Nobel Peace Prize: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उतावले नजर आ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि ट्रंप खुद अपना बयान भी कर रहे हैं। ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार पाने का सपना कैसे पूरा हो सकता है इसका फॉर्मूला अब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बताया है। मैक्रों ने क्या कहा है ये हम आपको आगे बताएंगे लेकिन उससे पहले जान लीजिए कि ट्रंप कितने आतुर हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में बोलते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि भारत-पाकिस्तान समेत उन्होंने सात युद्धों को समाप्त कराया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'सिर्फ सात महीनों की अवधि में मैंने सात अकल्पनीय युद्धों को समाप्त कर दिया है। इसमें कंबोडिया और थाईलैंड, कोसोवो और सर्बिया, कांगो और रवांडा, पाकिस्तान और भारत, इजरायल और ईरान, मिस्र और इथियोपिया, आर्मेनिया और अजरबैजान शामिल हैं।' ट्रंप के भाषण से नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उनका उतावलापन साफ नजर आता है। इससे पहले भी कई मौकों पर ट्रंप और नोबेल पुरस्कार की खबरें दुनिया भर में सुर्खियां बनती रह हैं।
ये तो रही ट्रंप की बात चलिए अब जानते हैं कि चलिए अब जानते हैं कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने क्या कहा है। मैक्रों ने कहा है कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सच में नोबेल शांति पुरस्कार जीतना चाहते हैं, तो उन्हें गाजा में चल रहे युद्ध को रोकना होगा। मैक्रों ने न्यूयॉर्क में फ्रांस के बीएफएम टीवी से बातचीत के दौरान कहा कि ट्रंप के पास ही इजरायल पर दबाव बनाने की शक्ति है। मैक्रों ने सीधे तौर पर अमेरिका को गाजा में चल रहे युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अमेरिका ही इजरायल को हथियार की आपूर्ति करता है।
ट्रंप और नोबेल शांति पुरस्कार की चर्चा के बीच बड़ा सवाल यह है कि आखिर ट्रंप यह पुरस्कार चाहते क्यों हैं। दरअसल, यह पुरस्कार अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को मिल चुका है और शायद ट्रंप को यह बात चुभती होगी। इतना ही नहीं अगर नोबेल प्राइज मिल जाए तो चुनावी भाषणों में शांति का झंडा लहराना आसान हो जाएगा। इतना ही नहीं व्हाइट हाउस से जाने के बाद भी इतिहास की किताबों में 'नोबेल विजेता' के तौर पर नाम हमेशा-हमेशा के अंकित हो जाएगा।
नोबेल शांति पुरस्कार पाना आसान नहीं है। इसके लिए सबसे पहले नामांकन चाहिए। कोई नेता, संगठन या मान्य संस्थान नाम सुझा सकता है। फिर नॉर्वे की नोबेल कमेटी बैठती है और महीनों तक जांच पड़ताल की जाती है। जांच पड़ताल में देखा जाता है कि असल में किसने दुनिया में शांति लाने की कोशिश की है, ना कि किसने बस ट्वीट में शांति लिख दी है। अक्टूबर में नतीजा घोषित होता है और दिसंबर में इनाम दिया जाता है।
वैसे हकीकत यह है कि, नोबेल शांति पुरस्कार सिर्फ ड्रामा या ट्रेंडिंग ट्वीट्स से नहीं मिलता। इसके लिए ठोस और दीर्घकालिक योगदान चाहिए। लेकिन ट्रंप की कोशिशें इतनी कॉमिक लगती हैं कि कभी–कभी लगता है कमेटी चाहे तो उन्हें "नोबेल कॉमेडी पुरस्कार" दे दे। ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलेगा या नहीं? ये तो नॉर्वे की कमेटी जानती है। फिलहाल, तो दुनिया उनकी नोबेल वाली जिद पर ठहाके लगा रही है।
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