बैंगलोर: रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और दिल्ली डेयरडेविल्स के बीच हुए IPL के मुकाबले में भले ही दिल्ली की टीम को हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन उसके एक खिलाड़ी के जज्बे को सभी सलाम कर रहे हैं। 2 दिन पहले ही दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाड़ी ऋषभ पंत अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हुए और शनिवार को बैंगलोर के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने 33 गेंदों पर हाफ सेंचुरी लगाई।
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पंत दिल्ली के एकलौते बल्लेबाज रहे जिसने बैंगलोर के गेंदबाजों को पसीना छुड़वा दिया। उनकी पारी के बावजूद शेन वॉटसन की कप्तानी में बैंगोलर की टीम ने मैच भले ही जीत लिया, लेकिन दिल ऋषभ पंत की जीवटता ने जीता। 158 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली की टीम 9 विकेट पर 142 रन ही बना सकी। पंत के आखिरी ओवर में आउट होते ही दिल्ली की उम्मीदों ने दम तोड़ दिया। पंत ने बैंगलोर के गेंदबाजों की धुनाई करते हुए सिर्फ 36 गेंदों में 3 चौकों और 4 छक्कों की मदद से 57 रनों की शानदार पारी खेली। ऋषभ ने इस मैच में पहली ही गेंद पर शानदार छक्का लगाया था।
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बुधवार को ऋषभ के पिता राजेंद्र पंत का उत्तराखंड के रुड़की में कार्डिएक अरेस्ट के कारण देहांत हो गया। 19 साल के पंत गुरुवार को अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे, और शुक्रवार को वह अपनी टीम के साथ जुड़ गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंत ने बाद में अपनी टीम के साथ प्रैक्टिस सेशन में भी हिस्सा लिया था। खबरें तो यह भी आई थीं कि पंत इस व्यक्तिगत क्षति के बाद IPL के कुछ मैच मिस कर सकते हैं लेकिन इस विकेटकीपर बल्लेबाज ने अपने कर्तव्य को अपने दुख पर हावी नहीं होने दिया और मैदान पर उतरने का फैसला किया।
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ऐसा ही कुछ कभी विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर के साथ भी हुआ था जब दोनों ने अपने-अपने पिता के देहांत के बाद फौरन मैदान पर उतरकर अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। दिल्ली के लिए रणजी ट्रॉफी के एक मैच के दौरान कोहली के पिता का देहांत हो गया था। कोहली पिता के अंतिम संस्कार के बाद मैच खेलने के लिए आए और अपनी टीम के लिए जरूरत के समय शानदार पारी खेली। वहीं इंग्लैंड में 1999 में खेले गए वर्ल्ड कप के दौरान सचिन के पिता का देहांत हो गया था। सचिन इसके चलते विश्व कप का एक मैच नहीं खेल पाए थे लेकिन पिता के अंतिम संस्कार के बाद वह फौरन इंग्लैंड पहुंचे और अगले ही मैच में केन्या के खिलाफ शानदार शतक लगाया था।