1. Hindi News
  2. धर्म
  3. Dom Raja: कौन होते हैं डोम राजा? जानें शवों को क्यों मिलती है इनके हाथों से मोक्ष

Dom Raja: कौन होते हैं डोम राजा? जानें शवों को क्यों मिलती है इनके हाथों से मोक्ष

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Jan 11, 2024 01:55 pm IST,  Updated : Jan 11, 2024 02:04 pm IST

Banaras Dom Raja: आज हम आपको बनारस के डोम राजा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें काशी में काफी ऊंचा दर्जा प्राप्त है। डोम राजा के हाथों ही शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है।

Banaras Dom Raja- India TV Hindi
Banaras Dom Raja Image Source : INDIA TV

बनारस कह लो या काशी इसका नाम सुनते ही हर किसी की आंखें चमक उठती हैं। यह एक ऐसा शहर है जो युवा से लेकर बुजुर्गों तक के दिलों में एक खास जगह बनाया हुआ है। हर कोई अपने जीवन में एक बार जरूर बनारस के दर्शन करना चाहता है। यह शहर जहां बाबा विश्वनाथ की भक्ति से भक्तिमय है वहीं अस्सी घाट की रौनक से भी गुलजार है। काशी के घाटों पर कलकल करती गंगा हर किसी के मन को एक शांति और सुकून प्रदान करती है। 

वहीं आपको बता दें कि बनारस ही एक ऐसा शहर है जहां लोग मरने की कामना करते हैं। कहा जाता है कि बनारस में अंतिम सांस लेने का अर्थ है मोक्ष की प्राप्ति। अब जहां मौत और मोक्ष का नाम आया है तो बनारस शहर के डोम राजा का नाम जरूर आएगा। कहते हैं कि डोम राजा के हाथों से ही यहां आने वाले शवों की आत्मा को मुक्ति और मोक्ष मिलता है। तो चलिए आइए जानते हैं कि डोम राजा कौन होते हैं और बनारस सहित पूरी दुनिया में उनका नाम क्यों प्रसिद्ध है।

डोम राजा कौन होते हैं? 

बनारस के अस्सी घाटों में दो घाट ऐसे हैं जहां शवदाह किया जाता है। इन दोनों घाटों का नाम है मणिकर्णिका और राजा हरिशचंद्र घाट। इन्हीं घाटों पर रहता है डोम राजा का परिवार। डोम राजा का परिवार जलती लाशों के बीच रहते हैं और इन्हीं चलती चिता की अग्नि से इनके घर का चूल्हा जलता है। इन घाटों पर अंतिम संस्कार करवाने का काम केवल डोम जाति के लोग ही करते हैं। समाज में ये अछूत जाति मानी जाती है लेकिन इन्हीं के हाथों से मृतकों को मोक्ष को प्राप्ति होती है। कुछ विद्वान डोम को शिव का स्तुति मंत्र ऊं से भी जोड़कर देखते हैं।

डोम राजा के हाथों ही क्यों मिलती है मुक्ति

प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान भोलेनाथ माता पार्वती के साथ काशी भ्रमण करने को आए। इसी दौरान जब माता पार्वती मणिकर्णिका घाट पर स्नान करने लगी तभी उनके कान का एक कुंडल गिर गया, जिसे एक कालू नामक राजा ने अपने पास रख लिया।  भगवान शिव और मां गौरी ने उस कुंडल को खोजा लेकिन नहीं मिला तब महादेव ने क्रोधित होकर कुंडल चुराने वाले को नष्ट होने का श्राप दे दिया। इस श्राप से भयभीत कालू ने तुरंत भोले शंकर और मां पार्वती से अपनी गलती की माफी मांगी। इसके बाद शिवजी ने कालू राजा को श्राप से मुक्ति देकर उसे श्मशान का राजा घोषित कर दिया। कहते हैं कि तब से ही कालू राजा और उसके वंशज श्मशान में आने वाले शवों को मुक्ति देने का काम करने लगे और इसके बदले उनसे धन लेने लगे। मान्यताओं के अनुसार, कालू राजा के वंश को ही डोम राजा कहा जाता है।

दूसरी कथा-

धार्मिक कथा के मुताबिक, राजा हरिश्चचंद्र दानी काफी दानी थे। एक बार ऋषि विश्वामित्र ने उनकी परीक्षा ली और राजा हरिश्चंद्र से उनका पूरा राजपाठ मांग ले लिया। उन्होंने पूरा राजपाठ दान में देकर पत्नी और बच्चा के साथ काशी आ गए। इसके बाद फिर से विश्वामित्र ने उनकी परीक्षा ली तब  हरिश्चचंद्र ने अपनी पत्नी बच्चा समेत खुद को भी बेच दिया। उन्होंने खुद को वाराणसी के डोम को बेचा। राजा हरिश्चंद्र ने डोम राजा के यहां चंडाल की नौकरी की। कहते हैं कि एक बार उनके बेटे को सांप ने काट लिया और उसकी मृत्यु हो गई  जब उनके पुत्र का शव हरिश्चंद्र घाट आया तो भी उन्होंने अपनी नौकरी की निष्ठा निभाते हुए पत्नी से धन मांगा था। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें-

Amavasya 2024: अमावस्या साल 2024 में कब-कब पड़ेगी? यहां जान लीजिए सही डेट और हर अमावस्या का महत्व

Ramayan Mythology Story: इतना बलशाली होने के बाद भी एक घास के तिनके से क्यों कांपता था रावण, लंका में मां सीता रखती थी अपने हाथों में

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।