Rahu-Ketu Dosh Nivaran Temples: ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को बेहद प्रभावशाली छाया ग्रह माना गया है। इनका अशुभ प्रभाव जीवन में मानसिक तनाव, बाधाएं और अचानक परेशानियां लाता है। देश में कुछ प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां राहु-केतु दोष से राहत के लिए विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। इन मंदिरों में श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचकर ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम करने की कामना करते हैं। चलिए जानते हैं इन मंदिरों के बारे में। माना जाता है कि इन जगहों के दर्शन करने से जीवन की परेशानियों से निजात मिल सकता है।
राहु मंदिर
उत्तराखंड की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच स्थित है राहु मंदिर। श्रद्धालु यहां शांत वातावरण में ध्यान और पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने से राहु से जुड़े दोष और नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं।
श्री कालहस्तीश्वर मंदिर
यह मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में स्थित है, जो भगवान शिव को समर्पित है। यहां उन्हें कालहस्तीश्वर रूप में पूजा जाता है, जिन्हें वायु तत्व का प्रतीक माना जाता है। यह मंदिर राहु-केतु दोष निवारण के लिए बेहद प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां विशेष पूजा कराने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। स्थानीय लोग इसे दक्षिण कैलाश के नाम से भी जानते हैं।
तिरुनागेश्वरम नागनाथर मंदिर
तमिलनाडु के कुंभकोणम के पास स्थित तिरुनागेश्वरम नागनाथर मंदिर को राहु स्थलम कहा जाता है। यहां शिव जी को नागनाथ के रूप में विराजमान हैं, जबकि माता पार्वती को पिरैसूदी अम्मन के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर नवग्रह स्थलों में राहु ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है।
श्री नागनाथस्वामी केथु मंदिर
यह मंदिर तमिलनाडु के कीझापेरुमपल्लम में स्थित है, जो केतु ग्रह से संबंधित है। यहां भगवान शिव नागनाथ स्वामी के रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजा होती है और महाशिवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि यहां पूजा करने से केतु दोष में राहत मिलती है।
राहु-केतु मंदिर
तेलंगाना का राहु-केतु मंदिर अपने शांत और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यहां देशभर से श्रद्धालु राहु-केतु दोष निवारण के लिए विशेष अनुष्ठान कराने पहुंचते हैं। माना जाता है कि यहां पूजा करने से जीवन की बाधाएं और मानसिक तनाव कम होते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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