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ग्लोबल स्मार्टफोन की डिमांड में भारी उलटफेर, चिप की कमी ने बढ़ाई मोबाइल कंपनियों की टेंशन

 Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
 Published : Feb 27, 2026 07:15 pm IST,  Updated : Feb 27, 2026 07:15 pm IST

चिप शॉर्टेज और AI की बढ़ती डिमांड का असर ग्लोबल स्मार्टफोन शिपमेंट में पड़ने वाला है। मार्केट रिसर्च फर्म IDC ने अनुमान लगाया है कि इसमें भारी उलटफेस की संभावना है।

Global Smartphone shipments- India TV Hindi
ग्लोबल स्मार्टफोन शिपमेंट में भारी उलटफेर Image Source : UNSPLASH

ग्लोबल स्मार्टफोन शिपमेंट में भारी उलटफेर की आशंका है। साल की शुरुआत में ही IDC ने स्मार्टफोन कंपनियों की टेंशन बढ़ा दी है। AI की वजह से चिप की कमी ने मेमोरी सप्लायर्स पर भारी दबाब बनाया हुआ है। IDC की नई रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल स्मार्टफोन मार्केट में भारी गिरावट की आशंका देखने को मिल सकती है। मार्केट रिसर्च फर्म ने अनुमान लगाया है कि इस साल ग्लोबल स्मार्टफोन शिपमेंट में 12.9 प्रतिशत की साल-दर-साल गिरावट देखने को मिल सकती है।

एक दशक में सबसे बड़ी गिरावट

IDC मार्केट रिसर्च की नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में स्मार्टफोन की शिपमेंट घटकर 1.1 बिलियन यूनिट्स तक पहुंच सकती है। यह पिछले एक दशक में अब तक का सबसे लोएस्ट शिपमेंट वॉल्यूम हो सकता है। हालांकि मार्केट रिसर्च ने कहा कि 2027 के मध्य से स्मार्टफोन की डिमांड स्टेब्लाइज हो सकती है, जो कंपनियों को राहत पहुंचा सकती है।

IDC ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि चिप की कमी का सबसे ज्यादा असर चीनी ब्रांड्स पर देखने को मिलेगा। वहीं, Apple और Samsung के स्मार्टफोन की डिमांड पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इन कंपनियों ने चिप की शॉर्टेज वाली क्राइसिस को बेहतर से नेविगेट कर लिया है।

14 प्रतिशत तक महंगे होंगे स्मार्टफोन

मार्केट रिसर्च फर्म ने अनुमान लगाया है कि लो-एंड स्मार्टफोन वेंडर्स की शिपमेंट में बड़ी गिरावट देखी जा सकती है। इसके अलावा स्मार्टफोन की एवरेज सेलिंग प्वाइंट में भी 14 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिल सकता है। मेमोरी चिप की कीमत 2027 की दूसरी छमाही तक स्टेब्लाइज हो सकती है, जिसके बाद स्मार्टफोन की शिपमेंट में भी यह स्थिरता देखने को मिलेगी। 

चिप शॉर्टेज का सबसे बड़ा असर 100 डॉलर यानी 9,000 रुपये वाली प्राइस सेगमेंट के स्मार्टफोन पर पड़ने वाला है। चिप शॉर्टेज की वजह से हुए मेमोरी प्राइस हाइक के कारण यह सेगमेंट अभी इकोनोमिकल नहीं रहेगा। मिड और प्रीमियम सेगमेंट की डिमांड कम रहती है, जिसकी वजह से ओवरऑल स्मार्टफोन शिपमेंट की डिमांड पर असर देखने को मिलेगा।

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