Charanamrit Rules: जब भी हम मंदिर में जाते हैं या घर में किसी विशेष पूजा-पाठ का आयोजन होता है तो अंत में चरणामृत जरूर दिया जाता है। कहते हैं इसका सेवन करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर चली जाती है और आत्मा शुद्ध हो जाती है। साथ ही अकाल मृत्यु का डर नहीं रहता। लेकिन इसका पुण्य तभी मिल सकता है जब आप इसे सही तरीके से ग्रहण कर रहे हों। दरअसल ज्यादातर लोग चरणामृत पीने में गलती कर देते हैं। भारत के प्रतिष्ठित भागवत कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने इसके सेवन का सही तरीका बताया है।
इन दिनों सोशल मीडिया पर श्री पुंडरीक जी महाराज का एक वीडियो काफी ज्यादा वायरल हो रहा है जिसमें वे चरणामृत पीने का सही तरीका बता रहे हैं। महाराज जी के अनुसार चरणामृत लेने के लिए हथेली में गोमुखी मुद्रा बनाएं और फिर इसमें चरणामृत लें। अब हथेली में नीचे की तरफ जो तीर्थ स्थान माना जाता है वहां से प्रेम और श्रद्धा के साथ इसका सेवन करें। साथ में भगवान का स्मरण करें और इन मंत्रों का जाप करें -
- केशवाय नम:
- माधवाय नम:
- नारायणाय नम:
- अकाल मृत्यु हरणं सर्व व्याधि विनाशनम। विष्णो: पादोदकं पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते।
अक्सर लोग चरणामृत और पंचामृत को एक समझ लेते हैं, लेकिन इन दोनों में अंतर होता है। जहां चरणामृत (चरण + अमृत) यानी भगवान के चरणों का जल है। तो वहीं पंचामृत (पंच + अमृत) यानी पांच पवित्र वस्तुओं से मिलकर बना मिश्रण है। पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और चीनी से तैयार किया जाता है। कहते हैं चरणामृत का सेवन पापों और दुखों का नाश करता है तो पंचामृत को भगवान का अभिषेक करने या पूजा के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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