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रूस के कामचाटका में आया भूकंप दुनिया के 10 सबसे शक्तिशाली भूकपों में शामिल, जानें सबसे तेज कौन?

 Written By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Jul 31, 2025 02:46 pm IST,  Updated : Jul 31, 2025 02:46 pm IST

रूस के कामचटका को दुनिया के सबसे तेज 10 शक्तिशाली भूकंप में शामिल किया गया है। इस भूकंप के बाद अभी कई देशों में बड़ी सुनामी का खतरा लगातार बना हुआ है।

रूस में भूकंप के बाद बाहर निकले समुद्री जीव। - India TV Hindi
रूस में भूकंप के बाद बाहर निकले समुद्री जीव। Image Source : AP

मेलबर्न: रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में स्थित कामचाटका प्रायद्वीप के तट के पास बुधवार सुबह स्थानीय समयानुसार लगभग 11:30 बजे रिक्टर स्केल पर 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आधुनिक इतिहास के 10 सबसे शक्तिशाली भूकंपों में शामिल किया गया है। इससे पहले दुनिया का सबसे तेज भूकंप 2004 में आया था।

20 किलोमीटर की थी गहराई

यह भूकंप करीब 20 किलोमीटर की गहराई में आया और इसके प्रभाव से पेत्रोपावलोस्क-कामचात्स्की शहर में भवनों को नुकसान और कई लोगों के घायल होने की खबर है। यह शहर भूकंप के केंद्र से सिर्फ 119 किलोमीटर दूर स्थित है।

सुनामी की चेतावनी कई देशों तक फैली

इस भूकंप के बाद रूस, जापान और हवाई में सुनामी की चेतावनी और निकासी अभियान शुरू कर दिए गए। इसके अलावा फिलिपींस, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और पेरू तक भी एडवायजरी जारी की गई है।

क्यों इतना भूकंपीय है यह क्षेत्र?

पूरा प्रशांत क्षेत्र "रिंग ऑफ फायर" में आता है, जो एक भूकंपीय और ज्वालामुखीय रूप से अत्यंत सक्रिय इलाका है। अब तक दर्ज किए गए सभी 10 सबसे शक्तिशाली भूकंप रिंग ऑफ फायर में ही आए हैं। कुरील-कामचाटका ट्रेंच कामचाटका के पास स्थित है, जहां प्रशांत प्लेट लगातार ओखोत्स्क प्लेट के नीचे खिसक रही है। यह सबडक्शन जोन होने के कारण यहां भूकंप की तीव्रता और आवृत्ति दोनों अधिक होती है।

1952 में यहां आया था 9 तीव्रता का भूकंप

यहां प्लेटें लगभग 75 मिमी/वर्ष की गति से टकरा रही हैं, जो कि भूगर्भीय मानकों के अनुसार तेज़ है। इसी गति के कारण इस क्षेत्र में विशाल भूकंप अक्सर आते रहते हैं। 1952 में भी इसी क्षेत्र में 9.0 तीव्रता का भूकंप आया था।

कब आया दुनिया का सबसे तेज भूकंप

दुनिया का सबसे तेज भूकंप 2004 में सुमात्रा में आया था। इसकी तीव्रता 9.3 थी। वहीं 2011 का तोहोकू-ओकी जापान (9.1 तीव्रता) का भूकंप, दोनों समुद्र तल को ऊपर-नीचे कर के विनाशकारी सुनामी का कारण बने थे। कामचाटका भूकंप भी इसी तरह का है। इसकी कम गहराई और बड़ी प्लेट सीमा के कारण इसका प्रभाव ज्यादा व्यापक रहा है।

अब आगे क्या होगा?

भूकंप के छह घंटे बाद तक यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार 35 से अधिक आफ्टरशॉक्स (5.0 तीव्रता से बड़े) आ चुके हैं। इस तरह के बड़े भूकंपों के बाद 7.5 तीव्रता तक के आफ्टरशॉक्स संभव होते हैं और ये कई हफ्तों या महीनों तक जारी रह सकते हैं। इस भूकंप ने एक सुनामी भी उत्पन्न की है, जो कुरील द्वीप, कामचाटका प्रायद्वीप और जापान के होक्काइडो क्षेत्र को प्रभावित कर चुकी है। आने वाले घंटों में यह हवाई, चिली और पेरू तक पहुंच सकती है।

दुनिया के लिए चेतावनी

यह भूकंप यह याद दिलाता है कि सबडक्शन जोन वाले क्षेत्रों जैसे कि न्यूजीलैंड, जापान, चिली और इंडोनेशिया में भी भविष्य में ऐसे विनाशकारी भूकंप आ सकते हैं। विशेष रूप से न्यूजीलैंड का हिकुरांगी सबडक्शन जोन भूगर्भीय रूप से 9.0 तीव्रता के भूकंप की क्षमता रखता है। भले ही इतिहास में ऐसा नहीं हुआ हो, पर यदि ऐसा होता है, तो यह एक विशाल सुनामी उत्पन्न कर सकता है। (एपीः)

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