न्यायमूर्ति आर.एम. लोढा समिति के बैंक खाते फ़्रीज़ करने के निर्देश से नाराज़ BCCI ने न्यूज़ीलैंड का मौजूदा दौरा रद्द करने का फ़ैसला किया है। दौरे के तीन में से दो टेस्ट हो चुके हैं और पांच वनडे खेले जाने हैं।
बोर्ड के एक वरिष्ट अधिकारी के अनुसार बोर्ड को मजबूरन ये क़दम उठाना पड़ रहा है क्योंकि उसके हाथ बंधे हुए हैं। “हमारे पास दौरा रद्द करने के सिवाय और कोई चारा नही है क्योंकि हमारे बैंकों ने हमारे खाते फ़्रीज़ करने का फ़ैसला किया है। हम नहीं चाहते कि दुनिया के सामने भारत की बदनामी हो। हम काम कैसे कर सकते हैं, अब हम खेलों का आयोजन कैसे करें? भुगतान कौन करेगा? बैंक खाता फ़्रीज़ करना मज़ाक नहीं है। एक अंतरराष्ट्रीय टीम यहां आई हुई है और बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है।”
उधर न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा पैनल ने आज स्पष्ट किया कि उन्होंने बैंकों को बोर्ड के खाते फ्रीज करने के निर्देश नहीं दिये और वह अपने नियमित खर्चे कर सकता है। अपनी सिफारिशों को नहीं मानने से नाराज उच्चतम न्यायालय से नियुक्त लोढ़ा पैनल ने उन बैंकों को निर्देश दिये जिनमें बीसीसीआई के खाते हैं कि वे 30 सितंबर को बोर्ड की विशेष आम बैठक में लिये गये वित्तीय फैसलों के संबंध में राज्य संघों को बड़ी धनराशि का भुगतान नहीं करे। लोढ़ा ने हालांकि स्पष्ट किया, हमने बीसीसीआई के खातों पर रोक नहीं लगायी है। हमने बीसीसीआई को निर्देश दिये हैं कि वह राज्य संघों को धनराशि का भुगतान न करे। दैनिक कार्य, नित्य व्यय, मैच चलते रहने चाहिए। इसको लेकर बिल्कुल भी कोई रोक नहीं।
बीसीसीआई ने हालांकि दलील दी कि राज्य संघ मैचों का आयोजन करने के लिये बोर्ड पर निर्भर हैं और लोढ़ा पैनल के ताजा निर्देशों को देखते हुए वे अपना कामकाज नहीं कर पाएंगे जिससे न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी श्रृंखला के मैचों के लिये उनकी तैयारियां प्रभावित होंगी। बोर्ड के एक सीनियर अधिकारी ने पीटीआई से कहा, बोर्ड के सदस्य संघ अपने साथ हो रहे इस तरह के व्यवहार से दुखी हैं। वे मैचों का आयोजन के लिये बीसीसीआई से मिलने वाली धनराशि पर निर्भर हैं। अब तक सात राज्य संघों ने घरेलू सत्र के दौरान मैचों की मेजबानी करने में असमर्थता जतायी है जबकि नौ अन्य ने इस मामले में जानकारी चाही है। यदि चीजें इसी तरह से चलती रही तो श्रृंखला : न्यूजीलैंड के खिलाफ : आज शाम तक रद्द कर दी जा सकती है।
बोर्ड ने ये फ़ैसला उस दिन किया जिस दिन लोढा समिति ने बैंको को लिखकर BCCI के खाते बंद करने का आग्रह किया। समिति ने पत्र में लिखा है, “समिति को पता चला है कि 30 सितंबर 2016 को बोर्ड ने एक आपात बैठक में विभिन्न सदस्य एसोसिएशन को मोटी रकम मुहैया कराने का फ़ैसला किया है।”
पत्र में आगे लिखा है: “सुप्रीम कोर्ट को गुरुवार को स्टेटस रिपोर्ट पर सुनवाई के बाद निर्देश जारी करने हैं इसलिए आपको (बैंक) निर्देश दिया जाता है कि खाते से कोई पैसा नहीं निकलना चाहिये। इस निर्देश के उल्लंघन की स्थिति में इसकी सूचना समुचित कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट को दी जाएगी।”
पत्र में बोर्ड के सचिव अजय शिर्के, CEO राहुल जोहरी और कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी को भी संबोधित किया गया है। “आपको पता होगा कि समिति ने 31 अगस्त 2016 को निर्देश दिया था कि रोज़मर्रा के काम के अलावा भविष्य को लेकर कोई फ़ैसले न किए जाएं। एसोसिएशन को पैसा मुहैया कराना रोज़मर्रा के काम में नहीं आता और इसकी फ़ैरन कोई ज़रुरत भी नही है।
समिति इस बात से भी बेहद नाराज़ है कि बोर्ड ने उसकी सिफ़ारिशें लागू नहीं की।