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मऊ: पुलिस की पिटाई से महिला का गर्भपात, 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Aug 01, 2025 07:06 pm IST,  Updated : Aug 01, 2025 07:06 pm IST

असली विवाद सरकारी नाली और खड़ंजा को लेकर था, लेकिन 20 पुलिसकर्मी पीड़िता के घर घुस आए और पूरे परिवार को थाने ले जाकर पीटा। इस बीच उन पर खाली स्टांप पर साइन करने का दबाव भी बनाया।

Police- India TV Hindi
पीड़िता को जबरन थाने ले जाती पुलिस Image Source : REPORTER INPUT

उत्तर प्रदेश के मऊ में पुलिसकर्मियों पर एक परिवार के लोगों को जबरन पीटने के आरोप लगे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस की पिटाई के चलते एक महिला का गर्भपात भी हो गया। पीड़िता की शिकायत पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। मामला मऊ जिले के सरायलखंसी थाने का है। यहां पुलिस पर एक महिला के गर्भपात, उसके परिवार की पिटाई, अपमान और जबरन फर्जी मुकदमे में फंसाने के सनसनीखेज आरोप लगे हैं।

पीड़िता की शिकायत पर सीजेएम कोर्ट ने सरायलखंसी थाने के तत्कालीन थाना अध्यक्ष शैलेश सिंह सहित कुल 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दे दिया है। इस मामले को लेकर ताजपुर उस्मानपुर गांव की रीता देवी ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। इसके बाद पुलिसकर्मियों पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया गया है।

नाली और खड़ंजा को लेकर था विवाद

रीता देवी के अधिवक्ता प्रमोद कुमार शर्मा ने बताया कि पीड़िता का अपने पड़ोसी रामभवन यादव और श्रीकांत यादव से सरकारी नाली और खड़ंजा को लेकर विवाद चल रहा था। रीता ने इस मामले की लिखित शिकायत जिलाधिकारी से की, जिसमें जांच के बाद आरोप सही पाए गए। इसी बीच आरोपी पड़ोसी रामभवन यादव के रिश्तेदार और तत्कालीन चौकी प्रभारी केसर यादव ने पीड़िता और उसके परिवार को लगातार धमकी देना शुरू कर दिया।

20 पुलिसकर्मियों ने की बदसलूकी

23 मार्च 2025 की दिन में ही हालात भयावह हो गए। रीता देवी का आरोप है कि लगभग 20 पुलिसकर्मी उसके पड़ोसी के छत से कुर्सी लगाकर उनके घर में जबरन घुसे, छत फांदकर अंदर आए, दरवाजा तोड़ा और उसके बच्चों को बेरहमी से पीटा गया। अश्लील गालियां दी गईं, बेटी के साथ अभद्रता की गई और पूरे गांव में घसीटते हुए थाने ले जाया गया। इस घटना के वीडियो भी सामने आए हैं। आरोपी के अनुसार पुलिस ने न केवल पीड़िता और उसके परिजनों से जबरन खाली स्टांप पेपर पर दस्तखत करवाने की कोशिश की, बल्कि विरोध करने पर फिर से थाने में पिटाई की गई। इस बीच पीड़ित को जेल भेजने की कार्रवाई के दौरान अमानवीय मारपीट से पीड़िता का गर्भपात हो गया। हालत बिगड़ने पर उसे पहले जिला अस्पताल और फिर बीएचयू रेफर किया गया।

पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप

शुरुआत में जिला प्रशासन ने आरोपियों के प्रभाव में आकर मामले को दबाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस अधीक्षक ने मामले की गहराई से जांच कराई। जांच में सरायलखंसी पुलिस की भूमिका संदिग्ध पाई गई और एकतरफा कार्रवाई की पुष्टि हुई। इसके बाद कोर्ट में दाखिल याचिका के आधार पर अब न्यायालय ने 20 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया गया है।

इन पुलिसकर्मियों पर बदसलूकी का आरोप

शैलेश सिंह, तत्कालीन थानाध्यक्ष

काशीनाथ चंदेल, एसआई
केसर यादव, तत्कालीन चौकी प्रभारी पिपरीडीह
विक्की कुमार, एसआई
कोमल कसौधन, एसआई
प्रभाकर सिंह, हेड कांस्टेबल
जयप्रकाश गोंड, सिपाही
अनुराग पाल, सिपाही
उत्तम मिश्रा, महिला सिपाही
मनीष यादव, सिपाही
ऊषा जायसवाल, महिला होमगार्ड
दुर्गविजय यादव, होमगार्ड
अन्य 6-7 अज्ञात पुलिसकर्मी

(मऊ से राकेश की रिपोर्ट)

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