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जानें कैसे क्रिकेटर सिमरनजीत ने तय किया मोहली से डबलिन तक का सफ़र

 Written By: India TV Sports Desk
 Published : May 11, 2017 12:59 pm IST,  Updated : May 11, 2017 12:59 pm IST

जब ग्यारह साल पहले सिमरनजीत ने पहली बार आयरलैंड कि धरती पर कदम रखें, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ये कुछ कर भी पाएगा क्योंकि नया देश, नए लोग, नया सफर और वो सपने जिन्हें पूरा करने सिमरनजीत वहा गया था। लेकिन कहते है न की अगर...

simranjit singh- India TV Hindi
simranjit singh

चंडीगढ़: जब ग्यारह साल पहले सिमरनजीत ने पहली बार आयरलैंड कि धरती पर कदम रखें, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ये कुछ कर भी पाएगा क्योंकि नया देश, नए लोग, नया सफर और वो सपने जिन्हें पूरा करने सिमरनजीत वहा गया था। लेकिन कहते है न की अगर आपके हौंसले बुलंद हो तो कोई काम कठिन नही होता। ऐसा ही कुछ सिमरनजीत ने कर दिखाया।

इस हफ्ते आयरलैंड,बांग्लादेश और न्यूजीलैंड के बीच एक त्रिकोणीय श्रृंखला खेली जाएगी। इस श्रृंखला के लिए 30 साल के ऑलराउंडर सिमरनजीत सिंह को आयरलैंड की टीम में शमिल किया गया है।

मोहाली में अपने क्रिकेट के सपने को पूरा न कर पाने पर सिमरनजीत आयरलैंड चले गए थे। वहां उन्होंने होटल मैनेजमेंट कोर्स के लिए आवेदन किया था हालंकि उनके सपने तो कुछ और ही थे, वो तो क्रिकेट खेलना चाहते थे। छोटे ही स्तर पर लेकिन अपने सपने को पूरा करने के लिए सिमरनजीत पढ़ाई के साथ-साथ एक दुकान पर काम करना शुरु कर दिया ताकि क्रिकेट खेलने के लिए प्रति मैच फीस दे सकें। उन्हें हर मैच के लिए पांच यूरो देने पड़ते थे।

सिमरनजीत कहते है कि जहां से मैंने खेलना शुरु किया और आज मैं वही की राष्ट्रीय जर्सी पहनने में कामयाब हुआ हुँ।

सिमरनजीत के लिए घर से दूर क्रिकेट में पांव फैलाना जरुरी था। डब्लिन में जाने के एक साल बाद वह एक पेशेवर खिलाड़ी के रूप में खेलने लगे और मालाहाइड सीसी में शामिल हो गए। इसके बाद उनका घरेलू क्रिकेट जारी रहा और आख़िरकार उन्हें आयरलैंड की राष्ट्रीय टीम से बुलावा आ ही गया।

भारत में क्रिकेट खेलने के दौरान सिमरनजीत को 1999 में विजयवाड़ा में आयोजित राष्ट्रीय स्कूल गेम में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के पुरस्कार से नवाजा गया था। कुछ साल बाद ही उन्होंने पंजाब इंटर जिला अंडर -17 टूर्नामेंट में 725 रन बनाए और चयनकर्ताओं को सोचने पर मजबूर किया। लेकिन उनका सेलेक्शन अंडर-19 में नही हुआ। तब वो काफी हताश हो गए थे।

सिमरनजीत 2008 में आयरलैंड से भारत वापस आए। उस समय IPL का पहला सीज़न शुरु होने वाला था। उन्होंने किंग्स इलेवन पंजाब के ट्रायल दिया, शॉर्ट लिस्ट भी हुए लेकिन बाद में टीम में नहीं लिये गए। हताश सिमरनजीत 2009 में फिर डबलिन (आयरलैंड) लौट आए और 2012 में वायएमसीए क्रिकेट क्लब में शामिल हो गए। यहां वह अगले तीन सालों तक क्लब क्रिकेट खेलते रहे।

उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व स्पिनर सकलैन मुश्ताक़ का वीडियो देखकर स्पिन गेंदबाज़ी करनी शुरु की। इस बीच उन्होंने YMCA क्लब के लिए 56 विकेट लिये। विकेट के अलावा उन्होंने लीनस्टर सीनियर कप में 786 रन भी बनाए। अगले दो सालों में उन्होंने लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए 45 मैचों में 1608 रन बनाये और 67 विकेट लिए।

सिमरनजीत 2015 के बाद से लेइन्स्टर लाइटिंग टीम के लिए खेल रहे है और केविन ओब्रायन जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से तेंज़ बल्लेबाज़ी करने के गुर सीखे। वह इससे खुश है कि देर ही सही आखिरकार उन्हें 30 साल कि उम्र में राष्ट्रीय टीम में शामिल कर ही लिया गया।

सिमरनजीत कहते है कि जब भी वो पीछे मुड़ के देखते है तो उन्हें वह दिन याद आते हैं जब वह दिल्ली में लीग मैच में विराट कोहली और ईशांत शर्मा के साथ खेलते थे। वह चंडीगढ़ में जेपी अत्रे क्रिकेट टूर्नामेंट में धोनी और जहीर खान के साथ भी खेले हैं।

उनके पिता याद करते हैं कि कैसे सिमरनजीत कहता था कि उसे एक दिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना ही है। पिता बताते है कि जब सिमरनजीत डबलिन के लिए गए, तो वह अपनी क्रिकेट किट भी साथ में ले गए।

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