भारत में 5G सर्विस लॉन्च हुए 4 साल पूरा होने वाला है। देश के लगभग हर जिले में 5G सर्विस पहुंच चुकी है। टेलीकॉम कंपनियां अब इसके एडवांस मॉड्यूल यानी 5G+ पर काम कर रही हैं। कई साइट्स पर इसे लाइव कर दिया गया है। वहीं, सरकार ने 6G का रोडमैप तैयार कर लिया है और पूरा फोकस स्वदेशी टेक्नोलॉजी पर रहने वाला है। पेटेंट क्रिएशन से लेकर स्पेक्ट्रम शेयरिंग तक, घरेलू टेक्नोलॉजी पर भरोसा किया जाएगा।
6G का रोडमैप
रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए नीति आयोग के तहत इंटर-मिनिस्ट्रियल कंसल्टेशन शुरू होने वाला है। 6G के लिए पॉलिसी से लेकर स्पेक्ट्रम लाइसेंसिंग और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के लिए ओपन फोरम बनाया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो इसका मकसद भारत को AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अडॉप्शन से लेकर टेक्नोलॉजी एडवांसमेंट में आगे रखना होगा।
रोडमैप में सभी मौजूदा टेक्नोलॉजी को इंटिग्रेट करके एआई बेस्ड आर्किटेक्चर के लिए 6G का स्मूद रोल आउट जरूरी है। इसके लिए अलग-अलग रेगुलेटरी बॉडी के बीच अलाइनमेंट बेहद जरूरी है। खास तौर पर दूरसंचार विभाग और नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथोराइजेशन सेंटर को साथ मिलकर काम करना होगा।
क्या हैं चुनौतियां?
6G रोल आउट में आने वाली चुनौतियों की बात करें तो सेलुलर टावर को सैटेलाइट और लो-अर्थ नेटवर्क के साथ इंटिग्रेशन जरूरी है, ताकि देश के उन क्षेत्रों में भी नेटवर्क पहुंचाई जाए, जहां अभी कोई कनेक्टिविटी नहीं है। दूरस्थ गावों से लेकर समुद्री क्षेत्रों में नेटवर्क की पहुंच जरूरी है। सरकार का प्लान है कि स्पेस-टू-अर्थ कनेक्टिविटी में AI को इंटिग्रेट करना है ताकि एडवांस अप्लिकेशन जैसे कि होलोग्राफिक कम्युनिकेशन को चलाया जा सके। साथ ही, डेटा प्रोसेसिंग, शॉर्टेज और नेटवर्क शेयरिंग को बेहतर किया जा सके।
पेटेंट फाइलिंग में भी आगे
भारत में 6G सर्विस शुरू करने के लिए भारत 6G अलायंस सेटअप किया गया है। अनुमान है कि 2030 तक भारत का 6G में 10 प्रतिशत का ग्लोबल शेयर हो सके। फिलहाल भारत का शेयर 6 से 8 प्रतिशत के बीच है। भारत के पास इस समय 6G से जुड़े 4,000 पेटेंट्स हैं और पेटेंट फाइलिंग में भारत दुनिया के टॉप 6 देशों में शामिल है।
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