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भारत में अघोरी साधना के लिए ये हैं 5 प्रमुख स्थान, सूनसान जगहों पर होती है नर कंकाल के साथ पूजा

 Published : Jan 23, 2025 03:55 pm IST,  Updated : Jan 23, 2025 03:56 pm IST

भारत में अघोरियों के नाम से लोग खौफ खाते हैं। कहा जाता है कि अघोरी जीवन और मृत्यु के बीच की बंधन को काफी पीछे छोड़ चुके होते हैं, वे हमेशा अपने आराध्य की भक्ति में लीन रहते हैं।

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अघोरी Image Source : SOCIAL MEDIA

अघोर पंथ को शैव और शाक्त संप्रदाय की एक तंत्र साधना माना गया है। अघोर की उत्पत्ति भगवान दत्तात्रेय से मानी जाती है। इन्हें भगवान शिव का अवतार माना गया है। अघोर की शुरुआती उत्पत्ति काशी से मानी गई है, समय के साथ इसके पीठों का विस्तार हुआ आज देश में कई जगहों पर आपको अघोरी तंत्र साधना करते दिख जाएंगे। कहा जाता है कि अघोरी अक्सर सूनसान इलाकों में श्मशान भूमि में साधना करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि कहां-कहां अघोरी करते हैं साधना...

काशी

वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के पास मणिकर्णिका घाट को अघोरी तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र मानते हैं। कहा जाता है कि अघोरी यहां शवों को खाते हैं और नर खोपड़ी में पानी पीते हैं। मणिकर्णिका घाट पर आपको अघोर साधक आसानी से देखने को मिल जाएंगे।

तारापीठ

कहा जाता है कि तारापीठ पश्चिम बंगाल की बीरभूमि में द्वारका नदी के पास है। यह कोलकाता से करीबन 265 किलोमीटर दूर है। तारापीठ को तांत्रिकों शाक्तों,शैवों कपालिकों और औघड़ों के लिए पूजनीय माना जाता है। इस स्थान पर सती की आंखे गिरी थीं, इसलिए यह शक्तिपीठ बन गया। तारापीठ में सती के रूप में मां तारा विराजमान है और पीछे महाश्मशान, जहां अघोरी अपनी साधना करते हैं।

विंध्याचल

विंध्याचल में मां विंध्यावासिनी माता का मंदिर हैं। मान्यता है कि महिषासुर वध के बाद मां दुर्गा इसी जगह आराम के लिए ठहरी थीं। भगवान राम खुद यहां मां सीता के साथ आए थे और तप किया था। यहां आसपास कई गुफाएं हैं, जिनमें रहकर अघोर साधक अपनी साधना करते हैं।

चित्रकूट

चित्रकूट को अघोर पंथ के भगवान दत्तात्रेय की जन्मस्थली माना जाता है। इस कारण अघोर साधकों के लिए यह जगह पवित्र मानी गई है। औघड़ों की कीनारामी परंपरा की उत्तपत्ति यहीं से मानी गई है। कहा जाता है कि मां अनुसूइया का आश्रम और सिद्ध आघोराचार्य शरभंग का आश्रम भी है। अघोरियों के लिए यहीं पर स्फटिक शिला है, जो उनके लिए काफी खास है।

काली मठ

हिमालय के तली में गुप्तकाशी से ऊपर एक कालीमठ नाम की जगह है। यहां अनेक अघोरी साधक रहते हैं। यहां से 5 हजार फीट ऊपर पर एक पहाड़ी पर काल शिला है, यहीं पर अघोरियों का वास है। माना जाता है कि कालीमठ में भगवान राम ने अपना खडग स्थापित किया था।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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