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बदलाव की आहट: बंगाल में जब मंदिर को कब्जाकर बना था TMC का कार्यालय, अब सरकार बदलते ही शुरू हुई पूजा-अर्चना

 Edited By: Dhyanendra Chauhan
 Published : May 10, 2026 07:19 pm IST,  Updated : May 10, 2026 09:28 pm IST

लंबे अरसे बाद मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है। लोगों ने इलाके में शरबत बांट कर खुशी जाहिर की है।

मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू होने के बाद खुशी का माहौल- India TV Hindi
मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू होने के बाद खुशी का माहौल Image Source : REPORTER INPUT

पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही बदलाव भी शुरू हो गया है। बंगाल के बीरमूम जिले में लगभग साल 1990 में स्थापित श्री श्री राधा गोविंद मंदिर लंबे समय से क्षेत्र के लोगों की आस्था और श्रद्धा का केंद्र रहा है। यह मंदिर बीरभूम जिले के रामपुरहाट नगरपालिका के वार्ड संख्या 15 में स्थित है। स्थानीय लोगों ने सामूहिक प्रयास और चंदा एकत्र कर इस मंदिर की स्थापना की थी, ताकि इलाके के सभी लोग एक साथ पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग ले सकें। स्थापना के बाद से मंदिर की सभी गतिविधियां सुचारु रूप से चल रही थीं।

मंदिर में ही खोल लिया था TMC कार्यालय

बाद में मंदिर के पास एक भोगघर के निर्माण का कार्य शुरू किया गया। आरोप है कि उसी दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ दुष्कर्मियों ने निर्माण कार्य रुकवा दिया। इसके बाद कथित तौर पर उस भोगघर पर कब्जा कर वहां तृणमूल कांग्रेस का पार्टी कार्यालय बना दिया गया। 

लोगों में इसको लेकर था आक्रोश

मंदिर के भोगघर पर कब्जा होने से इलाके में भारी नाराजगी और असंतोष फैल गया। लंबे समय से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच इस मुद्दे को लेकर दबा हुआ आक्रोश बना हुआ था।

कब्जामुक्त कराकर मंदिर समिति को सौंपा गया

आखिरकार भाजपा की पहल पर उस भोगघर को कब्जामुक्त कराकर दोबारा मंदिर समिति को सौंप दिया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में मंदिर समिति के सदस्य और पदाधिकारी मौजूद रहे। साथ ही भाजपा के रामपुरहाट शहर अध्यक्ष अर्पण नाग, जीएस विमान साहा समेत अन्य नेता भी उपस्थित थे।

स्थानीय श्रद्धालुओं और लोगों में खुशी

स्थानीय निवासियों का कहना है कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। राजनीतिक उद्देश्यों के लिए मंदिर की संपत्ति का उपयोग कभी नहीं किया जाना चाहिए। भोगघर वापस मिलने से स्थानीय श्रद्धालु और निवासी काफी खुश हैं। मंदिर समिति के सदस्यों ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में मंदिर के विकास और धार्मिक गतिविधियों को और बड़े स्तर पर संचालित किया जाएगा।

बिज्जू मंडल की रिपोर्ट

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