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जानिए कौन थे मुहम्मदु बुहारी जिनके निधन पर पीएम मोदी ने किया ट्वीट, जताया दुख

 Published : Jul 14, 2025 12:53 pm IST,  Updated : Jul 14, 2025 12:55 pm IST

मुहम्मदु बुहारी नाइजीरिया की राजनीति के एक चर्चित और प्रभावशाली व्यक्तित्व थे। बुहारी का 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। मुहम्मदु बुहारी का लंदन में इलाज चल रहा था। पीएम मोदी ने बुहारी के निधन पर शोक जताया है।

Former Nigerian President Muhammadu Buhari- India TV Hindi
Former Nigerian President Muhammadu Buhari Image Source : AP

Former Nigerian President Muhammadu Buhari Death: नाइजीरिया के पूर्व राष्ट्रपति मुहम्मदु बुहारी का निधन हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाइजीरिया के पूर्व राष्ट्रपति मुहम्मदु बुहारी के निधन पर शोक व्यक्त किया और भारत के साथ मित्रता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। सैन्य प्रमुख और लोकतांत्रिक राष्ट्रपति के रूप में दो बार नाइजीरिया का नेतृत्व कर चुके बुहारी का लंदन में निधन हुआ है। बुहारी का यहां इलाज चल रहा था। उनकी उम्र 82 वर्ष थी।

पीएम मोदी ने जताया दुख 

पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर अपने शोक संदेश में कहा, ‘‘नाइजीरिया के पूर्व राष्ट्रपति मुहम्मदु बुहारी के निधन से गहरा दुख हुआ है। मुझे विभिन्न अवसरों पर हमारी मुलाकातों और बातचीत की याद आती है। भारत-नाइजीरिया मित्रता के प्रति उनकी बुद्धिमत्ता, गर्मजोशी और अटूट प्रतिबद्धता विशिष्ट थी।’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मैं भारत के 1.4 अरब लोगों के साथ बुहारी के परिवार, नाइजीरिया की जनता और वहां की सरकार के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं।’’  

मुहम्मदु बुहारी के बारे में जानें

मुहम्मदु बुहारी नाइजीरिया के एक प्रमुख राजनेता, पूर्व सैन्य शासक और दो बार देश के राष्ट्रपति रहे थे। बुहारी का जन्म 17 दिसंबर 1942 को कटसीना राज्य के डौरा में एडमू और जुलैहा बुहारी के घर हुआ था। राष्ट्रपति बुहारी का पालन-पोषण उनकी मां ने किया, जब वो लगभग चार साल के थे, तब उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। मुहम्मदु बुहारी का सैन्य करियर बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने 1966 से 1985 तक नाइजीरियाई सेना में सेवा की और विभिन्न सैन्य अभियानों में नेतृत्व किया।

मुहम्मदु बुहारी का सियासी सफर

मुहम्मदु बुहारी ने 1975 में जनरल मुताला मुहम्मद के शासन में पेट्रोलियम मंत्री बने। 1983 में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के खिलाफ एक सैन्य तख्तापलट में सत्ता संभाली और 1983 से 1985 तक नाइजीरिया के सैन्य शासक रहे। उनका शासन कठोर अनुशासन, मीडिया पर सेंसरशिप और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानूनों के लिए जाना गया। बुहारी ने सैन्य शासन के बाद लोकतांत्रिक रास्ता अपनाया और राजनीति में सक्रिय हो गए। 2003, 2007 और 2011 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। 2015 में ऑल प्रोग्रेसिव्स कांग्रेस (APC) पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर नाइजीरिया के 15वें राष्ट्रपति बने। 2019 में फिर से चुनाव जीतकर लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति बने।

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