नई दिल्ली: मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने आज अपनी जिंदगी के 42 साल पूरे कर लिए। इस महान क्रिकेटर की जिंदगी का सफर शायद हर मायने में ख़ास रहा है क्योंकि इस तरह की शख़्सियत कम ही देखने को मिलती है।
सचिन का जन्म 24 अप्रैल 1973 को मुम्बई में हुआ। बचपन से ही क्रिकेट के बैट और सचिन की देस्ती यूं छनी कि बस दोनों बरसों के लिए एक दूसरे के हमसफ़र बन गए।
क्रिकेट के अखाड़े के सबसे दमदार खिलाड़ी मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर मौजूदा समय में जितने शांत, संयमित और शालीन दिखते हैं, बचपन में वे इसके ठीक विपरीत थे। वे कहते है मैं बचपन में इतना नटखट था कि मुझे संभालना मुश्किल था और मेरा सिर्फ एक सपना था कि मैं तिरंगा पहनकर भारत के लिए खेलूं सचिन कहते है कि मैं अपने भाई का अजीत का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, उन्होंने हमेशा मेरा मार्गदर्शन किया।

अपनी महानता का अंदाजा सचिन ने 9 वर्ष की आयु में ही दे दिया था जब फरवरी 1988 में उन्होंने अपने बचपन के दोस्त विनोद कांबली के साथ स्कूल स्तर के क्रिकेट में 664 रनों की विश्व रेकॉर्ड की भागीदारी निभाई थी। 23 से 25 फरवरी के बीच खेले गए इसी मैच से सचिन ने विश्व के धुरंधरों को चेतावनी दी थी कि सचिन आ रहा है।
सचिन 16 साल के थे जब टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने कदम रखा। ये वकार यूनिस का भी पहला मैच था। वकार के एक बाउंसर ने सचिन को खून से लथपथ कर दिया लेकिन 16 साल का ये बच्चा खून से सने कपडों में मैदान पर डटा रहा।
सचिन ने 24 साल के अपने टेस्ट करिअर में 200 टेस्ट खेले और 51 शतक सहित रिकार्ड 15,921 रन बनाए। इसी तरह वन डे में उन्होंने 49 शतक और 18,426 रन बनाए।
साल 2010 में साउथ-अफ्रीका के खिलाफ ग्वालियर में वनडे क्रिकेट में सबसे पहले 200 रनों का व्यक्तिगत स्कोर बनाने का रिकॉर्ड भी सचिन तेंदुलकर के नाम है।
क्रिकेट के भगवान ने जब वर्ष 1983 में कपिल देव को विश्व कप उठाते देखा तब वो 10 साल के थे तभी उन्होनें निश्चय कर लिया था कि वो भी भारत के लिए विश्व कप जीतेगें। 28 साल बाद उनका यह सपना 2011 में ही श्रीलंका को हरा पूरा हुआ। इस विश्व कप में सचिन ने 53 के शानदार औसत से 482 रन बनाए थे।

एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड सचिन रमेश तेंदुलकर के नाम ही है। सचिन ने साल 1998 में सबसे ज्यादा 9 शतकों के साथ 1894 रन बनाए। एक साल के अंदर उनसे ज्यादा रन कभी किसी बल्लेबाज़ी ने एक साल में नही बनाए।
यह महान बल्लेबाज रुका नही। टेस्ट मैच 24 साल लंबे इस सफ़र का अंत हुआ 16 नवंबर 2013 को सचिन ने अपना 200वां टेस्ट खेलने के बाद क्रिकेट को अलविदा कह दिया। देशभर में क्रिकेट प्रेमियों की आंखें नम थीं, और मानो क्रिकेट के जिस्म से उसकी रूह चली गई। आज भी सचिन किसी मैदान पर जब नज़र आते हैं। तो मैदान "सचिन" "सचिन" की गूंज से दहक उठता है।
साल 2003 विश्वकप में सचिन ने 673 रन बनाकर मैन ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब जीता था। वर्ल्डकप के इतिहास में आजतक कोई भी दूसरा खिलाड़ी इतने रन नहीं बना पाया है।