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कनाडा की पुलिस ने निकाल दी पूर्व ट्रूडो सरकार की हवा, कहा- 'नहीं है भारत जुड़े अपराध का कोई सबूत'

 Published : Mar 20, 2026 01:10 pm IST,  Updated : Mar 20, 2026 01:10 pm IST

कनाडा और भारत के बीच रिश्तों में तनाव का जो दौर पूर्व ट्रूडो सरकार के समय शुरू हुआ था वह अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। इस बीच रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस के प्रमुख ने बड़ी बात कही है। चलिए जानते हैं कि हुआ क्या है।

Royal Canadian Mounted Police- India TV Hindi
Royal Canadian Mounted Police Image Source : AP

टोरंटो: रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के प्रमुख ने भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है। पुलिस प्रमुख ने कहा है कि उनके पास जो मौजूदा जानकारी है उसके अनुसार कनाडा में इस तरह की कोई गतिविधियां नहीं चल रही हैं जिसके तार भारत से जुड़े हों। CTV न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में RCMP कमिश्नर माइक डुहेम से पूछा गया कि क्या उनकी एजेंसी भारत के एजेंटों द्वारा किए जा रहे कार्यों को लेकर चिंतित है। उन्होंने जवाब दिया, "हमारे पास जो फाइलें हैं जिनमें अंतरराष्ट्रीय दमन की बात है, उनमें हमें अभी किसी भी विदेशी संस्था से कोई संबंध नहीं दिख रहा है, यह बात हमारे पास मौजूद आपराधिक जानकारी और चल रही जांचों पर आधारित है।"

डुहेम ने क्या कहा?

चैनल की ओर से जारी किए गए इंटरव्यू के एक अंश के अनुसार, होस्ट ने इस मामले पर कई बार जोर देकर सवाल पूछे। जब पूछा गया कि क्या भारतीय एजेंट सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं, तो डुहेम ने कहा, "मैं यह कह रहा हूं कि विदेशी दखल या अंतरराष्ट्रीय दमन से जुड़ी हमारे पास मौजूद सभी फाइलों को देखते हुए, हमारे पास जो जानकारी है, उसके अनुसार कुछ लोग दूसरों को डरा-धमका रहे हैं, परेशान कर रहे हैं, लेकिन इन घटनाओं को किसी विदेशी संस्था से जोड़ने वाले सबूत 'चाहे वह कोई भी देश हो' हमारे पास नहीं हैं।"

डुहेम ने पहले क्या कहा था?

डुहेम ने स्पष्ट किया कि 2024 में दिए गए उनके पिछले बयान उस समय चल रही आपराधिक जांच पर आधारित थे। डुहेम ने कहा कि उस समय उस विशेष फाइल में...हां, मैंने कहा था कि सरकार (भारत) के एजेंट या प्रॉक्सी शामिल थे। लेकिन अंतरराष्ट्रीय दमन के मामलों में कई बार किसी विशिष्ट विदेशी संस्था के साथ सीधे संबंध स्थापित करना बहुत मुश्किल होता है। 

कैसे शुरू हुआ था विवाद?

डुहेम का यह बयान भारत और कनाडा के बीच पिछले कुछ समय से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव के बाद आया है। विवाद की शुरुआत सितंबर 2023 में हुई, जब तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया कि कनाडाई सिख नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंट्स शामिल थे। भारत सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया और उन्हें बेबुनियाद बताया। 2024 में कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने भी आरोप लगाया कि कनाडा में तैनात कुछ भारतीय राजनयिक हत्या समेत गंभीर आपराधिक गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं। इसके जवाब में कनाडा ने एक उच्चायुक्त सहित छह भारतीय राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। भारत ने भी समान कदम उठाते हुए छह कनाडाई राजनयिकों को देश से बाहर कर दिया था। इस घटना से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए थे।

भारत-कनाडा के बीच संबंध सुधार के प्रयास

अब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी हैं। उन्होंने सत्ता संभालते ही भारत के साथ बिगड़े रिश्तों को सुधारने पर जोर दिया। हालांकि, कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी तत्वों की ओर से उन्हें लगातार आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद, प्रधानमंत्री कार्नी और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल जून से अब तक 3 बार मिल चुके हैं। पिछले साल दोनों देशों ने संबंध सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाए और एक-दूसरे के देशों में नए उच्चायुक्त नियुक्त किए हैं। हालांकि, तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हाल ही में कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS ने अपनी रिपोर्ट में भारत को अभी भी 'विदेशी हस्तक्षेप और जासूसी' के प्रमुख स्रोतों में शामिल किया है।

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