Amazing Facts : भारतीय मिठाइयों में रसमलाई का नाम लेते ही मुंह में पानी आ जाता है। लेकिन जब बात अंगूरी रसमलाई और केसरिया रसमलाई की आती है, तो स्वाद, दिखावट और बनावट में सूक्ष्म लेकिन रोचक अंतर सामने आता है। दोनों ही बंगाली मिठाई की वैरिएंट हैं, फिर भी इनके नाम, आकार और फ्लेवर से जुड़े राज सुनकर आपकी जेब में पानी नहीं, बल्कि लार टपकने लगेगी।
अंगूरी रसमलाई क्या होती है
अंगूरी रसमलाई को अंगूर जैसी छोटी-छोटी रसमलाई कहते हैं। इसमें छेना के गोले बहुत छोटे, अंगूर के दाने के आकार के होते हैं। ये छोटे होने के कारण ज्यादा स्पंजी, नरम और रस में अच्छी तरह सोख लेते हैं। एक-एक कौर में पूरा स्वाद आ जाता है। इसलिए पार्टी, शादी या मेहमानों के लिए इन्हें पसंद किया जाता है क्योंकि इन्हें मुंह में डालना आसान और बाइट-साइज होता है।
केसरिया रसमलाई क्या होती है
गौरतलब है कि, केसरिया रसमलाईमुख्य रूप से रंग और सुगंध पर फोकस करती है। इसमें केसर के धागे डाले जाते हैं, जिससे पूरी मिठाई का रंग सुनहरा-पीला और खुशबू अनोखी हो जाती है। केसर दूध की रबड़ी को न सिर्फ रंग देता है बल्कि हल्का स्वादिष्ट स्वाद भी। केसरिया रसमलाई में छेना के गोले सामान्य आकार के या कभी-कभी अंगूरी स्टाइल के भी हो सकते हैं, लेकिन मुख्य आकर्षण केसर की सुनहरी चमक और सुगंध है। आमतौर पर केसरिया रसलाई छोटी गोलियों में न होकर उससे काफी बड़े साइज की होती हैं।
अंगूरी और केसरिया रसमलाई में अंतर
अंगूरी और केसरिया रसमलाई में स्वाद और बनावट का भी फर्क है। अंगूरी रसमलाई में फोकस छोटे आकार और हल्की मिठास पर होता है, जबकि केसरिया में केसर और इलायची का कॉम्बिनेशन इसे राजसी और सुगंधित बना देता है। दोनों में रबड़ी (गाढ़ा दूध) कॉमन है, जिसमें ड्राई फ्रूट्स (बादाम, पिस्ता) डाले जाते हैं, लेकिन केसरिया में केसर के कारण रबड़ी का रंग और टेस्ट ज्यादा रिच लगता है। दिलचस्प बात यह है कि कई हलवाई अंगूरी रसमलाई को भी केसरिया स्टाइल में बनाते हैं, यानी छोटी अंगूरी रसमलाई पर केसर वाली रबड़ी डाल देते हैं। इसे केसरी अंगूरी रसमलाई कहते हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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