15. ॐ बृहस्पतये स्वाहा
    16. ॐ मारुताय स्वाहा
    17. ॐ कुवेराय स्वाहा
    18. ॐ सोमराजाय स्वाहा
    19. ॐ धनदाय स्वाहा
    20. ॐ ऋताय स्वाहा
    21. ॐ यमाय स्वाहा
    22. ॐ कालाय स्वाहा
    23. ॐ विश्वकर्मणे स्वाहा
    24. ॐ पवमानाय स्वाहा
    25. ॐ अश्विनौ स्वाहा
    26. ॐ भौमाय स्वाहा
    27. ॐ बुधाय स्वाहा
    28. ॐ शुक्राय स्वाहा
    29. ॐ शनैश्चराय स्वाहा
    30. ॐ राहवे स्वाहा
    31. ॐ केतवे स्वाहा
    32. ॐ सरस्वत्यै स्वाहा
    33. ॐ लक्ष्म्यै स्वाहा
    34. ॐ पार्वत्यै स्वाहा
    35. ॐ दुर्गायै स्वाहा
    36. ॐ कात्यायन्यै स्वाहा
    37. ॐ महालक्ष्म्यै स्वाहा
    38. ॐ स्कन्दाय स्वाहा
    39. ॐ हनुमते स्वाहा
    40. ॐ विष्णुप्रिये स्वाहा
    41. ॐ कालरात्र्यै स्वाहा
    42. ॐ महाकालाय स्वाहा
    43. ॐ नारायणाय स्वाहा
    44. ॐ कामदेवाय स्वाहा
    45. ॐ ऋचाये स्वाहा
    46. ॐ सत्याय स्वाहा
    47. ॐ तत्त्वाय स्वाहा
    48. ॐ गुरवे स्वाहा
    49. ॐ चण्डिकायै स्वाहा
    50. ॐ गंगायै स्वाहा
    51. ॐ यमुनायै स्वाहा
    52. ॐ नर्मदायै स्वाहा
    53. ॐ शीतलायै स्वाहा
    54. ॐ अन्नपूर्णायै स्वाहा
    55. ॐ संतोष्यै स्वाहा
    56. ॐ कालिकायै स्वाहा
    57. ॐ भगवत्यै स्वाहा
    58. ॐ मातरायै स्वाहा
    59. ॐ पुरुषाय स्वाहा
    60. ॐ हंसाय स्वाहा
    61. ॐ जगन्नाथाय स्वाहा
    62. ॐ हृषीकेशाय स्वाहा
    63. ॐ कृष्णाय स्वाहा
    64. ॐ रामचन्द्राय स्वाहा
    65. ॐ वासुदेवाय स्वाहा
    66. ॐ बलरामाय स्वाहा
    67. ॐ नारसिंहाय स्वाहा
    68. ॐ वामनाय स्वाहा
    69. ॐ परशुरामाय स्वाहा
    70. ॐ गौतमाय स्वाहा
    71. ॐ गौरीशंकराय स्वाहा
    72. ॐ नागदेवाय स्वाहा
    73. ॐ वासुकये स्वाहा
    74. ॐ शेषनागाय स्वाहा
    75. ॐ गरुड़ाय स्वाहा
    76. ॐ वज्रपाणये स्वाहा
    77. ॐ धर्मराजाय स्वाहा
    78. ॐ अशोकाय स्वाहा
    79. ॐ शांति देव्यै स्वाहा
    80. ॐ नृसिंहाय स्वाहा
    81. ॐ ऋणमुक्ताय स्वाहा
    82. ॐ मोक्षाय स्वाहा
    83. ॐ वैद्यनाथाय स्वाहा
    84. ॐ वाचस्पतये स्वाहा
    85. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय स्वाहा
    86. ॐ लक्ष्मी नारायणाय स्वाहा
    87. ॐ सत्यनारायणाय स्वाहा
    88. ॐ गजेन्द्रमोक्षाय स्वाहा
    89. ॐ सूर्यनारायणाय स्वाहा
    90. ॐ भद्रकाली स्वाहा
    91. ॐ महादेवाय स्वाहा
    92. ॐ शरण्याय स्वाहा
    93. ॐ बालाजी स्वाहा
    94. ॐ सुभद्राय स्वाहा
    95. ॐ वेदव्यासाय स्वाहा
    96. ॐ कन्यायै स्वाहा
    97. ॐ अनंताय स्वाहा
    98. ॐ रामदूताय स्वाहा
    99. ॐ त्र्यम्बकाय स्वाहा
    100. ॐ नीलकंठाय स्वाहा
    101. ॐ वीरभद्राय स्वाहा
    102. ॐ अर्घ्यम स्वाहा
    103. ॐ पूर्णाहुति स्वाहा
    104. ॐ भूम्यै स्वाहा
    105. ॐ गोमातायै स्वाहा
    106. ॐ तुलसी मातायै स्वाहा
    107. ॐ विघ्नविनाशाय स्वाहा
    108. ॐ सर्वदेवाय स्वाहा
  • 7:51 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Ram Navami 2026: राम नवमी भोग

    राम नवमी पर भगवान राम को मुख्य रूप से चावल की खीर, केसरिया भात, हलवा, मालपुआ, पंजरी, और मौसमी फलों का भोग लगाया जाता है। इन सात्विक व्यंजनों में तुलसी पत्र अवश्य शामिल करें।

  • 7:37 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Ram Navami Par Kya Karna Chahiye: राम नवमी पर क्या करना चाहिए

    राम नवमी के दिन भगवान राम की पूजा करनी चाहिए। उनके मंत्रों और चालीसा का पाठ करना चाहिए। राम भगवान के मंदिर जाना चाहिए। कन्या पूजन करना चाहिए।

  • 6:51 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    राम नवमी की आरती (Ram Navami Ki Aarti)

    श्री राम चंद्र कृपालु भजमन,

    हरण भव भय दारुणम्।
    नवकंज लोचन कंज मुखकर,
    कंज पद कन्जारुणम्।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…
    कंदर्प अगणित अमित छवी,
    नव नील नीरज सुन्दरम्।
    पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि,
    नौमी जनक सुतावरम्।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…
    भजु दीन बंधु दिनेश,
    दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
    रघुनंद आनंद कंद,
    कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…
    सिर मुकुट कुण्डल तिलक,
    चारु उदारू अंग विभूषणं।
    आजानु भुज शर चाप धर,
    संग्राम जित खर-धूषणं।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…
    इति वदति तुलसीदास शंकर,
    शेष मुनि मन रंजनम्।
    मम ह्रदय कुंज निवास कुरु,
    कामादी खल दल गंजनम्।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…
    मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु,
    सहज सुंदर सावरों।
    करुना निधान सुजान सिलू,
    सनेहू जानत रावरो।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…
    एही भांती गौरी असीस सुनी,
    सिय सहित हिय हरषी अली।
    तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी,
    मुदित मन मंदिर चली।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…
    जानि गौरी अनुकूल सिय हिय,
    हरषु न जाइ कहि।
    मंजुल मंगल मूल वाम,
    अंग फरकन लगे।। श्री राम चंद्र कृपालु भजमन…

  • 6:28 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Ram Navami Ke Bhajan: राम नवमी के भजन

  • 9:44 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    राम नवमी पर इस मंत्र का जप करने से ज्ञान की होगी प्राप्ति

    राम नवमी के दिन 'रां रामाय नम:' मंत्र का जप आपको 51 बार करना चाहिए। इस मंत्र का जप करने से ज्ञान की प्राप्ति होती है और आपकी बौद्धिक क्षमता बढ़ती है। 

  • 9:25 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Ram Navami: भगवान राम के 108 नाम

    1. श्रीराम- जिनमें योगीजन रमण करते हैं
    2. शाश्वत- सनातन राम 
    3. रामभद्र- कल्याणमय राम
    4. रामचन्द्र- चंद्रमा के समान आनन्दमयी एवं मनोहर राम
    5. राजीवलोचन- कमल के समान नेत्रोंवाले
    6. श्रीमान् राजेन्द्र- श्री सम्पन्न राजाओं के भी राजा, चक्रवर्ती सम्राट
    7. रघुपुङ्गव- रघुकुल में श्रेष्ठ
    8. जानकीवल्लभ-  जनकसुता सीता के प्रियतम
    9. जैत्र- विजयशील
    10. जितामित्र- शत्रुओं को जीतनेवाला
    11. जनार्दन- सम्पूर्ण मनुष्यों द्वारा याचना करने योग्य
    12. विश्वामित्रप्रिय- विश्वामित्रजी के प्रियतम
    13. जितेंद्राये- विजेताओं का स्वामी, जो इन्द्र को जीत सकते हैं
    14. शरण्यत्राणतत्पर- शरणागतों के रक्षा में तत्पर
    15. बालिप्रमथन- बालि नामक वानर को मारनेवाले
    16. वाग्मी- अच्छे वक्ता
    17. सत्यवाक्- सत्यवादी
    18. सत्यविक्रम- सत्य पराक्रमी
    19. सत्यव्रत- सत्य का दृढ़ता पूर्वक पालन करनेवाले
    20. व्रतफल- सम्पूर्ण व्रतों के प्राप्त होने योग्य फलस्वरूप
    21. सदा हनुमदाश्रय- हनुमानजी के ह्रदयकमल में निवास करनेवाले
    22. कौसलेय- कौसल्याजी के पुत्र
    23. खरध्वंसी- खर नामक राक्षस का नाश करनेवाले
    24. विराधवध पण्डित- विराध नामक दैत्य का वध करने में कुशल
    25. विभीषण-परित्राता- विभीषण के रक्षक
    26. दशग्रीवशिरोहर- दशशीश रावण के मस्तक काटनेवाले
    27. सप्ततालप्रभेता- सात ताल वृक्षों को एक ही बाण से बींध डालनेवाले
    28. हरकोदण्ड खण्डन- जनकपुर में शिवजी के धनुष को तोड़नेवाले
    29. जामदग्न्यमहादर्पदलन- परशुरामजी के महान अभिमान को चूर्ण करनेवाले
    30. ताडकान्तकृत- ताड़का नामवाली राक्षसी का वध करनेवाले
    31. वेदान्तपार- वेदान्त के पारंगत विद्वान अथवा वेदांत से भी अतीत
    32. वेदात्मा- वेदस्वरूप
    33. भवबन्धैकभेषज- संसार बन्धन से मुक्त करने के लिये एकमात्र औषधरूप
    34. दूषणप्रिशिरोsरि- दूषण और त्रिशिरा नामक राक्षसों के शत्रु
    35. त्रिमूर्ति- ब्रह्मा, विष्णु और शिव- तीन रूप धारण करने वाले
    36. त्रिगुण- त्रिगुणस्वरूप अथवा तीनों गुणों के आश्रय
    37. त्रयी- तीन वेदस्वरूप
    38. त्रिविक्रम- जिसका तीन प्रगति पूरी दुनिया को कवर किया
    39. त्रिलोकात्मा- तीनों लोकों के आत्मा
    40. पुण्यचारित्रकीर्तन- जिनकी लीलाओं का कीर्तन परम पवित्र हैं
    41. त्रिलोकरक्षक- तीनों लोकों की रक्षा करने वाले
    42. धन्वी- धनुष धारण करनेवाले
    43. दण्डकारण्यवासकृत्- दण्डकारण्य में निवास करनेवाले
    44. अहल्यापावन- अहल्याको पवित्र करनेवाले
    45. पितृभक्त- पिता के भक्त
    46. वरप्रद- वर देनेवाले
    47. जितेन्द्रिय- इन्द्रियों को काबू में रखने वाले
    48. जितक्रोध- क्रोध को जीतने वाले
    49. जितलोभ- लोभ की वृत्ति को परास्त करनेवाले
    50. जगद्गुरु- अपने आदर्श चरित्रों से सम्पूर्ण जगत् को शिक्षा देने वाले
    51. ऋक्षवानरसंघाती- वानर और भालुओं की सेना का संगठन करने वाले
    52. चित्रकूट समाश्रय- वनवास के समय चित्रकूट पर्वत पर निवास करनेवाले
    53. जयन्तत्राणवरद- जयन्त के प्राणों की रक्षा करके उसे वर देनेवाले
    54. सुमित्रापुत्र- सेवित- सुमित्रानन्दन लक्ष्मण के द्वारा सेवित
    55. सर्वदेवाधिदेव- सम्पूर्ण देवताओं के भी अधिदेवता
    56. मृतवानरजीवन- मरे हुए वानरों को जीवित करनेवाले
    57. मायामारीचहन्ता- मारीच नामक राक्षस का वध करने वाले
    58. महाभाग- महान सौभाग्यशाली
    59. महाभुज- बड़ी- बड़ी बाँहोंवाले
    60. सर्वदेवस्तुत- सम्पूर्ण देवता जिनकी स्तुति करते हैं
    61. सौम्य- शांतस्वभाव
    62. ब्रह्मण्य- ब्राह्मणों के हितैषी
    63. मुनिसत्तम- मुनियों मे श्रेष्ठ
    64. महायोगी- सम्पूर्ण योगों के अधीष्ठान होने के कारण महान योगी
    65. महोदर- परम उदार
    66. सुग्रीवस्थिर राज्यपद- सुग्रीव को स्थिर राज्य प्रदान करनेवाले
    67. सर्वपुण्याधिकफलप्रद- समस्त पुण्यों के उत्कृष्ट फलरूप
    68. स्मृतसर्वाघनाशन- स्मरण करनेमात्र से ही सम्पूर्ण पापों का नाश करनेवाले
    69. आदिपुरुष- किसी वंश या साम्राज्य की पहली कड़ी
    70. महापुरुष- समस्त पुरुषों मे महान
    71. परमपुरुष- सर्वोत्कृष्ट पुरुष
    72. पुण्योदय- पुण्य को प्रकट करनेवाले
    73. महासार- सर्वश्रेष्ठ सारभूत परमात्मा
    74. पुराणपुरुषोत्तम- पुराणप्रसिद्ध क्षर-अक्षर पुरुषों से श्रेष्ठ लीलापुरुषोत्तम
    75. स्मितवक्त्र- जिनके मुखपर सदा मुस्कान की छटा छायी रहती है
    76. मितभाषी- कम बोलने वाले
    77. पूर्वभाषी- पूर्ववक्ता
    78. राघव- रघुकुल में अवतीर्ण
    79. अनन्तगुण गम्भीर- अनन्त कल्याणमय गुणों से युक्त एवं गम्भीर
    80. धीरोदात्तगुणोत्तर- धीरोदात्त नायकके लोकोतर गुणों से युक्त
    81. मायामानुषचारित्र- अपनी मायाका आश्रय लेकर मनुष्योंकी-सी लीलाएँ करनीवाले
    82. महादेवाभिपूजित- भगवान शंकर के द्वारा निरन्तर पूजित
    83. सेतुकृत- समुद्रपर पुल बाँधनेवाले
    84. जितवारीश- समुद्र को जीतने वाले
    85. सर्वतीर्थमय- सर्वतीर्थस्वरूप
    86. हरि- पाप-ताप को हरनेवाले
    87. श्यामाङ्ग- श्याम विग्रहवाले
    88. सुन्दर- परम मनोहर
    89. शूर- अनुपम शौर्यसे सम्पन्न वीर
    90. पीतवासा- पीताम्बरधारी
    91. धनुर्धर- धनुष धारण करने वाले
    92. सर्वयज्ञाधिप- सम्पूर्ण यज्ञों के स्वामी
    93. यज्ञ- यज्ञ स्वरूप
    94. जरामरणवर्जित- बुढ़ापा और मृत्यु से रहित
    95. शिवलिंगप्रतिष्ठाता- रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिंग की स्थापना करनेवाले
    96. सर्वाघगणवर्जित- समस्त पाप-राशियों से रहित
    97. सच्चिदानन्दविग्रह- सत्, चित् और आनन्द के स्वरूप का निर्देश कराने वाले
    98. परं ज्योति- परम प्रकाशमय,परम ज्ञानमय
    99. परं धाम- सर्वोत्कृष्ट तेज अथवा साकेतधामस्वरूप
    100. पराकाश त्रिपाद- विभूतिमें स्थित परमव्योम नामक वैकुण्ठधामरूप
    101. परात्पर पर- इन्द्रिय, मन, बुद्धि आदि से भी परे परमेश्वर
    102. परेश- सर्वोत्कृष्ट शासक
    103. पारग- सबको पार लगाने वाले
    104. पार- सबसे परे विद्यमान
    105. सर्वभूतात्मक- सर्वभूतस्वरूप
    106. परमात्मा- परम आत्मा
    107. रामचन्द्र- चाँद की तरह नेक
    108. शिव- परम कल्याणमय

  • 9:06 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Ram Navami: भगवान राम को अर्पित न करें ये चीजें

    • तामसिक भोजन
    • काले रंग की वस्तुएं
    • बासी फूल और फल
    • टूटे हुए चावल
  • 8:28 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Ram Navami: भगवान राम का इस श्लोक का जप करने से प्राप्त होंगे शुभ फल

    रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे। 
    रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥

  • 8:04 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    राम जी पर संत कबीर के दोहे

    जाँ घट राम न सँचरै, सो घट कूप समान।
    कबीरा जहँ राम नहँ, तहँ कोउ नाहिँ प्रमान।।

    राम राम सब जगत बखाने, आदि राम कोई बिरला जाने।
    एक राम का सकल पसारा, एक राम सबसे न्यारा।।

    एक राम दशरथ का बेटा, एक राम घट-घट में बैठा।
    एक राम का सकल पसारा, एक राम है सबसे न्यारा।।

  • 7:24 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Ramnavami: रामनवमी के दिन करें रामाष्टक का पाठ

    हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशव।
    गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा।।
     
    हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशव।
    गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा।।
     
    हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते।
    बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम्।।
     
    आदौ रामतपोवनादि गमनं हत्वा मृगं कांचनम्।
    वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीव सम्भाषणम्।।
     
    बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम्।
    पश्चाद्रावण कुम्भकर्णहननं एतदधि रामायणम्।।

  • 7:02 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Ram Navami 2026: राम रक्षा स्तोत्र पाठ के लाभ

    राम नवमी के दिन राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से न केवल श्रीराम बल्कि हनुमान जी भी प्रसन्न होते हैं। रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से आपके जीवन की समस्त समस्याओं का अंत होता है। इसके साथ ही भय और रोग से भी आपको मुक्ति मिलती है। मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास भी राम रक्षा स्तोत्र के पाठ से होता है। 

  • 6:24 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    भगवान श्रीराम के धनुष का क्या नाम था और इसकी क्या विशेषता थी?

    श्रीराम जी के धनुष का नाम कोदंड था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस धनुष का वजन 100 किलो था। इसके साथ ही इस धनुष की विशेषता थी कि इसका वार कभी भी खाली नहीं जाता था। 

  • 6:04 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    राम जी के जन्म के समय सूर्य-चंद्रमा किन राशियों में थे?

    भगवान श्री राम के जन्म के समय पुनर्वसु नक्षत्र था और चंद्रमा कर्क राशि में थे वहीं सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में थे।

  • 5:36 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Ram Navami: प्रभु श्रीराम की पूजा करने के लाभ

    भगवान राम की पूजा करने से मानसिक शांति और धैर्य आता है। 
    राम जी की आराधना करने से पारिवारिक सुख और सामंजस्य
    नेतृत्व क्षमता और कर्तव्य बोध
    आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और कठिन कार्यों को पूरा करने का साहस मिलता है।
    भगवान राम की पूजा करने से साधक का चरित्र निर्माण होता है, उसे सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
    अनजाने में हुई गलतियों के पश्चाताप और शुद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
    भगवान राम की पूजा से ग्रह दोष निवारण, विशेषकर शनि और राहु-केतु के दुष्प्रभावों में शांति मिलती है।
    शास्त्रों में 'राम' नाम को महामंत्र माना गया है।
    हनुमान चालीसा में भी कहा गया है कि राम नाम का जाप करने से भूत-पिशाच और नकारात्मक शक्तियां पास नहीं आतीं।
    मान्यता है कि अंत समय में राम नाम का स्मरण करने से जीव जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।

  • 5:00 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    राम नवमी पूजन सामग्री (Ram Navami 2026 Puja Samagri List)

    • राम दरबार की तस्वीर या मूर्ति
    • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
    • पीले या लाल रंग के वस्त्र
    • गंगाजल
    • तुलसी के पत्ते
    • धूप, दीपक, घी, कपूर
    • चंदन, कुमकुम, हल्दी
    • पीले और लाल रंग के फूल, मालाएं
    • अक्षत, रोली, मौली, पान
    • सुपारी, लौंग, इलायची, जनेऊ
    • फल, मिठाई 
    • कलश, घंटी, शंख
    • रामायण/रामचरितमानस की पुस्तक
  • 4:30 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    राम नवमी पूजा मुहूर्त (Ram Navami Puja Muhurat 2026)

    27 मार्च 2026 को राम नवमी पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:13 से दोपहर 01:41 बजे तक रहेगा। तो वहीं राम नवमी मध्याह्न का क्षण दोपहर 12:27 बजे का है। 

  • 4:06 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Ram Navami Colors: रामनवमी पर किस रंग के कपड़े पहनें

    राम नवमी को श्री राम भगवान के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। ये पर्व मानवता, हर्ष और उल्लास का प्रतीक माना जाता है। राम नवमी का दिन बहुत पावन माना जाता है। इस दिन आप चटख नीला, हरा, मोर पंखी नीला, मोर पंखी हरा, लाल, पीला, संतरिया आदि रंगों के कपड़े पहन सकते हैं।

  • 3:36 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    श्रीराम जी को इन चीजों का लगाएं भोग

    राम नवमी के दिन राम जी को धनिया की पंजीरी, खीर, हलवा फल और मिठाई समेत आदि चीजों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इन चीनों का भोग लगाने से प्रभु प्रसन्न होते हैं। साथ ही जीवन में खुशियों का आगमन होता है।

  • 3:17 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    राम नवमी पूजा विधि (Ram Navami Puja Vidhi)

    इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें साफ कपड़े धारण करें।
    घर और मंदिर में गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
    चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं।
    इसके बाद प्रभु श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान की मूर्ति को विराजमान करें।
    पंचामृत और फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।
    चंदन और रोली का तिलक लगाएं और फूलमाला अर्पित करें।
    देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।
    मंत्रों का जप करें और कथा का पाठ करें।
    राम रक्षा स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम का पाठ जरूर करें।
    फल और मिठाई का भोग लगाएं और सभी को प्रसाद बांटें।

  • 2:52 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Ram Bhajan: तुम उठो सिया सिंगार करो (Tum Utho Siya Singar Karo)

    तुम उठो सिया सिंगार करो,
    शिव धनुष राम ने तोड़ा है,
    शिव धनुष राम ने तोड़ा है,
    सीता से नाता जोड़ा है,
    तुम उठो सिया सिंगार करों,
    शिव धनुष राम ने तोड़ा है ॥
    शीश सिया के चुनर सोहे,
    टिके की छवि न्यारी है,
    न्यारी न्यारी क्या कहिये,
    रघुवर को जानकी प्यारी है,
    तुम उठो सिया सिंगार करों,
    शिव धनुष राम ने तोड़ा है ॥टीवी ड्रामा

    हाथ सिया के चूड़ी सोहे,
    कंगन की छवि न्यारी है,
    न्यारी न्यारी क्या कहिये,
    रघुवर को जानकी प्यारी है,
    तुम उठो सिया सिंगार करों,
    शिव धनुष राम ने तोड़ा है ॥

    कमर सिया के तगड़ी सोहे,
    झुमके की छवि न्यारी है,
    न्यारी न्यारी क्या कहिये,
    रघुवर को जानकी प्यारी है,
    तुम उठो सिया सिंगार करों,
    शिव धनुष राम ने तोड़ा है ॥

  • 2:30 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    राम नवमी 2026 शुभ मुहूर्त (Ram Navami 2026 Shubh Muhurat)

    • राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 13 मिनट से 01 बजकर 41 मिनट
    • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 44 मिनट से 05 बजकर 30 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 20 मिनट से 03 बजकर 19 मिनट तक
    • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 35 मिनट से 05 बजकर 58 मिनट तक
    • अमृत काल- 01 बजकर 05 मिनट से 02 बजकर 38 मिनट तक
  • 1:57 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    श्रीराम जी की आरती

    ।। श्री रामजी की आरती ।।
     
    आरती कीजै श्री रघुवर जी की,
    सतचित आनंद शिव सुंदर की,
     
    दशरथ तनय कौशल्या नंदन,
    सुर, मुनि, रक्षक, दैत्य निकंदन,
    अनुगत भक्त-भक्त उर चंदन,
    मर्यादा पुरुषोत्तम वर की,
    आरती कीजै श्री...
     
    निर्गुण, सगुण, अनूप रूप निधि,
    सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि,
    हरण शोक भयदायक नवनिधि,
    माया रहित दिव्य नर वर की,
    आरती कीजै श्री...
     
    जानकी पति सुर अधिपति जगपति,
    अखिल लोक पालक त्रिलोक गति,
    विश्व बंध अवंनह अमित गति,
    एक मात्र गति सचराचर की,
    आरती कीजै श्री...
     
    शरणागति वत्सल व्रतधारी,
    भक्त कल्प तरुवर असुरारी,
    नाम लेत जग पावन कारी,
    वानर सखा दीन दुःख हर की,
    आरती कीजै श्री...

  • 1:37 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    राम जी के गुरु कौन थे?

    श्रीराम के मुख्य रूप से दो गुरु थे:
    महर्षि वशिष्ठ: जो रघुकुल के कुलगुरु थे और जिन्होंने चारों भाइयों को प्रारंभिक शिक्षा दी।
    महर्षि विश्वामित्र: जो राम और लक्ष्मण को अपने साथ वन ले गए थे और उन्हें असुरों के संहार के लिए अस्त्र-शस्त्रों की विद्या दी।

  • 1:02 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Ram Navami 2026 Puja: रामनवमी पर पढ़ें रामचरितमानस की चौपाईयां

    1. जे न मित्र दुख होहिं दुखारी। तिन्हहि बिलोकत पातक भारी॥
    निज दुख गिरि सम रज करि जाना। मित्रक दुख रज मेरु समाना॥

    अर्थ: जो लोग मित्र के दुःख से दुःखी नहीं होते, उन्हें देखने से ही बड़ा पाप लगता है। अपने पर्वत के समान दुःख को धूल के समान और मित्र के धूल के समान दुःख को सुमेरु (बड़े भारी पर्वत) के समान जाने। 

    2. मोह सकल ब्याधिन्ह कर मूला। तिन्ह ते पुनि उपजहिं बहु सूला॥
    काम बात कफ लोभ अपारा। क्रोध पित्त नित छाती जारा॥

    अर्थ: सब रोगों की जड़ मोह (अज्ञान) है। उन व्याधियों से फिर और बहुत से शूल उत्पन्न होते हैं। काम वात है, लोभ अपार (बढ़ा हुआ) कफ है और क्रोध पित्त है जो सदा छाती जलाता रहता है। 

    3. सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहेहुँ मुनिनाथ।
    हानि, लाभ, जीवन, मरण,यश, अपयश विधि हाँथ।

    अर्थ: हानि-लाभ, जीवन-मरण और यश-अपयश, ये सब विधाता के हाथ हैं॥ भले ही लाभ-हानि जीवन-मरण ईश्वर के हाथ में हो, लेकिन हानि के बाद हम हार मानकर बैठें नहीं। ये हमारे ही हाथ हैं। 

  • 11:53 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    राम नवमी पूजा विधि (Ram Navami Puja Vidhi)

     

    इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें साफ कपड़े धारण करें।
    घर और मंदिर में गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
    चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं।
    इसके बाद प्रभु श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान की मूर्ति को विराजमान करें।
    पंचामृत और फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।
    चंदन और रोली का तिलक लगाएं और फूलमाला अर्पित करें।
    देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।
    मंत्रों का जप करें और कथा का पाठ करें।
    राम रक्षा स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम का पाठ जरूर करें।
    फल और मिठाई का भोग लगाएं और सभी को प्रसाद बांटें।

  • 11:45 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Shri Ram Stuti: श्री राम स्तुति

    ॥दोहा॥
    श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन
    हरण भवभय दारुणं ।
    नव कंज लोचन कंज मुख
    कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥

    कन्दर्प अगणित अमित छवि
    नव नील नीरद सुन्दरं ।
    पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि
    नोमि जनक सुतावरं ॥२॥

    भजु दीनबन्धु दिनेश दानव
    दैत्य वंश निकन्दनं ।
    रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल
    चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥

    शिर मुकुट कुंडल तिलक
    चारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।
    आजानु भुज शर चाप धर
    संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥

    इति वदति तुलसीदास शंकर
    शेष मुनि मन रंजनं ।
    मम् हृदय कंज निवास कुरु
    कामादि खलदल गंजनं ॥५॥

    मन जाहि राच्यो मिलहि सो
    वर सहज सुन्दर सांवरो ।
    करुणा निधान सुजान शील
    स्नेह जानत रावरो ॥६॥

    एहि भांति गौरी असीस सुन सिय
    सहित हिय हरषित अली।
    तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि
    मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥

  • 11:21 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    श्रीराम के धनुष का नाम क्या था?

    श्रीराम के दिव्य धनुष का नाम कोदंड था। वहीं, सीता स्वयंवर में उन्होंने जिस धनुष को तोड़ा था, वह शिव जी का 'पिनाक' धनुष था।

  • 11:18 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Navami 2026 Puja: रामनवमी पर पढ़ें रामचरितमानस की चौपाईयां

    1. होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥

    अस कहि लगे जपन हरिनामा। गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥

    अर्थ: जो कुछ राम ने रच रखा है, वही होगा। तभविष्य के बारे में सोचकर क्यों बात को विस्तार देना। 

    2. लछिमन बान सरासन आनू। सोषौं बारिधि बिसिख कृसानु॥

    सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति। सहज कृपन सन सुंदर नीति॥

    अर्थ: श्री राम कहते हैं, मूर्ख लोगों से विनम्रता से बात करने का कोई लाभ नहीं होता। कभी-कभी ऐसे लोगों से काम करवाने के लिए सख्ती बरतना आवश्यक हो जाता है। इसी प्रकार, कपटी स्वभाव वाले लोगों के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करना उचित नहीं है, क्योंकि वे सदैव दूसरों के लिए मुसीबत खड़ी करते हैं और उन पर भरोसा करना खतरनाक होता है। ठीक इसी तरह, कंजूस लोगों पर अच्छे नैतिक मूल्यों, उदारता अथवा उपदेशों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए, उनसे किसी प्रकार की सहायता या दान की अपेक्षा करना व्यर्थ है। 

  • 11:11 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Bhajan: सीता राम जी प्यारी राजधानी लागे

    सीता राम जी प्यारी राजधानी लागे,
    राजधानी लागे,
    मोहे मिठो मिठो, सरजू जी को पानी लागे।
    सीता राम जी प्यारी राजधानी लागे,
    राजधानी लागे,
    मोहे मिठो मिठो, सरजू जी को पानी लागे।
    जय हो प्रभु राम की जय हो अयोध्या धाम की,
    धन्य कौशल्या धन्य सुमित्रा धन्य कैकई मैया,
    धन्य कैकयी मैया,
    धन्य कौशल्या धन्य सुमित्रा धन्य कैकई मैया,
    धन्य कैकयी मैया, धन्य भूप दशरथ के अँगना,
    खेलत चारो भैया,
    मीठी तोतली रसीली प्रभु की बानी लागे
    प्रभु की बनी लागे,मोहे मिठो मिठो, सरजू जी को पानी लागे।
    सीता राम जी प्यारी राजधानी लागे,
    राजधानी लागे
    मोहे मिठो मिठो,सरजू जी को पानी लागे।जल और समुद्र विज्ञान

    परम सुहावन जनम भूमि श्री रघुवर राम लला की,
    रघुवर राम लला की,
    कनक भवन सुन्दर शोभा हो,
    कनक भवन सुन्दर शोभा,
    लक्ष्मण ज्यूत के किला की,
    जहां के कण कण में प्रभु की
    निशानी लागे, निशानी लागे,
    मोहे मिठो मिठो, सरजू जी को पानी लागे।
    सीता राम जी प्यारी राजधानी लागे,

    रंगमहल हनुमानगढ़ी छोटी छावनी अति सुन्दर,
    छोटी छावनी अति सुन्दर,
    रंगमहल हनुमानगढ़ी छोटी छावनी अति सुन्दर,
    छोटी छावनी अति सुन्दर,
    स्वंय जगत के मालिक बैठे,
    स्वंय जगत के मालिक बैठे,
    कनक भवन के अंदर,
    सीता राम जो की शोभा सुखकानी लागे,
    सुखकानी लागे,
    सीता राम जी प्यारी राजधानी लागे,
    राजधानी लागे
    मोहे मिठो मिठो,सरजू जी को पानी लागे।

  • 11:08 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    प्रभु श्रीराम की पूजा करने के लाभ

    1. भगवान राम की पूजा करने से मानसिक शांति और धैर्य आता है। 
    2. राम जी की आराधना करने से पारिवारिक सुख और सामंजस्य
    3. नेतृत्व क्षमता और कर्तव्य बोध
    4. आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और कठिन कार्यों को पूरा करने का साहस मिलता है।
    5. भगवान राम की पूजा करने से साधक का चरित्र निर्माण होता है, उसे सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
    6. अनजाने में हुई गलतियों के पश्चाताप और शुद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
    7. भगवान राम की पूजा से ग्रह दोष निवारण, विशेषकर शनि और राहु-केतु के दुष्प्रभावों में शांति मिलती है।
    8. शास्त्रों में 'राम' नाम को महामंत्र माना गया है।
    9. हनुमान चालीसा में भी कहा गया है कि राम नाम का जाप करने से भूत-पिशाच और नकारात्मक शक्तियां पास नहीं आतीं।
    10. मान्यता है कि अंत समय में राम नाम का स्मरण करने से जीव जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।
  • 10:42 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    श्रीराम जन्म की पावन कथा

    प्राचीन समय की बात है। अयोध्या नगरी के राजा दशरथ बहुत प्रतापी और धर्मपरायण थे, लेकिन उनके जीवन में एक बड़ी कमी थी—उन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं था। इस चिंता से व्याकुल होकर उन्होंने अपने गुरु महर्षि वशिष्ठ से उपाय पूछा। गुरु के मार्गदर्शन में उन्होंने एक महान यज्ञ का आयोजन कराया, जिसमें दूर-दूर से ऋषि-मुनियों को आमंत्रित किया गया।

    यज्ञ विधिपूर्वक संपन्न हुआ। यज्ञ के अंत में अग्निदेव से प्राप्त दिव्य प्रसाद राजा दशरथ को दिया गया। वे उस प्रसाद को बड़े श्रद्धा भाव से अपने महल में लाए और अपनी तीनों रानियों—माता कौशल्या, कैकयी और सुमित्रा—को बांट दिया।

    समय बीतने पर तीनों रानियों ने गर्भ धारण किया। फिर वह शुभ घड़ी आई, जब चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता कौशल्या ने एक तेजस्वी और दिव्य बालक को जन्म दिया। उस बालक का तेज ऐसा था मानो करोड़ों सूर्यों का प्रकाश एक साथ चमक उठा हो। यह कोई साधारण बालक नहीं, स्वयं भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम थे।

    इसके बाद रानी कैकयी ने भरत को और माता सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। चारों राजकुमारों के जन्म से पूरी अयोध्या नगरी में आनंद और उत्सव का माहौल छा गया। देवताओं ने भी आकाश से पुष्प वर्षा कर इस दिव्य अवसर का स्वागत किया।

    कुछ समय बाद महर्षि वशिष्ठ ने चारों बालकों का नामकरण किया—राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न। चारों भाई बड़े प्रेम और एकता के साथ बड़े हुए, लेकिन श्रीराम अपने गुणों, विनम्रता और मर्यादा के कारण सभी के प्रिय बन गए।

    जैसे-जैसे वे बड़े हुए, उन्होंने शिक्षा, शास्त्र और अस्त्र-शस्त्र में अद्भुत दक्षता हासिल कर ली। वे सदैव अपने माता-पिता और गुरुजनों की सेवा में लगे रहते थे। आगे चलकर उन्होंने अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए वनवास स्वीकार किया और कठिन परिस्थितियों में भी धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा।

    वनवास के दौरान जब रावण ने माता सीता का हरण किया, तब श्रीराम ने उसका वध कर अधर्म का अंत किया और धर्म की स्थापना की।

    इसी दिव्य अवतार और उनके आदर्श जीवन की स्मृति में हर वर्ष राम नवमी का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रीराम की यह कथा श्रद्धा से पढ़ने और सुनने से जीवन में सुख, शांति और प्रभु की कृपा बनी रहती है।

  • 10:01 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Navami 2026 Puja Live: श्रीराम जी की आरती

    ।। श्री रामजी की आरती ।।
     
    आरती कीजै श्री रघुवर जी की,
    सतचित आनंद शिव सुंदर की,
     
    दशरथ तनय कौशल्या नंदन,
    सुर, मुनि, रक्षक, दैत्य निकंदन,
    अनुगत भक्त-भक्त उर चंदन,
    मर्यादा पुरुषोत्तम वर की,
    आरती कीजै श्री...
     
    निर्गुण, सगुण, अनूप रूप निधि,
    सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि,
    हरण शोक भयदायक नवनिधि,
    माया रहित दिव्य नर वर की,
    आरती कीजै श्री...
     
    जानकी पति सुर अधिपति जगपति,
    अखिल लोक पालक त्रिलोक गति,
    विश्व बंध अवंनह अमित गति,
    एक मात्र गति सचराचर की,
    आरती कीजै श्री...
     
    शरणागति वत्सल व्रतधारी,
    भक्त कल्प तरुवर असुरारी,
    नाम लेत जग पावन कारी,
    वानर सखा दीन दुःख हर की,
    आरती कीजै श्री...

  • 9:57 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Navami 2026: भये प्रगट कृपाला

    "भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी'

     

  • 9:37 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram navami Puja 2026 Live: ऐसे करें भगवान श्रीराम की पूजा

    1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र स्नान करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। आज का दिन प्रभु के बालरूप की सेवा का है।
    2. ठीक दोपहर 12 बजे, जब सूर्य अपने शिखर पर होता है, प्रभु राम का जन्म हुआ था। इसी समय रामलला को सुंदर झूले में विराजमान करें और श्रृंगार करें।
    3. चावल की ढेरी पर तांबे का कलश स्थापित करें। कलश में आम के पत्ते, नारियल और सुपारी रखें। इसके चारों ओर चौमुखी दीपक प्रज्वलित करें जो चारों दिशाओं से अंधकार को दूर करे।
    4. प्रभु को कमल का फूल, तुलसी दल (जो उन्हें अत्यंत प्रिय है), पंचामृत, ताजे फल और फूलों की माला अर्पित करें।
    5. भोग लगाने के बाद श्रद्धापूर्वक विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। यह मन को अगाध शांति प्रदान करता है।
    6. रामनवमी पर पंजीरी और पंचामृत का विशेष महत्व है। इसे बनाकर सभी में वितरित करें।
    7. रामनवमी केवल व्रत रखने का दिन नहीं है, बल्कि श्रीराम के धैर्य और उनके मर्यादित चरित्र को अपने भीतर उतारने का संकल्प लेने का दिन है।
  • 9:24 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Ji Ka Bhajan: राम भजन

    प्रभु जी तुम चंदन हम पानी (Prabhu Ji Tum Chandan Hum Paani) 
    प्रभु जी तुम चंदन हम पानी,
    जाकी अंग-अंग बास समानी,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥

    प्रभु जी तुम घन बन हम मोरा,
    जैसे चितवत चंद्र चकोरा,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी,
    जाकी अंग-अंग बास समानी,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥

    प्रभु जी तुम मोती हम धागा,
    जैसे सोनहिं मिलत सोहागा,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी,
    जाकी अंग-अंग बास समानी,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥

    प्रभु जी तुम दीपक हम बाती,
    जाकी जोति बरै दिन राती,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी,
    जाकी अंग-अंग बास समानी,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥

    प्रभु जी तुम स्वामी हम दासा,
    ऐसी भक्ति करे ‘रैदासा’,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी,
    जाकी अंग-अंग बास समानी,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥

    प्रभु जी तुम चंदन हम पानी,
    जाकी अंग-अंग बास समानी,
    प्रभु जी तुम चँदन हम पानी ॥

  • 9:16 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ramnavami Puja Samagri: रामनवमी पूजा सामग्री लिस्ट

    पीला या लाल रंग का कपड़ा
    कलश
    पंचामृत
    रोली
    पीला चंदन
    हल्दी
    अक्षत
    फूलों की माला
    तुलसी दल
    सुपारी
    लौंग
    ऋतुफल
    सूजी का हलवा या खीर
    पंचमेवा
    घी
    रुई की बत्ती
    दीपक
    धूपबत्ती
    कपूर
    पूजा की थाली
    घंटी
    शंख
    रामायण, रामचरितमानस या राम रक्षा स्तोत्र की पुस्तक
    राम दरबार की मूर्ति

  • 9:03 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Ji Ki Aarti: भगवान श्रीराम की आरती

    श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
    नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।। 

    कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
    पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।

    भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
    रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।

    सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
    आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।

    इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
    मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।

    छंद 
    मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
    करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।

    एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
    तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।

    ।।सोरठा।।
    जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
    मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।

  • 8:43 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Bhajan: राम नाम तू जपले मेरे मनवा (Ram Naam Tu Japle Mere Manva)

    राम नाम तू जपले मेरे मनवा
    हरी नाम तू जपले रे मनवा

    दो आखर का है प्यारा नाम
    जो भी जपे उसका हो कल्याण
    राम नाम तू जपले मेरे मनवा
    हरी नाम तू जपले रे मनवा

    तेरा राम तो तेरे भीतर
    अब तो देख तू खोल के आँखें
    राम नाम तू जपले मेरे मनवा
    हरी नाम तू जपले रे मनवा

    कुछ भी ना तेरे साथ जायेगा
    राम नाम ही काम आएगा
    राम नाम तू जपले मेरे मनवा
    हरी नाम तू जपले रे मनवा

    सुनलो भैया सुनलो बहनो
    राम नाम सदा रटते रहना
    राम नाम तू जपले मेरे मनवा
    हरी नाम तू जपले रे मनवा

  • 8:25 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    श्री राम चालीसा (Shri Ram Chalisa)

    श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।

    निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहीं होई।।

    ध्यान धरें शिवजी मन मांही। ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं।।

    दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहुं पुर जाना।।

    जय, जय, जय रघुनाथ कृपाला। सदा करो संतन प्रतिपाला।।

    तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला। रावण मारि सुरन प्रतिपाला।।

    तुम अनाथ के नाथ गोसाईं। दीनन के हो सदा सहाई।।

    ब्रह्मादिक तव पार न पावैं। सदा ईश तुम्हरो यश गावैं।।

    चारिउ भेद भरत हैं साखी। तुम भक्तन की लज्जा राखी।।

    गुण गावत शारद मन माहीं। सुरपति ताको पार न पाहिं।।

    नाम तुम्हार लेत जो कोई। ता सम धन्य और नहीं होई।।

    राम नाम है अपरम्पारा। चारिहु वेदन जाहि पुकारा।।

    गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो। तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो।।

    शेष रटत नित नाम तुम्हारा। महि को भार शीश पर धारा।।

    फूल समान रहत सो भारा। पावत कोऊ न तुम्हरो पारा।।

    भरत नाम तुम्हरो उर धारो। तासों कबहूं न रण में हारो।।

    नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा। सुमिरत होत शत्रु कर नाशा।।

    लखन तुम्हारे आज्ञाकारी। सदा करत सन्तन रखवारी।।

    ताते रण जीते नहिं कोई। युद्ध जुरे यमहूं किन होई।।

    महालक्ष्मी धर अवतारा। सब विधि करत पाप को छारा।।

    सीता राम पुनीता गायो। भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो।।

    घट सों प्रकट भई सो आई। जाको देखत चन्द्र लजाई।।

    जो तुम्हरे नित पांव पलोटत। नवो निद्धि चरणन में लोटत।।

    सिद्धि अठारह मंगलकारी। सो तुम पर जावै बलिहारी।।

    औरहु जो अनेक प्रभुताई। सो सीतापति तुमहिं बनाई।।

    इच्छा ते कोटिन संसारा। रचत न लागत पल की बारा।।

    जो तुम्हरे चरणन चित लावै। ताकी मुक्ति अवसि हो जावै।।

    सुनहु राम तुम तात हमारे। तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे।।

    तुमहिं देव कुल देव हमारे। तुम गुरु देव प्राण के प्यारे।।

    जो कुछ हो सो तुमहिं राजा। जय जय जय प्रभु राखो लाजा।।

    राम आत्मा पोषण हारे। जय जय जय दशरथ के प्यारे।।

    जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरुपा। नर्गुण ब्रहृ अखण्ड अनूपा।।

    सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी। सत्य सनातन अन्तर्यामी।।

    सत्य भजन तुम्हरो जो गावै। सो निश्चय चारों फल पावै।।

    सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं। तुमने भक्तिहिं सब सिधि दीन्हीं।।

    ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरुपा। नमो नमो जय जगपति भूपा।।

    धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा। नाम तुम्हार हरत संतापा।।

    सत्य शुद्ध देवन मुख गाया। बजी दुन्दुभी शंख बजाया।।

    सत्य सत्य तुम सत्य सनातन। तुम ही हो हमरे तन-मन धन।।

    याको पाठ करे जो कोई। ज्ञान प्रकट ताके उर होई।।

    आवागमन मिटै तिहि केरा। सत्य वचन माने शिव मेरा।।

    और आस मन में जो होई। मनवांछित फल पावे सोई।।

    तीनहुं काल ध्यान जो ल्यावै। तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै।।

    साग पत्र सो भोग लगावै। सो नर सकल सिद्धता पावै।।

    अन्त समय रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि भक्त कहाई।।

    श्री हरिदास कहै अरु गावै। सो बैकुण्ठ धाम को पावै।।

    ॥दोहा॥
    सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय।

    हरिदास हरि कृपा से, अवसि भक्ति को पाया।।

    राम चालीसा जो पढ़े, राम चरण चित लाय।

    जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्ध हो जाय।।

  • 8:14 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Navami Bhog: राम जी को इन चीजों का लगाएं भोग

    राम नवमी के दिन राम जी को धनिया की पंजीरी, खीर, हलवा फल और मिठाई समेत आदि चीजों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इन चीनों का भोग लगाने से प्रभु प्रसन्न होते हैं। साथ ही जीवन में खुशियों का आगमन होता है।

  • 8:04 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    राम नवमी पूजा विधि (Ram Navami Puja Vidhi)

    इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें साफ कपड़े धारण करें।
    घर और मंदिर में गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
    चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं।
    इसके बाद प्रभु श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान की मूर्ति को विराजमान करें।
    पंचामृत और फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।
    चंदन और रोली का तिलक लगाएं और फूलमाला अर्पित करें।
    देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।
    मंत्रों का जप करें और कथा का पाठ करें।
    राम रक्षा स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम का पाठ जरूर करें।
    फल और मिठाई का भोग लगाएं और सभी को प्रसाद बांटें।

  • 8:02 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    राम नवमी 2026 शुभ मुहूर्त (Ram Navami 2026 Shubh Muhurat)

     

    राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 13 मिनट से 01 बजकर 41 मिनट
    ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 44 मिनट से 05 बजकर 30 मिनट तक
    विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 20 मिनट से 03 बजकर 19 मिनट तक
    गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 35 मिनट से 05 बजकर 58 मिनट तक
    अमृत काल- 01 बजकर 05 मिनट से 02 बजकर 38 मिनट तक

  • 7:41 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Raksha Stotra: श्री राम रक्षा स्तोत्रम्

    विनियोग:

    अस्य श्रीरामरक्षास्त्रोतमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः।

    श्री सीतारामचंद्रो देवता।
    अनुष्टुप छंदः। सीता शक्तिः।
    श्रीमान हनुमान कीलकम।
    श्री सीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्त्रोतजपे विनियोगः।

    अथ ध्यानम्‌:

    ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपदमासनस्थं,
    पीतं वासो वसानं नवकमल दल स्पर्धिनेत्रम् प्रसन्नम।
    वामांकारूढ़ सीता मुखकमलमिलल्लोचनम्नी,
    रदाभम् नानालंकारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलम् रामचंद्रम॥

    राम रक्षा स्तोत्रम्:

    चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम्।
    एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥1॥

    ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम्।
    जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितं ॥2॥

    सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम्।
    स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ॥3॥

    रामरक्षां पठेत प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम्।
    शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ॥4॥

    कौसल्येयो दृशो पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुति।
    घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ॥5॥

    जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः।
    स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ॥6॥

    करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित।
    मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः ॥7॥

    सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः।
    उरु रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृताः ॥8॥

    जानुनी सेतुकृत पातु जंघे दशमुखांतकः।
    पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामअखिलं वपुः ॥9॥

    एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृति पठेत।
    स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ॥10॥

    पातालभूतल व्योम चारिणश्छद्मचारिणः।
    न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ॥11॥

    रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन।
    नरौ न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥12॥

    जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्।
    यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥13॥

    वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत।
    अव्याहताज्ञाः सर्वत्र लभते जयमंगलम् ॥14॥

    आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः।
    तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः ॥15॥

    आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम्।
    अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान स नः प्रभुः ॥16॥

    तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ।
    पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥17॥

    फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ।
    पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥18॥

    शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्।
    रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ॥19॥

    आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशा वक्ष याशुगनिषङ्गसङ्गिनौ।
    रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम ॥20॥

    सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा।
    गच्छन् मनोरथान नश्च रामः पातु सलक्ष्मणः ॥21॥

    रामो दाशरथी शूरो लक्ष्मणानुचरो बली।
    काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः ॥22॥

    वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः।
    जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः ॥23॥

    इत्येतानि जपन नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः।
    अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः ॥24॥

    रामं दुर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम।
    स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नरः ॥25॥

    रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरं,
    काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम।
    राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथतनयं श्यामलं शांतमूर्तिं,
    वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम ॥26॥

    रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे।
    रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥27॥

    श्रीराम राम रघुनन्दनराम राम,
    श्रीराम राम भरताग्रज राम राम।
    श्रीराम राम रणकर्कश राम राम,
    श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥28॥

    श्रीराम चन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि,
    श्रीराम चंद्रचरणौ वचसा गृणामि।
    श्रीराम चन्द्रचरणौ शिरसा नमामि,
    श्रीराम चन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥29॥

    माता रामो मत्पिता रामचंन्द्र:।
    स्वामी रामो मत्सखा रामचंद्र:।
    सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु।
    नान्यं जाने नैव जाने न जाने ॥

    दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मज।
    पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥31॥

    लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथं।
    कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये ॥32॥

    मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम।
    वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्ये ॥33॥

    कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम।
    आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम ॥34॥

    आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्।
    लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥35॥

    भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम्।
    तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम् ॥36॥

    रामो राजमणिः सदा विजयते,
    रामं रमेशं भजे रामेणाभिहता,
    निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः।
    रामान्नास्ति परायणं परतरं,
    रामस्य दासोस्म्यहं रामे चित्तलयः,
    सदा भवतु मे भो राम मामुद्धराः ॥37॥

    राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
    सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥38॥

  • 7:23 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Navami Colors: राम नवमी पर पहनें इन रंगों के कपड़े

    राम नवमी को श्री राम भगवान के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। ये पर्व मानवता, हर्ष और उल्लास का प्रतीक माना जाता है। राम नवमी का दिन बहुत पावन माना जाता है। इस दिन आप चटख नीला, हरा, मोर पंखी नीला, मोर पंखी हरा, लाल, पीला, संतरिया आदि रंगों के कपड़ें पहन सकते हैं।

  • 7:03 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Navami 2026 Puja Samagri List: राम नवमी पूजन सामग्री

    राम दरबार की तस्वीर या मूर्ति
    पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
    पीले या लाल रंग के वस्त्र
    गंगाजल
    तुलसी के पत्ते
    धूप, दीपक, घी, कपूर
    चंदन, कुमकुम, हल्दी
    पीले और लाल रंग के फूल, मालाएं
    अक्षत, रोली, मौली, पान
    सुपारी, लौंग, इलायची, जनेऊ
    फल, मिठाई 
    कलश, घंटी, शंख
    रामायण/रामचरितमानस की पुस्तक

     

  • 7:02 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Navami Puja Muhurat 2026: राम नवमी पूजा मुहूर्त

    27 मार्च 2026 को राम नवमी पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:13 से दोपहर 01:41 बजे तक रहेगा। तो वहीं राम नवमी मध्याह्न का क्षण दोपहर 12:27 बजे का है। 

  • 7:00 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Navami Kyu Manai Jati Hai: राम नवमी क्यों मनाई जाती है

    राम नवमी का पावन पर्व भगवान विष्णु के सातवें अवतार, श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं अनुसार त्रेता युग में अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के पुत्र के रूप में भगवान विष्णु ने अपना सातवां अवतार लिया था। श्रीराम का जन्म अधर्म का नाश करने और धर्म की स्थापना के लिए हुआ था। धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि भगवान राम का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर हुआ था, इसलिए हर साल इस तिथि को श्रीराम जन्मोत्सव यानी राम नवमी के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।

  • 6:59 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Navami 2026 Kab Hai: राम नवमी कब है 2026

    अयोध्या में राम नवमी का त्योहार 27 मार्च 2026 को मनाया जा रहा है। ऐसे में अब देश के लगभग सभी क्षेत्रों में इसी दिन राम नवमी मनाई जाएगी। तो वहीं राम नवमी पूजा का शुभ मुहूर्त 27 मार्च की सुबह 11:13 से दोपहर 01:41 बजे तक रहेगा।

  • 6:58 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Ram Navami 2026 Live: राम नवमी किस दिन मनाना ज्यादा सही रहेगा

    हिंदू पंचांग अनुसार, इस साल ये तिथि 26 मार्च की सुबह 11:48 से शुरू होकर 27 मार्च की सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। चूंकि राम जी का जन्म मध्याह्न काल (दोपहर 12 बजे का समय) में हुआ था इसलिए कई लोग 26 मार्च को राम नवमी मनाना ज्यादा उचित मान रहे हैं। वहीं जो लोग उदया तिथि को महत्व देते हैं वो 27 मार्च 2026 को ये पर्व मनाने की बात कर रहे हैं। चलिए जानते हैं विद्वानों अनुसार राम नवमी किस दिन मनाना ज्यादा सही रहेगा।

     

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