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Google ने बढ़ाई Zee5 और Hotstar जैसी OTT कंपनियों की टेंशन, आपको भी सब्सक्रिप्शन लेने में आ सकती है परेशानी

 Written By: Sachin Chaturvedi
 Published : Aug 22, 2023 03:01 pm IST,  Updated : Aug 22, 2023 03:11 pm IST

गूगल ने अपनी इन—ऐप पेमेंट पॉलिसी में बदलाव किया है, जिससे देश में जी5 या वूट से लेकर कई रीजनल ओटीटी एप्स के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।

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Google Play Store Image Source : FILE

अगर आप भी Zee5 और Hotstar जैसी OTT एप्स के शौकीन हैं, तो यह अपडेट आपके लिए है। गूगल ने अपने प्लेस्टोर की पॉलिसी में बदलाव किया है, जिसकी वजह से डिज़्नी+ हॉटस्टार, ज़ी5 और वूट जैसे प्लेटफार्म की टेंशन बढ़ गई है। गूगल ने इन ओटीटी एप्स के लिए इन-ऐप पेमेंट की पॉलिसी में बदलाव किया है। इस बदलाव के चलते अब यूजर्स को वेबसाइट पर जाकर पेमेंट करना होगा। घरेलू ओटीटी एप्स के अनुसार उनके ग्राहक न केवल एंड्रॉइड यूजर्स हैं, बल्कि ऐसे व्यक्ति भी शामिल हैं जो तकनीक के प्रति जागरूक नहीं हैं, और इन-ऐप शॉपिंग बंद होने उन्हें सब्सक्रिप्शन लेने में न सिर्फ मुश्किल आएगी, वहीं फ्रॉड की भी संभावना है। 

इन ओटीटी एप्स का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय डिजिटल मीडिया उद्योग फाउंडेशन (आईडीएमआईएफ) ने Google की ऐप स्टोर बिलिंग पॉलिसी के खिलाफ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) का रुख किया है। इन ओटीटी कंपनियों ने इस प्रक्रिया में छोटे एप्स के लिए जोखिमों पर चिंता जताई है। कंपनियों का कहना है कि छोटे एप्स वित्तीय रूस से कमजोर हैं और उनके पास इस बदलाव को देखते हुए संसाधनों की भी कमी है।

गूगल की पॉलिसी बदलाव से पेश आने वाली मुश्किलों का सामना अन्य वैश्विक खिलाड़ियों को भी करना पड़ रहा है। उदाहरण के लिए, अमेजन के स्वामित्व वाली ऑडियो सेवा, ऑडिबल, भारत में इन-ऐप सामग्री खरीदारी की अनुमति नहीं देती है।

नेटफ्लिक्स या अमेज़ॅन प्राइम वीडियो के ज्यादातर यूजर्स बड़े शहरों से हैं या फिर उच्च मध्यमवर्ग से हैं। जो दूसरी वेबसाइटों पर जाकर भुगतान कर सकते हैं। दूसरी ओर, छोटे ऐप्स के मामले में, उपयोगकर्ताओं को धोखाधड़ी का डर हो सकता है।

कंपनियों का कहना है कि ग्राहक फिलहाल भुगतान विकल्पों के साथ सहज नहीं है, इसके अलावा कंपनियों को भी टेक्नोलॉजी में बदलाव करने में थोड़ा समय लगेगा। कंपनियों के मुताबिक यहां एक परेशानी और भी है। Google इन-ऐप मुख्य रूप से क्रेडिट कार्ड का समर्थन करता है, लेकिन भारत में उपयोगकर्ता वॉलेट, यूनिफाइड पेमेंट इंटरफ़ेस या इंटरनेट बैंकिंग पसंद करते हैं।

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