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AI ब्राउजर का इस्तेमाल हो सकता है खतरनाक, यूज करने से पहले बरतें सावधानी

 Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
 Published : Oct 25, 2025 07:31 am IST,  Updated : Oct 25, 2025 07:38 am IST

AI ब्राउजर्स पर सवाल उठने लगे हैं। हाल में आई रिपोर्ट के मुताबिक, एआई ब्राउजर के इस्तेमाल से बड़े साइबर अटैक का खतरा है। इसकी वजह से यूजर्स की निजी जानकारियां जैसे कि बैंक डिटेल्स साइबर अपराधियों के हाथ लग सकते हैं।

AI Browser- India TV Hindi
एआई ब्राउजर है खतरनाक Image Source : UNSPLASH

ChatGPT, Google Gemini, Perplexity जैसे AI चैटबॉट्स के बाद अब एआई ब्राउजर का जमाना आ गया है। कई कंपनियां अब एआई बेस्ड इंटरनेट ब्राउजर लॉन्च कर रही हैं। गूगल ने कुछ समय पहले अपने सर्च इंजन के साथ Gemini को इंटिग्रेट किया था। इसके अलावा Perplexity भी अपना एआई ब्राउजर ला चुका है। हाल ही में ChatGPT ने भी Atlas नाम का एआई ब्राउजर उतारा है। अगर, आप भी एआई ब्राउजर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा नहीं तो आपका बैंक अकाउंट खाली हो सकता है।

एआई ब्राउजर है खतरनाक

हाल ही में कुछ साइबर एक्सपर्ट्स ने आगाह करते हुए कहा कि एआई बेस्ड वेब ब्राउजर पर तुरंत शिफ्ट करना खतरे से खाली नहीं है। खास तौर पर एआई ब्राउजर पर दिए जाने वाले इंडायरेक्ट प्रॉम्प्ट इंजेक्शन जैसी टेक्नोलॉजी के जरिए साइबर अपराधी यूजर्स के फाइल, पासवर्ड और बैंक अकाउंट डिटेल्स तक पहुंच सकते हैं। इसकी वजह से आपके साथ बड़ा फ्रॉड हो सकता है।

ब्रेव रिसर्चर्स का कहना है कि एआई आधारित ब्राउजर जैसे कि Perplexity, Comet, Fellou आदि में इंडायरेक्ट प्रॉम्प्ट इंजेक्शन का खतरा हो सकात है। इसकी वजह से वेबसाइट में छिपे हुए कमांड्स एआई को गलत निर्देश दे सकते हैं। साइबर अपराधी इसका फायदा उठाकर लोगों के साथ फ्रॉड कर सकते हैं।

साइबर अटैक का बड़ा खतरा

दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी IBM का भी मानना है कि प्रॉम्प्ट इंजेक्शन एक तरह का साइबर अटैक है, जिसमें खराब इनपुट्स को सही प्रॉम्प्ट की तरह प्रजेंट किया जा सकता है। ऐसा करने से एआई सिस्टम में मौजूद संवेदनशील जानकारियां लीक कर सकता है। ऐसा खास तौर पर और ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है, जब एआई ऐप्स के पास आपके कॉन्फिडेंशियस डॉक्यूमेंट्स या API का एक्सेस है। ऐसा करने से यह नुकसान और बड़ा हो सकता है।

ऐसे में क्या करें?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अभी इसे लेकर कोई पुख्ता समाधान नहीं मिला है। ऐसे में एआई ब्राउजर का इस्तेमाल करते समय संवेदनशील ऑपरेशन में यूजर की अनुमति होनी बेहद जरूरी है। हालांकि, OpenAI ने AgentKit टूल्स को Guardrails के सुरक्षा फ्रेमवर्क के साथ पेश किया है। इसका मुख्य मकसद एआई एजेंट्स को सुरक्षित बनाना है। हालांकि, यह प्रयास फिलहाल नाकाफी लग रहा है। इसे लेकर टेक कंपनियों को और प्रयास करने की जरूरत है, ताकि एआई ब्राउजर का इस्तेमाल पूरी तरह से सुरक्षित हो सके।

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