Spy News: ईरान ने स्वीडन के एक और नागरिक को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया, कई हस्तियों से संपर्क में था

Spy News: स्वीडन ने इससे पहले मई महीने में बताया था कि उसके एक नागरिक को स्टॉकहोम और तेहरान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के दौरान गिरफ्तार किया गया है।

Pankaj Yadav Written By: Pankaj Yadav
Published on: July 31, 2022 0:00 IST
iran arrests one more Swedish- India TV Hindi News
iran arrests one more Swedish

Highlights

  • ईरान में जासूसी के आरोप में स्वीडिश नागिरक गिरफ्तार
  • ईरान का आरोप- स्वीडन, इजरायल के लिए जासूसी कर रहा है

Spy News: ईरान ने जासूसी के शक में स्वीडन के एक नागरिक को गिरफ्तार कर लिया है। देश के खुफिया मंत्रालय ने बताया कि एजेंटों ने जासूरी के शक में एक स्वीडिश नागरिक को गिरफ्तार किया गया है। ईरान के इस कदम के बाद कुछ लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं वह स्वीडन में अपने नागरिक हामिद नोउरी की गिरफ्तारी का बदला तो नहीं ले रहा। खुफिया मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि गिरफ्तार संदिग्ध ईरान में कई हस्तियों के संपर्क में था और उसने ईरान के दुश्मन इजराइल की यात्रा की थी। बयान में आरोप लगाया गया है कि स्वीडन, इजरायल के लिए जासूसी कर रहा है।

पहले भी एक स्वीडिश नागरिक को किया गया था गिरफ्तार

स्वीडन की ओर से ईरान के आरोपों पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। बता दें कि हाल के महीनों में ईरान द्वारा स्वीडन के नागरिक को गिरफ्तार करने का यह दूसरा मामला है। इससे पहले स्वीडन ने मई महीने में इस बात की जानकारी दी थी कि उसके एक नागरिक को स्टॉकहोम और तेहरान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के दौरान गिरफ्तार किया गया है। ईरान ने जुलाई की शुरुआत में स्वीडन से अपने राजदूत को बुला लिया था। उसने यह कदम स्वीडन की अदालत द्वारा ईरानी नागरिक हामिद नोउरी को वर्ष 1980 में हुए ईरान-इराक युद्ध के दौरान युद्ध अपराध का दोषी ठहराए जाने के बाद उठाया था।

स्टॉकहोम घूमने गए नोउसी को स्वीडन ने किया था अरेस्ट

61 साल के नोउरी को नवंबर 2019 में उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वह घूमने के लिए स्टॉकहोम गए थे। बता दें कि ईरान ने पिछले कुछ महीनों के अंदर यूरोप के कई नागरिकों को हिरासत में लिया गया है। इनमें स्वीडन का एक टूरिस्ट, फ्रांस के 2 नागरिक, पोलैंड का एक वैज्ञानिक और अन्य शामिल हैं। विदेशी नगारिकों को हिरासत में लेने को लेकर यह चिंता जताई जा रही है कि ईरान इसका इस्तेमाल 2015 में टूट चुके परमाणु समझौते के तहत प्रतिबंधों से मिली राहत को वापस पाने के लिए अमेरिका और यूरोपीय देशों पर दबाव बनाने के लिए कर सकता है।

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