Navgrah Pidahar Stotra Path With Hindi Meaning: फाल्गुन मास में होली से पहले आने वाले आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। इस दौरान शुभ कार्यों पर पाबंदी रहती है। साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च को समाप्त होगा। ज्योतिष शास्त्र कहा है कि इस समय ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल रहती है, जिससे मानसिक तनाव, विवाद, आर्थिक रुकावट और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। यही कारण है कि होलाष्टक में श्री नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ करना बहुत शुभकारी माना गया है। यहां पढ़िए संपूर्ण नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र।
होलाष्टक और ग्रहों की स्थिति
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलाष्टक के दिनों में ग्रह उग्र होते हैं और नकारात्मक शक्तियां सक्रिय रहती हैं। यह स्थिति व्यक्ति के जीवन में परेशानियों और बाधाओं को जन्म देती है। ऐसे समय में नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ करने से ग्रहों के उग्र प्रभाव को कम किया जा सकता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र (Navgrah Pidahar Stotra With Hindi Meaning)
नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। इसमें प्रत्येक श्लोक में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु के नकारात्मक प्रभावों को कम करने की प्रार्थना की गई है।
ग्रहाणामादिरादित्यो लोकरक्षणकारकः।
विषमस्थानसम्भूतं पीड़ां हरतु मे रविः ॥1॥
अर्थ: सभी ग्रहों में सबसे पहले गणना किए जाने वाले, अदिति के पुत्र और सम्पूर्ण जगत के रक्षक सूर्यजी, जो जीवन में प्रकाश और ऊर्जा का स्त्रोत हैं, मेरे जीवन में जो भी कष्ट और पीड़ा ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति के कारण उत्पन्न हो रही है, उसे दूर करें।
रोहिणीशः सुधांशुश्च सुधागात्रः सुधाशनः।
विषमस्थानसम्भूतं पीड़ां हरतु मे विधुः ॥2॥
अर्थ: रोहिणी नक्षत्र के स्वामी, अमृतमय रूप और शुद्ध शरीर वाले चंद्रमा, जो शांतिप्रिय और जीवन में सुख-शांति देने वाले हैं, मेरे जीवन में जो पीड़ा और परेशानियाँ ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति के कारण आई हैं, उन्हें दूर करें।
भूमिपुत्रो महातेजा जगतां भयकृत्सदा।
वृष्टिकृद् वृष्टिहर्ता च पीड़ां हरतु मे कुजः ॥3॥
अर्थ: मंगल, जो भूमि के पुत्र हैं, महान तेजस्वी और साहसी हैं, वृष्टि देने और नियंत्रित करने की क्षमता रखते हैं, मेरे जीवन में आने वाली हर प्रकार की पीड़ा, भय और बाधाओं को दूर करें।
उत्पातरूपो जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युतिः।
सूर्यप्रियकरो विद्वान् पीड़ां हरतु मे बुधः ॥4॥
अर्थ: बुध, जो चंद्रमा के पुत्र और अत्यंत विद्वान हैं, सूर्यप्रिय और ज्ञान देने वाले हैं, मेरे जीवन में शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानियों को दूर करें।
देवमन्त्री विशालाक्षः सदा लोकहिते रतः।
अनेकशिष्यसम्पूर्णः पीड़ां हरतु मे गुरुः ॥5॥
अर्थ: बृहस्पति, देवताओं के मंत्री, विशाल नेत्रों वाले और हमेशा लोककल्याण में लगे रहने वाले, अनेक शिष्यों द्वारा सम्मानित, मेरे जीवन में उत्पन्न समस्याओं, बाधाओं और मानसिक पीड़ा को दूर करें।
दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महामतिः।
प्रभुस्ताराग्रहाणां च पीड़ां हरतु मे भृगुः ॥6॥
अर्थ: शुक्र, जो दैत्यों के गुरु और जीवनदायिनी शक्तियों से सम्पन्न हैं, ताराग्रहों के स्वामी हैं, मेरे जीवन में उत्पन्न होने वाली सभी बाधाओं, संघर्ष और परेशानियों को दूर करें।
सूर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्षः शिवप्रियः।
मन्दचारः प्रसन्नात्मा पीड़ां हरतु मे शनिः ॥7॥
अर्थ: शनि, सूर्य के पुत्र, लंबी देह वाले, विशाल नेत्र और मंद गति वाले, शिव के प्रिय और शांतचित्त, मेरे जीवन में जो मानसिक तनाव, रोग और जीवन की कठिनाइयाँ उत्पन्न हुई हैं, उन्हें दूर करें।
अनेक रूपवर्णैश्च शतशोऽथ सहस्रशः।
उत्पातरूपो जगतां पीड़ां हरतु मे तमः ॥8॥
अर्थ: राहु, जो अनेक रूप और रंगों वाले हैं, सैकड़ों-हजारों आंखों से जगत को देख सकते हैं और उत्पात करने की शक्ति रखते हैं, मेरे जीवन में ग्रहों के कारण उत्पन्न कष्ट और नकारात्मक प्रभाव को दूर करें।
महाशिरा महावक्त्रो दीर्घदंष्ट्रो महाबलः।
अतनुश्चोर्ध्वकेशश्च पीड़ां हरतु मे शिखी ॥9॥
अर्थ: केतु, जो विशाल सिर और मुख, लंबी दांतों और शक्तिशाली शरीर वाले हैं, बिना शरीर और ऊपर की ओर केशों वाले, मेरे जीवन में होने वाली सभी परेशानियों, संघर्ष और बाधाओं को दूर करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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