कोलकाता के उत्तरी हिस्से में स्थित मानिकतला, सामान्य श्रेणी का विधानसभा चुनाव क्षेत्र है। यह सीट 1951 में बनी थी और तब से लेकर इस सीट पर 18 विधानसभा चुनाव और 2024 में उपचुनाव हुए हैं। मानिकतला सीट लेफ्ट का गढ़ मानी जाती है जहां से लेफ्ट पार्टियों ने 12 बार चुनाव में जीत हासिल की है, जिसमें सीपीआईI ने 10 बार और CPI(M) ने दो बार जीत दर्ज की है। साल 1952 से 1991 तक लगातार 11 बार इस सीट पर लेफ्ट का दबदबा रहा, उनकी आखिरी जीत 2006 में हुई थी और उसके बीच साल 1996 में कांग्रेस सिर्फ़ एक बार ही ये सीट जीत पाई थी। उसके बाद दौर आया तृणमूल कांग्रेस का, जिसने इस सीट पर साल 2011 से लगातार चार टर्म सहित पांच बार जीत हासिल की है। टीएमसी ने मानिकतला से अपनी पहली जीत 2001 में दर्ज की, जब मौजूदा कांग्रेस विधायक परेश पॉल ममता बनर्जी की नई बनी तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
मानिकतला में कैसा है चुनावी समीकरण
2011 में, तृणमूल कांग्रेस के सुधन पांडे ने CPI(M) की मौजूदा MLA रूपा बागची को 36,550 वोटों से हराया था और फिर पांडे ने 2016 में CPI(M) के राजीब मजूमदार को 25,311 वोटों से हराकर सीट बरकरार रखी थी। 2021 में CPI(M) ने रूपा बागची को फिर से मैदान में उतारा, लेकिन भाजपा के मुख्य चैलेंजर के तौर पर उभरने के साथ, CPI(M) तीसरे नंबर पर खिसक गई, उसे भाजपा के 35.60 परसेंट और तृणमूल के 50.82 परसेंट वोटों के मुकाबले सिर्फ 10.16 परसेंट वोट मिले थे। साल 2022 में सुधन पांडे की मौत के बाद 2024 में उपचुनाव हुआ, जो तब तक टल गया जब तक कलकत्ता हाई कोर्ट ने भाजपा कैंडिडेट कल्याण चौबे की 2021 के नतीजे को चुनौती देने वाली अर्जी खारिज नहीं कर दी। फिर इसके बाद जब उपचुनाव हुआ, तो सुधन पांडे की विधवा पत्नी, सुप्ती पांडे, ने भाजपा के कल्याण चौबे को वोटों के बड़े अंतर से हराया था।
मानिकतला में वोटरों की संख्या
मानिकतला में 2021 और 2024 के बीच रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या में कमी आई। यहां वोटरों की संख्या 2,11,214 से घटकर 2,10,464 हो गई। 2019 में, यह संख्या 201,688 थी। मानिकतला में 2024 के चुनाव में वोटिंग 68.53 परसेंट रही, जो 2021 के 62.99 परसेंट (हाल के सालों में सबसे कम) से बढ़कर 2011 में 72.97 परसेंट पर पहुंच गई थी। इससे पहले साल 2016 के चुनाव में यह 69.70 परसेंट और 2019 में 70.59 परसेंट थी।
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