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ममता के करीबी पूर्व DCP शांतनु सिन्हा बिस्वास गिरफ्तार, पहले लुकआउट नोटिस हुआ था जारी

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : May 14, 2026 12:34 pm IST,  Updated : May 14, 2026 12:40 pm IST

हाल ही में ईडी ने शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था। शांतनु सिन्हा बिस्वास को टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी का बेहद खास माना जाता है।

कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास- India TV Hindi
कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास Image Source : SOCIAL MEDIA/X

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासी हवा बदलते ही प्रशासन में बड़ी कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर (DCP) शांतनु सिन्हा बिस्वास को आज गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर पद का दुरुपयोग कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पक्ष में काम करने और करोड़ों के घोटालों में शामिल होने के आरोप हैं।

जारी हुआ था लुकआउट नोटिस

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाल ही में शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था। इससे पहले एजेंसी उन्हें पांच बार समन भेज चुकी थी, लेकिन उन्होंने हर बार जांच में सहयोग करने से इंकार कर दिया और पेश नहीं हुए। 28 अप्रैल को भी उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जिसके बाद आज यह बड़ी कार्रवाई हुई है। बिस्वास के दोनों बेटों, सयंतन और मनीष को भी ईडी ने तलब किया था, लेकिन वे भी पिता की तरह पेश नहीं हुए।

शांतनु सिन्हा बिस्वास को टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी का बेहद खास माना जाता है। हाल ही में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान वे ममता बनर्जी के साथ मंच पर नजर आए थे, जिस पर काफी विवाद हुआ था। हालांकि, टीएमसी ने सफाई दी थी कि वे सुरक्षा कारणों से वहां तैनात थे।

शांतनु सिन्हा बिस्वास केवल एक अधिकारी नहीं थे, बल्कि वे पश्चिम बंगाल और कोलकाता पुलिस कल्याण समिति के मुख्य समन्वयक और नोडल अधिकारी के तौर पर भी प्रभावशाली भूमिका निभा रहे थे। लुकआउट जारी होने से पहले ED ने उनके बालीगंज और गोलपार्क स्थित दो ठिकानों पर छापेमारी की थी। एक अप्रैल को हुई छापेमारी में 1.47 लाख रुपये नकद, 67.64 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण और एक देसी पिस्तौल बरामद की गई थी।

क्या है 'सोना पप्पू' कनेक्शन?

शांतनु सिन्हा की गिरफ्तारी के पीछे की असली वजह एक शातिर अपराधी और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है। जांच में सामने आया है कि बिस्वास के तार बिस्वजीत पोद्दार उर्फ 'सोना पप्पू' नाम के एक अपराधी से जुड़े हुए थे। सोना पप्पू पर हत्या के प्रयास और रंगदारी के दर्जनों मामले दर्ज हैं। आरोप है कि शांतनु ने अपने पद का इस्तेमाल कर सोना पप्पू के अवैध कारोबार को संरक्षण दिया और बदले में करोड़ों की काली कमाई की।

रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जब जांच आगे बढ़ी, तो ED की टीम ने शांतनु के बालीगंज और गोलपार्क स्थित ठिकानों पर छापेमारी की। इसी जांच में एक कारोबारी जॉय कामदार का नाम भी सामने आया, जिसके जरिए पैसों को इधर-उधर किया जाता था।

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