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Vat Savitri Vrat Puja Muhurt: वट सावित्री व्रत के दिन बरगद की पूजा कब की जाएगी? नोट कर लें पूजा का शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : May 15, 2026 11:05 am IST,  Updated : May 15, 2026 11:06 am IST

Vat Savitri Vrat Puja Muhurt: वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या को रखा जाता है। इस साल 16 मई के दिन वट सावित्री व्रत महिलाओं के द्वारा रखा जाएगा। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि पूजा के लिए इस दिन शुभ मुहूर्त कब रहेगा और राहुकाल का समय क्या होगा।

Vat Savitri Vrat- India TV Hindi
वट सावित्री व्रत Image Source : INDIA TV

Vat Savitri Vrat Puja Muhurt: वट सावित्री व्रत का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं वैवाहिक जीवन में खुशियां प्राप्त करने के लिए और जीवनसाथी की लंबी आयु के लिए रखती हैं। हर वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या के दिन यह व्रत रखा जाता है और साल 2026 में 16 मई को वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा का भी बड़ा महत्व है। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि वट सावित्री व्रत के शुभ पूजा मुहूर्त और राहुकाल के बारे में। 

शुभ पूजा मुहूर्त 2026

हिंदू पंचांग के अनुसार वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है। 

अमावस्या तिथि आरंभ- 16 मई की सुबह 5 बजकर 11 मिनट से 

अमावस्या तिथि समाप्त-  17 मई को सुबह 1 बजकर 33 मिनट पर 

  • वट वृक्ष की पूजा का शुभ समय- सुबह 06 बजकर 01 मिनट से 07 बजकर 45 मिनट तक
  • सुबह की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त- 07 बजकर 12 मिनट से 08 बजकर 23 मिनट तक। (इस दौरान भी वट वृक्ष की पूजा करना शुभ रहेगा।)
  • अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक
  • अमृत काल- दोपहर 01 बजकर 15 मिनट से दोपहर 02 बजकर 40 मिनट तक
  • सूर्यास्त के बाद की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त- शाम  07 बजकर 06 मिनट से 08 बजकर12 मिनट तक

राहुकाल का समय

  • दिल्ली- सुबह 08:54 से सुबह 10:36 तक
  • मुंबई- सुबह 09:20 से सुबह 10:57 तक
  • चंडीगढ़- सुबह 08:54 से सुबह 10:37 तक
  • लखनऊ- सुबह 08:41 से सुबह 10:22 तक
  • भोपाल- सुबह 08:58 से सुबह 10:37 तक
  • कोलकाता- सुबह 08:15 से सुबह 09:54 तक
  • अहमदाबाद- सुबह 09:17 से सुबह 10:56 तक
  • चेन्नई- सुबह 08:54 से सुबह 10:30 तक

राहुकाल का समय शहर अनुसार ऊपर दिया गया है। यह जानकारी आचार्य इंदु प्रकाश के द्वारा दी गई है। 

वट सावित्री व्रत का महत्व 

वट सावित्री व्रत सत्यवान और सवित्री से जुड़ा है और मान्यताओं के अनुसार बरगद के पेड़ के नीचे पति का शव रखकर सावित्री ने यमराज से सत्यवान के प्राण लौटाने की याचना की थी। सावित्री के अटूट प्रेम से प्रसन्न होकर यमराज ने सत्यवान के प्राण लौटाए थे और उसे दीर्घायु का वरदान दिया था। इसलिए वट सावित्री व्रत के दिन बरगद के पेड़ की पूजा करना अनिवार्य माना जाता है, ऐसा करने से वैवाहिक जीवन सुखद होता है और जीवनसाथी की आयु लंबी होती है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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