हर माह की आखिरी तारीख पर पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है, साथ ही इसे भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता को देखें तो आषाढ़ पूर्णिमा के दिन श्री हरि की पूजा कर पवित्र नदी में स्नान करने से जातक के सभी पापों का नाश हो जाता है। साथ ही जातक के घर सुख और समृ्द्धि का वास होता है। आइए जानते हैं कि इस माह में कब बनाया जा रहा आषाढ़ पूर्णिमा?
कब मनाया जाएगा आषाढ़ पूर्णिमा का पर्व?
पंचांग की मानें तो आषाढ़ पूर्णिमा तिथि का आरंभ 10 जुलाई की देर रात 01.36 बजे होगा, जबकि तिथि का समापन 11 जुलाई की देर रात 02.06 बजे होगा। चूंकि हिंदू धर्म में उदया तिथि की मान्यता है ऐसे में यह पर्व 10 जुलाई को मनाया जाएगा।
शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 10 मिनट से 04 बजकर 50 मिनट तक
- विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 45 मिनट से 03 बजकर 40 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त- शाम 07 बजकर 21 मिनट से 07 बजकर 41 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त- रात्रि 12 बजकर 06 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक
इस दिन क्या कर सकते हैं दान?
पूर्णिमा के दिन पूजा के सात दान-पुण्य का भी विधान है। ऐसे में आप अगर इस दिन व्रत आदि कर रहे तो सुबह स्नान करने के बाद पूजा करें और फिर मंदिर या फिर गरीबों में अन्न और धन दोनों का दान जरूर करें। धार्मिक मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन दान करने से धन लाभ होता है और मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है।
पूजा के दौरान जातक को सुख-समद्धि के लिए पूर्णिमा के दिन दूध का दान करना चाहिए। साथ ही मां लक्ष्मी से सुख की कामना करनी चाहिए। इससे घर में शांत और धन दोनों बने रखें।
जपें मां लक्ष्मी के ये मंत्र
- या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती॥ - ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ।
- ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ ।।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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