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West Bengal Assembly Elections 2026: इस बार कालचीनी सीट पर किसकी होगी जीत, क्या है सियासी समीकरण?

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Mar 02, 2026 02:55 pm IST,  Updated : Mar 03, 2026 11:11 am IST

Kalchini Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल की कालचीनी विधानसभा सीट पर 2021 के चुनाव में बीजेपी ने अपना दबदबा कायम किया था।

कालचीनी विधानसभा चुनाव 2026- India TV Hindi
कालचीनी विधानसभा चुनाव 2026 Image Source : INDIA TV

Kalchini Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में स्थित कालचीनी विधानसभा क्षेत्र राज्य की 294 सीटों में से एक अहम निर्वाचन क्षेत्र है। चाय बागानों की हरियाली और जनजातीय समुदायों की बहुलता वाले इस क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी ने अपना दबदबा कायम किया। 

2021 के चुनाव में यहां बीजेपी प्रत्याशी बिशाल लामा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 1,03,104 वोट हासिल किए और जीत दर्ज की। उन्होंने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के उम्मीदवार पासांग लामा को पराजित किया, जिन्हें 74,528 वोट मिले थे। बिशाल लामा ने 28,576 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। अन्य उम्मीदवारों में कांग्रेस के अभिजीत नरजिनरी तीसरे स्थान पर रहे, जबकि नोटा (NOTA) का विकल्प चुनने वाले मतदाताओं की संख्या भी 2,300 से अधिक रही।

2021 के चुनाव परिणाम

  • बिशाल लामा (BJP): 103,104 वोट (52.65%)
  • पासंग लामा (TMC): 74,528 वोट (38.06 %)
  • अविजित नरजिनरी (कांग्रेस): 5,482 वोट (2.80 %)

2016 के चुनाव परिणाम

  • विल्सन चंपामारी (TMC): 62,061 वोट (34.99 %)
  • बिशाल लामा (BJP): 60,550 वोट (34.14 %)
  • अविजित नरजिनरी (कांग्रेस): 14,220 वोट (8.02 %)

कालचीनी सीट का समीकरण

कालचीनी के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो यहां लंबे समय तक कांग्रेस और वामपंथी दलों (विशेषकर RSP) का प्रभाव रहा है। आजादी के बाद से कई दशकों तक कांग्रेस के डेनिस लाकड़ा यहां के सबसे प्रमुख चेहरे रहे। इसके बाद 1980 के दशक से RSP के मनोहर तिर्की ने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि, 2009 और 2011 के दौर में समीकरण बदले जब विल्सन चंपामारी ने पहले निर्दलीय (गोरखा जनमुक्ति मोर्चा समर्थित) और फिर तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की। 2016 में भी विल्सन चंपामारी यहां से विजयी रहे थे, लेकिन 2021 की उत्तर बंगाल लहर में यह सीट बीजेपी के खाते में चली गई।

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