राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पश्चिम बंगाल में संदेशखाली मामले की मौके पर पहुंचकर की गई जांच में ‘‘अत्याचार की कई घटनाओं’’ को चिह्नित किया और कहा कि यह इंगित करता है कि ऐसी घटनाओं की रोकथाम में की गई ‘‘लापरवाही’’ के कारण ‘‘मानवाधिकारों का उल्लंघन’’ हुआ। एनएचआरसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि महिलाओं के साथ-साथ बच्चों और वृद्धों की सुरक्षा भी खतरे में डाल दी गई। इसके चलते महिलाओं को अपना घर और इलाका छोड़ना पड़ा क्योंकि यातना और यौन शोषण जैसे अपराध बड़े पैमाने पर मंडरा रहे थे।
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NHRC को फरवरी में मिली थी रिपोर्ट
एनएचआरसी को 21.02.2024 की एक समाचार रिपोर्ट मिली जिसमें कहा गया था कि पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना स्थित संदेशखाली में मासूम और गरीब महिलाओं को एक ग्रुप के द्वारा परेशान किया गया और उनका यौन उत्पीड़न किया गया। इसके पीछे एक राजनीतिक व्यक्ति का लोकल गैंग है, जिसके चलते पिछले कुछ दिनों से लोकल ग्रामीणों ने उचित कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। लेकिन इस तरह के गुंडों और असामाजिक तत्वों द्वारा किए गए भयानक अपराधों के अपराधी तत्वों के खिलाफ स्थानीय प्रशासन कोई उचित कानूनी कार्रवाई करने में विफल रहा।
"बच्चों और वृद्धों की सुरक्षा भी खतरे में डाली गई"
NHRC की रिपोर्ट में बताया गया कि सुरक्षा और महिलाओं के साथ-साथ बच्चों और वृद्धों की सुरक्षा भी ख़तरे में डाली गई थी। इसके चलते महिलाओं को अपना घर और इलाका छोड़ना पड़ा क्योंकि यातनाएं और यौन शोषण जैसे अपराध बड़े पैमाने पर हो रहे थे। इसके बाद आयोग ने दिनांक 21.02.2024 की कार्रवाई के आदेश दिए। मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ने राज्य सरकार को नोटिस दिया और पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा के संबंध में रिपोर्ट मांगी। इसके अलावा संदेशखाली में की गई कार्रवाई या अपराध करने वालों के खिलाफ सुरक्षा और अन्य कदम उठाने का प्रस्ताव दिया गया।
एनएचआरसी ने की ये सिफारिशें
एनएचआरसी की इस रिपोर्ट में संदेशखाली के पीड़ितों में आत्मविश्वास को प्रेरित करने के लिए सुधारात्मक उपाय किए जाने का भी प्रस्ताव किया गया। संदेशखाली में महिलाओं सहित स्थानीय लोगों के बीच समन्वय बने। हिंसा के पीड़ितों को मुआवजा भुगतान किया गया या दिया जाना है, इसकी भी सिफारिश की गई। एनएचआरसी ने आयोग के सदस्य से यह भी अनुरोध किया कि मानव हिंसा की घटनाओं की स्थलीय जांच कर तथ्यों का पता लगाएं।
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