ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कानूनी मुश्किलों में घिर गए हैं। प्रयागराज पुलिस ने उनके और उनके करीबियों के खिलाफ यौन शोषण जैसे संगीन आरोपों में FIR दर्ज की है। पुलिस ने यह कार्रवाई सात अलग-अलग धाराओं के तहत की है, जिनमें 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। कानून के जानकार कहते हैं कि इनमें अंतरिम जमानत होना मुश्किल है।
FIR अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुन्दानंद ब्रह्मचारी और 2-3 अज्ञात लोगों के खिलाफ हुई है। यह मुकदमा आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य) और दो नाबालिगों की शिकायत पर दर्ज किया गया है। मामला नाबालिगों के यौन शोषण से जुड़ा है, जिसके कारण इसमें पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
वाराणसी के केदारघाट में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का श्रीविधा मठ है, जहां करीब 200 बटुक शिक्षा ग्रहण करते हैं। मठ में आज सुबह से ही काफी हलचल है, ये सुनकर कि प्रयागराज पुलिस आ सकती है। शंकराचार्य के शिष्य मठ आ रहे हैं। कई महिलाएं रो रही हैं, उनका कहना है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को फर्जी फंसाया गया है। मठ में चारो तरफ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के साथ फोटो लगी हैं।
वहीं, अपने ऊपर लगे आरोप पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का कहना है, "हमलोग निश्चिंत हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जो पुलिस आ रही है, वह आए और हम जांच के लिए तैयार हैं।" उन्होंने कहा, "माघ मेले में तो इतने CCTV कैमरे लगे थे। वहां पर मीडिया थी। ऐसा कैसे हो सकता है। जो शिकायत कर रहा है, वो हिस्ट्रीशीटर है। कोर्ट भी उसी का सुन रहा है, शंकराचार्य की नहीं सुनी जा रही है।"
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, "प्रयागराज में तो चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। गुरुकुल में कभी वो लड़के पढ़े ही नहीं, बच्चे क्या सीडी बना रहे थे। सिर्फ अखिलेश यादव नहीं बाकी सब कह रहे हैं कि मेरे साथ गलत हो रहा है। मैं बैठा हूं, पुलिस को पूरा सहयोग करूंगा।"
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