नुसेरात (गाजा पट्टी): गाजा पट्टी में फिलस्तीनियों के लिए मौत से ज्यादा कष्टकारी उनकी भूख हो गई है। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि खाद्यान्न वितरण स्थलों पर भोजन बंटने के दौरान भूखे लोग चीते की तरह टूट पड़े। इससे अराजकता की स्थिति पैदा हो गई। भीड़ को हटाना एजेंसियों के लिए मुश्किल हो गया। इसके बाद लोगों में मारपीट और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इसके बाद इजरायली सेना ने फायरिंग शुरू कर दी। आईडीएफ का दावा है कि उसने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलियां चलाईं। विदेशी मीडिया का दावा है कि इस दौरान 2 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल समर्थित एक नए फाउंडेशन द्वारा संचालित खाद्य वितरण केंद्रों पर बृहस्पतिवार को लोग के भोजन लेने को जुटे थे। इसी दौरान दोबारा अराजकता फैल गई। कई प्रत्यक्षदशियों ने बताया कि भोजन एक दूसरे से छीनने के लिए लोगों के बीच धक्का-मुक्की होने लगी। लिहाजा इजरायली सैनिकों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गोलियां चलाना शुरू कर दिया। मध्य गाजा में, एसोसिएटेड प्रेस वीडियो में बम से एक वितरण केंद्र के चारों ओर हवा में धुआं फैलता दिखा, और एक इजरायली टैंक के पास से गुजरने पर गोलियों की आवाज सुनाई दी।
गाजा में भूख से बिलखते कई लोगों को भोजन तो नहीं नसीब हुआ, लेकिन उनके हिस्से में मौत आ गई। जबकि ज्यादातर भीड़ अपनी जान बचाकर भागने में कामयाब रही। कई लोग भगदड़ के दौरान भी जख्मी हो गए। काफी लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा। बैसाखी पर निर्भर महमूद इस्माइल ने कहा, ‘‘मैं आटे की एक बोरी समेत कुछ अन्य चीजों के लिए आया था।’’ इस्माइल ने कहा कि वह केंद्र तक पहुंचने के लिए मीलों पैदल चले, लेकिन खाली हाथ लौटना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे घर में खाना नहीं है। मैं अपने बच्चों के लिए खाना नहीं जुटा पा रहा हूं।’’ क्षेत्र में तीन वितरण केंद्र संचालित कर रहे ‘गाजा ह्यूमैनटेरीअन फाउंडेशन’ (जीएचएफ) द्वारा इस सप्ताह शुरू की गई राहत आपूर्ति व्यवस्था में उथल-पुथल मची हुई है।
बता दें कि संयुक्त राष्ट्र और अधिकतर मानवीय समूहों के विरोध के बावजूद इजरायल ने जीएचएफ को गाजा में खाद्य वितरण का जिम्मा दे रखा है। इससे गत 3 दिनों में, जीएचएफ केंद्रों पर भारी गोलीबारी की नौबत आ चुकी है। इसकी वजह भोजन वितरण केंद्रों पर भीड़ की अराजकता को बताया जा रहा है। लोग आपस में एक दूसरे से भोजन छीन रहे हैं। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई है और दर्जनों घायल हुए हैं। इजरायली सेना ने कहा कि उसने हाल में गाजा में लगभग 1,000 ट्रकों से आपूर्ति की सुविधा प्रदान की है। उसने संयुक्त राष्ट्र पर सामान वितरित करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उसने दावा किया कि सहायता सामग्री चुराने और शेष बंधकों को रिहा करने से इनकार करने के कारण हमास इस संकट के लिए जिम्मेदार है।
इजरायल ने कहा कि वह कब्जे वाले पश्चिमी तट पर 22 और यहूदी बस्तियां बसाएगा। अधिकांश अंतरराष्ट्रीय समुदाय बस्तियों को अवैध और दशकों पुराने संघर्ष को हल करने में बाधा मानते हैं। लगभग तीन महीने पहले इजरायल द्वारा खाद्य, ईंधन, दवा और अन्य आपूर्तियों के प्रवेश पर रोक लगाने के बाद से गाजा के 23 लाख फिलस्तीनियों के लिए भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। पिछले दो सप्ताह में ही उन्हें थोड़ी सहायता मिल सकी है। इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र को सहायता सामग्री वितरित करने के लिए कुछ ट्रकों को भेजने की अनुमति दी है, लेकिन लूटपाट और इजराइली सैन्य प्रतिबंधों के कारण संयुक्त राष्ट्र को सामग्री पहुंचाने में कठिनाई हो रही है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने संवाददाताओं को बताया कि इजरायली अधिकारियों ने पिछले तीन दिन से संयुक्त राष्ट्र के ट्रकों को सीमा पार जाने की अनुमति नहीं दी है।
गाजा में छुपे हमास के आतंकियों ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर आतंकी हमला कर दिया था। इस दौरान हमास ने 1200 से अधिक इजरायलियों को मौत के घाट उतार दिया था। साथ ही 238 लोगों को बंधक बना लिया था। जवाब में इजरायल ने गाजा पर बड़ा हमला शुरू कर दिया। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इजरायल के हमले में अब तक 53 हजार से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इनमें हजारों हमास के आतंकी भी शामिल हैं। हमास के प्रमुख आतंकी इस्माइल हानिया, याह्या सिनवार और मोहम्मद सिनवार को भी इजरायली सेना ढेर कर चुकी है। (एपी)
संपादक की पसंद