नई दिल्ली: अगर आपने सलमान खान की फिल्म सुल्तान देखी होगी तो आपको उसमें अनुष्का शर्मा का आरफा वाला किरदार याद होगा, जो बताती है कि उसने कैसे समाज की धारणा को बदलने और अपने जुनून को एक मुकाम तक पहुंचाने के लिए रेसलिंग को चुना, ठीक एसी ही कहानी है हरियाणा के एक छोटे से गांव की रहने वाली बबिता कुमारी की।
ये भी पढ़े-
- चैंपियन गौरिका: 13 साल की तैराक का ओलंपिक में पहला कदम
- देखें रियो ओलंपिक में खिलाड़ी अपना वक़्त कैसे बिता रहे हैं
- Video: यूएस में दिखा UFO जैसी रहस्मयी चीज, जानिए क्या है इसका सच?...
- VIDEO: महिला भूत साथ बैठी टैक्सी में, फिर क्या हुआ देख कांप जाएंगे आप...
बबिता बताती हैं कि उनके पिता उन्हें लड़कों के साथ ट्रेनिंग करवाते थे और गलती होने पर पीटते भी थे। वहीं उन्होंने यह भी बताया कि जब वो रेसलिंग की शुरुआत कर रही थीं तो उनके परिवार वालों को लोग कहते थे कि आप ये लड़की को रेसलिंग क्यों करवा रहे हैं। लेकिन उनके पिता परिवार के लोगों की बातों की परवाह किए बगैर बबिता को ट्रेनिंग देते रहे और वह आज भारत की ओर रियो ओलंपिक में हिस्सा ले रही है।
ऐसे पिता के आंख में बसा बेटी को रेसलर बनाने का सपना
बबिता इस बारे में बताती हैं कि बचपन से ही पिता जी के आंखों में सिर्फ एक सपना सज गया था। वो कि अपनी बेटी को एक रेसलर बनाना। जो कि भारत की और से प्रतिनिधित्व करें। साथ ही गोल्ड मेड़ल जीत कर उनका और उनके देश का नाम रोशन करें। बबिता बताती हैं कि पिता ने उन्हे रेसलर बनाने के लिए तब सोचा। जब वह एक बार टीवी में कर्णम मल्लेश्वरी आ रही थी तो उन्होनें सोचा कि जब ये कर सकती हैं, तो मेरी बेटी क्यों नहीं कर सकती हैं। इसके बाद से ही उनकी रेसलिंग शुरु करा दी।
कठिन ट्रेनिंग से बनी एक सुपर रेसलर
बबिता बताती हैं कि उनके पापा स्कूल जाने से पहले सुबह 4 से 7 बजे तक बहुत ही कठिन ट्रेनिंग करवाते थे। उनकी ट्रेनिंग लड़कों के साथ कराई जाती थी। साथ ही उनके भाई भी ट्रेनिंग करते थे। समाज के लोगों की परवाह किए बगैर इनके पापा ने बबिता को इस मुकाम तक पहुंचा दिया। इतना ही नहीं बबिता कॉमनवेल्थ(2014), वर्ल्ड चैंपियनशिप (2012) में देश के लिए मेडल जीत कर अपना, देश और अपने पापा का नाम रोशन कर चुकी है।